| भारी वैद्युत, विद्युत उत्पादन और पारेषण, प्रक्रियान्वयन उपकरण, ऑटोमोबाइल, जहाज वायुयान, खनन, रसायन, पेट्रोलियम आदि सहित विभिन्न क्षेत्रकों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए व्यापक किस्म के मूल और पूंजी माल के उत्पादन के लिए भारत ने सुदृढ़ और व्यापक किस्म के विनिर्माण आधार की स्थापना की है।
उद्योग क्षेत्र में अप्रैल-नवम्बर (2007-08) के दौरान वृद्धि का प्रतिशत 9.2 दर्ज किया गया (औद्योगिक उत्पादन के सूचकांक के संदर्भ में मापा गया), जो वर्ष 2006-07 में 11.6 प्रतिशत वृद्धि की तुलना में था। औद्योगिक उत्पादन के सूचकांक के अनुसार अप्रैल-नवम्बर (2007-08) के दौरान 20.8 प्रतिशत की वृद्धि पूंजीगत वस्तु क्षेत्र में दर्ज की गई है।
भारी उद्योग विभाग (डीएचआई), भारी उद्योग और सार्वजनिक उद्यम मंत्रालय में भारी उद्योग के विकास का संवर्धन करने के लिए भारत में नोडल प्राधिकरण है। विभाग भारी इंजीनियरिंग उद्योग, मशीन टूल उद्योग, भारी वैद्युत उद्योग, औद्योगिक मशीनरी और ऑटो उद्योग के विकास से संबंधित है। यह 19 औद्योगिक उप-क्षेत्रकों का कार्य देखता है जिनमें से मुख्य निम्नलिखित हैं :-
- बॉयलर:- घरेलू उद्योग के पास बॉयलर्स की घरेलू मांगों की पूर्ति करने की क्षमता है। इसकी क्षमता 1,000 मेगावॉट यूनिट आकार के सुपर महत्वपूर्ण मानदंड के बॉयलर्स का विनिर्माण करने की है। भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लि. (जीएचईएल) देश में बॉयलरों का सबसे बड़ा निर्माता है जो बाजार की लगभग दो तिहाई हिस्सेदारी रखता है। देश की विकास योजना के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए इसका विस्तार किया जा रहा है।
- सीमेंट मशीनरी:- पूर्ण सीमेंट संयंत्र मशीनरी के विनिर्माण के लिए संगठित क्षेत्रक में 18 यूनिट हैं। 600 करोड़ प्रति वर्ष की संस्थापित क्षमता के साथ उद्योग घरेलू मांग पूरी करने के लिए पूरी तरह सक्षम है। आधुनिक सीमेंट संयंत्रों की डिजाइन जीरो डाउन टाइम, उच्च उत्पाद गुणवत्ता और सीमेंट के उत्पादन की प्रति यूनिट कम से कम ऊर्जा खपत के साथ बेहतर प्रतिफल के लिए की गई है। सीमेंट के संयंत्र शुष्क प्रसंसाधन और पूर्व केल्सीनेशन प्रौद्योगिकी पर 7500 टीपीडी तक की क्षमता के लिए आधारित हैं और इनका निर्माण देश में किया जा रहा है।
- डेरी मशीनरी:- संगठित क्षेत्रक में 16 यूनिट हैं ये निजी और सरकारी दोनों क्षेत्रकों में है जो डेरी मशीनरी उपकरणों का विनिर्माण करते हैं जैसे कि वाष्पीकरण, दुग्ध शीतलक और भंडारण टैंक, दुग्ध और क्रीम डीओडोराइजर, सेन्ट्रीफ्यूजेस क्लारीफायर, एजीटेटर्स, होमोजेनाइजर्स, स्प्रे ड्रायर्स और हीट एक्सचेंजर।
- वैद्युत भट्टा :- इनका उपयोग धातुकर्म और इंजीनियरिंग उद्योगों जैसे फोर्जिंग और फाउण्ड्री, मशीन टूल्स, ऑटोमोबाइल्स आदि में किया जाता है। घरेलू रूप से इन उत्पादों के उत्पादन के लिए पर्याप्त क्षमता की स्थापना की गई है।
- सामग्री संचालन उपकरण:- सामग्री संचालन उपकरणों के विनिर्माण के लिए संगठित क्षेत्रक में 50 यूनिट हैं। इसके अतिरिक्त लघु क्षेत्रकों में अनेकानेक यूनिटें कार्यरत हैं। घरेलू मांग पूरी करने में उद्योग आत्म निर्भर है और यह वैश्विक प्रतिस्पर्द्धा को पूरा करने में सक्षम है।
- धातुकर्म मशीनरी :- इसमें खनिज के लिए लाभकारी उपकरण शामिल हैं अयस्क ड्रेसिंग आकार कम करना, इस्पात संयंत्र उपकरण, फाउण्ड्री उपकरण और भट्टा शामिल हैं। वर्तमान में संगठित क्षेत्रक में 39 यूनिट हैं जो विभिन्न प्रकार के धातुकर्म मशीनरी के विनिर्माण में कार्यरत हैं।
- खनन मशीनरी :- खनन उद्योग की अधिकांश आवश्यकताएं देशी विनिर्माताओं द्वारा पूरी की जा रही हैं। वर्तमान में संगठित क्षेत्रक में 32 विनिर्माता हैं जो विभिन्न प्रकार के भूमिगत और सतही खनन उपकरणों के लिए सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रकों में हैं। इनमें से 17 विनिर्माण यूनिट भूमिगत खनन उपकरण हैं।
- तेल क्षेत्र उपकरण :- घरेलू उत्पादन में मुख्य रूप से समुद्रतटीय ड्रिलिंग उपकरण शामिल है। अपतट ड्रिलिंग के तहत केवल अपतट प्लेटफार्म और दूसरे औद्योगिक ढांचा का उत्पादन स्थानीय रूप से किया जा रहा है। इन उपकरणों के मुख्य उत्पादक हैं, बीएचईएल, हिन्दुस्तान शिपयार्ड, मझगांव डॉक और लारसेन एंड टौब्रो। भारत में पेट्रोलियम उद्योग के खुलने में ऑयल फील्ड और संबंधित उपकरणों की मांग में वृद्धि हुई है।
- रबर मशीनरी :- देश में विनिर्माता उपकरणों के दायरे में इंटर मिक्सर, टायर क्यूरिंग प्रेसेस, टायर मोल्ड्स, टायर बिल्डिंग मशीन टरनेट सर्विसर, बायस कटर, रबर इंजेक्शन मोल्डिंग मशीन, बीड वायर्स आदि शामिल हैं। वर्तमान में संगठित क्षेत्रक में 19 यूनिट हैं जो रबर मशीनरी के विनिर्माण के लिए हैं जिनकी आवश्यकता मुख्यत: टायर एवं ट्यूब उद्योग के लिए होती है।
- शर्करा मशीनरी :- घरेलू विनिर्माता वैश्विