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उद्योग:
सीमेंट
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सीमेंट एक महत्‍वपूर्ण उद्योग है जो राष्‍ट्र के विकास और विस्‍तार में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह मूल रूप से संघटकों को मिश्रण हैं इसमें मुख्‍यत: सिलिकेट और कैल्सियम का एलुमिनेट होता है जिसे कैल्सियम ऑक्‍साइड, सिलिका, एल्‍युमिनियम ऑक्‍साइड और आयरन ऑक्‍साइड से तैयार किया जाता है। सीमेंट के लिए मांग व्‍युत्‍पन्‍न होने के नाते व्‍यापार, वित्तीय, स्‍थावर सम्‍पदा और अर्थव्‍यवस्‍था के मूल संरचना क्षेत्र की क्रियाकलापों की गति पर निर्भर करती है। सीमेंट मनपसंद भवन सामग्री समझा जाता है और सभी निर्माण कार्यों के लिए विश्‍व भर में प्रयुक्‍त होता है जैसाकि आवास और औद्योगिक निर्माण तथा पत्तनों, सड़कों, विद्युत संयंत्रों आदि जैसे मूल संरचना के सृजन में। इस प्रकार से यह सरकार के राजस्‍व संग्रहण में महत्‍वपूर्ण योगदानकर्ता और अर्थव्‍यवस्‍था की समग्र योजनाबद्ध विकास का स्‍तंभ कहा जाता है।

भारत में स्‍थायी भारतीय सीमेंट उद्योग की नींव 1914 में रखी गई थी जब इंडियन सीमेंट कम्‍पनी लिमिटेड गुजरात ने पोरबंदर में सीमेंट का विनिर्माण किया। आरंभिक अवस्‍था में विशेषकर स्‍वतंत्रता के पहले की अवधि में क्षेत्रक का विकास बहुत धीमा रहा था। सीमेंट का देशी उत्‍पादन समस्‍त घरेलू मांग को पूरा करने के लिए काफी नहीं था और तदनुसार सरकार को इसकी कीमत और वितरण को सांविधिक रूप में नियंत्रित करना पड़ता था और अर्थव्‍यवस्‍था में कमी को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में सीमेंट का आयात करना पड़ता था। तथापि, उदारीकरण और अनेकानेक नीतिगत सुधारों को शुरू किए जाने से सीमेंट उद्योग को विनियंत्रित किया गया है जिसने इसकी वृद्धि गति को लय प्रदान की है। इसने क्षमता/उत्‍पादन और प्रक्रिया प्रौद्योगिकी दोनों ही दृष्टि से त्‍वरित वृद्धि की है। आज यह देश का अति विकसित और अग्रणी उद्योग है। सीमेंट एक मूल सामग्री निवेश है जो संवर्धनात्‍मक और विकासात्‍मक प्रयासों को तेजी से बढ़ाने में, मूल संरचना ढांचा और अन्‍य निर्माण संबंधी कार्यों के क्षेत्र में सुकर बनाता है। क्‍योंकि यह एक विनियंत्रित वस्‍तु है, इसका उत्‍पादन और इसकी कीमत मुख्‍य रूप से आर्थिक कारकों द्वारा नियंत्रित होते हैं जैसे मांग और आपूर्ति, कच्‍ची सामग्री की लागत और अन्‍य निवेश, उत्‍पादन तथा वितरण लागतें।

भारतीय सीमेंट उद्योग सम्‍पूर्ण रूप में ऊर्जोन्‍मुखी है और देश में कोयले का तीसरा सबसे बड़ा प्रयोक्‍ता है। यह आधुनिक है और अद्यतन प्रौद्योगिकी का उपयोग करता है जो विश्‍व में सर्वोत्तम में एक हैं। केवल उद्योग का छोटा वर्ग ही गीले और अर्धशुष्‍क प्रक्रियान्‍वयन में पुराना प्रौद्योगिकी आधार का उपयोग करता है। उद्योग की विकास करने की अपार क्षमता है चूंकि लगभग पूरे देश में उत्‍कृष्‍ट गुणवत्ता वाला चूना पत्‍थर पाया जाता है। दूसरे शब्‍दों में यह भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था के समग्र विकास के लागत नियंत्रण, लगातार प्रौद्योगिकी उन्‍नयन के कारण अत्‍याधिक वृद्धि का अनुभव कर रहा है, इसने इसे ऊर्जा सरंक्षित करने में अत्‍याधिक सहायता की है तथा ईंधन एवं सामग्री स्‍थायित्‍व की बचत करने में सहायता की है।

भारत में, औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग (डीआईपीपी), वाणिज्‍य और उद्योग मंत्रालय के अधीन सीमेंट उद्योगों के विकास के लिए नोडल एजेंसी है, अर्थात यह उनके निष्‍पादन की नियमित अंतराल पर निगरानी करने में रत है और उपयुक्‍त नीतिगत प्रोत्‍साहन का सुझाव यथावश्‍यक देने में रत है। विभाग सामान्‍य तौर पर समस्‍त औद्योगिक क्षेत्रक के विकास के लिए और कुछ चुनिंदा उद्योगों का जैसे सीमेंट छोटे इंजीनियरिंग, चमड़ा, रबर, हल्‍के मशीन टूल्‍स आदि का विशेष रूप से विकास के लिए संवर्धनात्‍मक और विकासात्‍मक उपायों के निर्माण और क्रियान्‍वयन के लिए जिम्‍मेदार है। यह समग्र औद्योगिकी नीति और विदेशी प्रत्‍यक्ष निवेश नीति बनाने और प्रवृत्त करने तथा देश में एफडीआई अंतर्वाह का संवर्धन करने में रत है। यह निवेश माहौल और भारत में अवसरों के संबंध में सूचना का प्रसार प्रचार द्वारा तथा संभावित निवेशकों को विविध नीतियों और प्रक्रियाओं के बारे में सुझाव देकर निवेश संवर्धन में सक्रिय भूमिका निभाता है।

डीआईपीपी द्वारा सीमेंट उद्योग से संबंधित प्रवृ‍त्त कुछ नियम और आदेश निम्‍नलिखित हैं :-

भारत विश्‍व में दूसरा सबसे बड़ा सीमेंट विनिर्माता है1 यह विभिन्‍न किस्‍मों के सीमेंट के उत्‍पादन में लगा हुआ है जैसाकि साधारण पोर्टलैण्‍ड सीमेंट (ओ पी सी) पोर्टलैण्‍ड पोजोलाना सीमेंट (पी पी सी), पोर्टलैण्‍ड ब्‍लास्‍ट फर्नेस स्‍लैग सीमेंट ऑयल वेल सीमेंट रैपिड हार्डनिंग पोर्टलैण्‍ड सीमेंट, सल्‍फेट रोधी पोर्टलैण्‍ड सीमेंट, वाइट सीमेंट आदि। उनका उत्‍पादन सख्‍ती से भारतीय मानक ब्‍यूरो के विशिष्टि के अनुसार किया जाता है और उनकी गुणवत्ता विश्‍व में सबसे अच्‍छी गुणवत्ता से तुलनीय होती है। वर्तमान में भारतीय सीमेंट उद्योग में 134 बड़े सीमेंट संयंत्र हैं जिनकी संस्‍थापित क्षमता 173.08 मिलियन टन है और 350 से अधिक छोटे सीमेंट संयंत्र प्रचालनरत हैं, जिनकी अनुमानित क्षमता 11.10 मिलियन टन प्रतिवर्ष है और ये 184.18 मिलियन टन की संस्‍थापित क्षमता रखती हैं। वर्ष 2007-08 के दौरान सीमेंट उत्‍पादन 178.79 मिलियन टन आकलित किया गया है। अप्रैल-दिसम्‍बर, 2007 के दौरान 6.97 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करते हुए वर्ष 2006-07 की संगत अवधि के दौरान यह 126.27 मिलियन टन रहा है। इसी अवधि के दौरान भारत ने सीमेंट और क्लिंकर की 4.61 मिलियन टन मात्रा का निर्यात किया है।

उद्योग अपनी उत्‍पादकता और ऊर्जा क्षमता में सुधार लाने के लिए राष्‍ट्रीय रूप से विभिन्‍न मार्गों का अनुशीलन कर रहा है। खनन, प्रक्रियान्‍वयन, उपस्‍कर और मशीनरी, पैकेजिंग और परिवहन जैसे संयंत्र के सभी वर्गों में प्रौद्योगिकी का सर्वागीण उन्‍नयन हुआ है। नई तकनीक को अपनाया जाना जैसे फोटाग्रामेटरी और रिमोट सेंसिंग ने उद्योग को अनछुआ चूना पत्‍थर का पता लगाने में समर्थ बनाया है। विकसित उपकरण जैसे हाइड्रोलिक खुदाई, सतह खनन, लार्ज व्‍हील लोडर और मोबाइल क्रशर ने उद्योग को उल्‍लेखनीय रूप से अपनी उत्‍पादकता बढ़ाने में सहायता की है। अनेकानेक बड़ी और छोटी सीमेंट कंपनियां क्षेत्रक के लिए वृद्धि और मांग त्‍वरित करने के लिए अपनी विस्‍तार योजनाओं पर विचार कर रही हैं। इस क्षेत्र में मुख्‍य कंपनी हैं ए सी सी, गुजरात अम्‍बुजा सीमेंट लिमिटेड, ग्रासिम इंडस्‍ट्रीज एंड अल्‍टkट्रेक, इंडिया सीमेंट लिमिटेड, जयप्रकाश एसोसिएट्स आदि। सीमेंट उद्योग में सुधार में बंगला देश, इंडोनेशिया, मेलशिया, नेपाल मध्‍य पूर्वी देशों, वर्मा, अफ्रीका और दक्षिणी पूर्वी एशियाई देशों में अपना तैयार बाजार पाया है।

तथापि, उद्योग, विद्युत की उच्‍च लागत, उच्‍च रेलवे प्रशुल्‍क, राज्‍य और केन्‍द्रीय शुल्‍कों की लेवियों का अधिक होना, मूल संरचना परियोजना में सरकारी और निजी निवेश भागीदारी का अभाव, निम्‍न गुणवत्ता का कोयल और संबंधित मूल संरचना जैसे समुद्री और रेल परिवहन, पत्तन और थोक टर्मिनलों का अपर्याप्‍त विकास की दृष्टि से अब तक अनेकानेक बाधाओं का सामना करता है ऐसी बाधाओं से निजात पाने के लिए और सीमेंट उद्योग में उपलब्‍ध अधिकाधिक क्षमता का उपयोग करने के लिए सरकार ने इसकी मांग बढ़ाने के लिए निम्‍नलिखित बलवती क्षेत्रों को अभिचिन्‍हांकित किया है, अर्थात :- (i) आवास विकास कार्यक्रम; (ii) कंक्रीट राजमार्ग और सड़कों का संवर्धन; (iii) बड़ी मूल संरचना परियोजनाओं में तैयार मिश्रित कंक्रीट का उपयोग; और (iv) प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में कंक्रीट सड़कों का निर्माण।

विभाग उद्योग के वर्धित विकास के लिए संस्‍थानों/परिषदों की स्‍थापना करने जैसे अनेकानेक उपाय कर रहा है। उदाहरण के लिए राष्‍ट्रीय सीमेंट और भवन सामग्री परिषद (एनबीसी) का गठन शीर्ष निकाय के रूप में किया गया है जो निरंतर अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास और अंतरण शिक्षा तथा वैज्ञानिक, प्रौद्योगिकी और औद्योगिक सेवाएं सीमेंट, संबंधित भवन सामगी और निर्माण उद्योग के लिए समर्पित है। बेहतर मूल संरचना और आवास के स्‍थायी विकास में ऐसे क्षेत्रकों के लिए मनपसंद प्रौद्योगिकी साझेदारी के रूप में कार्य करता है। एनसीबी में बल्‍लभगढ़, हैदराबाद, अहमदाबाद और भुवनेश्‍वर में स्थित इकाइयों के माध्‍यम से गतिविधियां की जाती हैं। एनसीबी के क्रियाकलापों को इसके निम्‍नलिखित छ: कार्यक्रम केन्‍द्रों के जरिए प्रसार-प्रचार किया जाता है :

  • सीमेंट अनुसंधान और स्‍वतंत्र परीक्षण
  • खनन, पर्यावरण, संयंत्र इंजीनियरिंग और प्रचालन
  • निर्माण, विकास और अनुसंधान
  • औद्योगिक सूचना सेवाएं
  • शिक्षा सेवा जारी रखना
  • गुणवत्ता प्रबंधन, मानक और अंशांकन सेवाएं

दूसरी महत्‍वपूर्ण बात उद्योग उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 के अंतर्गत सीमेंट उद्योग के लिए विकास परिषदर की स्‍थापना करना है। परिषद भारत में वि‍भिन्‍न उपायों के जरिए, विकासात्‍मक परियोजनाओं के लिए निधियां प्रदान करने द्वारा सीमेंट उद्योग के विकास को संवर्धित करती है। परिषद के क्रियाकलापों का निधियन करने का स्रोत है सीमेंट उपकरण नियम, 1993 की तर्ज पर सीमेंट विनिर्माताओं से संगृहीत उपकर है। इस परिषद की विभिन्‍न परियोजनाएं निम्‍नलिखित हैं :-

  • एनसीबी और अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं की आधार स्‍तरीय गतिविधियां सीमेंट उद्योग के विकास के लिए आरंभ की गई है।
  • लागत को घटाकर उद्योग की उत्‍पादकता में सुधार के लिए परियोजनाएं
  • कच्‍ची सामग्रियां की अनुकूलतम उपयोगिता के लिए परियोजनाएं
  • सीमेंट संयंत्रों के आधुनिकीकरण के लिए परियोजनाएं
  • पर्यावरण के सुधार के लिए परियोजनाएं
  • मानकीकरण और गुणवत्ता नियंत्रण कार्यक्रमों के लिए परियोजनाएं
  • सीमेंट की थोक आपूर्ति और वितरण के विकास के लिए परियोजनाएं
  • सीमेंट उद्योग में कार्मिकों के कौशल के उन्‍नयन एवं प्रशिक्षण के लिए परियोजनाएं

वर्ष 2007-08 के दौरान परिषद को उपरोक्‍त गतिविधियों पर व्‍यय के लिए 3.50 करोड़ का आबंटन प्राप्‍त हुआ है।

इसके अतिरिक्‍त उद्योग के निष्‍पादन में सुधार लाने और अनुपूरण करने के लिए विभाग ने 11वीं योजना तैयार करने के लिए सीमेंट उद्योग के संबंध में कार्य दल का गठन किया है। इस कार्य दल की रिपोर्ट में, भारी मात्रा में सीमेंट परिवहन का महत्‍व, तैयार मिश्रित कं‍क्रीट का उपयोग और सीमेंट पर करों और लेवी कम करने पर बल दिया गया है। यह अपशिष्‍ट का सह-प्रक्रियान्‍वयन विद्युत का सह-उत्‍पादन और विश्‍व के सर्वोत्‍कृष्‍ट के समकक्ष प्रौद्योगिकी के दायरे को बढ़ाने के लिए अनुसंधान और विकास कार्यकलापों को वर्धित सहायता के लिए ढांचा तैयार करने के लिए विनियामक सहायता भी चाहता है। उद्योग संबंधी कार्य दल की रिपोर्ट के अनुसार ग्‍यारहवीं योजना के दौरान सीमेंट की मांग में 11.5 प्रतिशत की वृद्धि होने संभावना है और ग्‍यारहवीं योजना के अंत तक सीमेंट उत्‍पादन और क्षमता क्रमश: 269 मिलियन टन और 298 मिलियन टन होना अनुमानित है जिसकी क्षमता उपयोगिता 90 प्रतिशत होगी। लक्षित क्षमता वर्धन हासिल करने के लिए 52,400 करोड़ रु. का निवेश करने की आवश्‍यकता ग्‍यारहवीं योजना के दौरान होगी। उक्‍त लक्ष्‍यों की प्राप्ति चूना पत्‍थर, कोयला, बिजली और चूना पत्‍थर के परिवहन की सुविधाओं जैसे कारकों पर महत्‍वपूर्ण रूप से निर्भर करती है।

इस प्रकार से भारतीय सीमेंट उद्योग के पास सुदृढ़ क्षमता के आधार है और यह गुणवत्ता सीमेंट का उत्‍पादन करता है जो वैश्विक मानक को पूरा करता है। इसने प्रौद्योगिकी उन्‍नयन और अध्‍यतन प्रौद्योगिकी को आत्‍मसात करने में अपार सफलता हासिल की है। सीमेंट के निर्यात की भी भारी संभावना है। महत्‍वपूर्ण बात यह है कि इसकी मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर बहुत हद तक कम हो गया है और आगामी वर्षों में क्षेत्रक में भारी वृद्धि होने की संभावना है। ये सभी निर्दिष्‍ट करते है कि सीमेंट उद्योग को भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभना है। आवासीय क्षेत्रों में वृद्धि होने के कारण, वैश्विक मांग और मूल संरचना विकास जैसे कि राष्‍ट्रीय राजमार्ग में बढ़े हुए क्रियाकलाप से देश में निवेश के लिए प्रचुर अवसर विद्यमान हैं। यह विश्‍व भर से शीर्ष सीमेंट कंपनियों को आकर्षित करता रहा है और अपने समग्र विकास के लिए अधिक समामेलन और अधिग्रहण का संवर्धन कर रहा है।

^ ऊपर

औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग (डीआईपीपी)
वाणिज्‍य और उद्योग मंत्रालय
सीमेंट विनिर्माता संघ
सीमेंट नियंत्रण आदेश, 1967
सीमेंट उपकरण नियम, 1993
सीमेंट (गुणवत्ता नियंत्रण) आदेश,1995
सीमेंट (गुणवत्ता नियंत्रण) आदेश, 2003
भारतीय सीमेंट उद्योग का वैश्विक प्रतिस्‍पर्द्धी सुधार
 
 
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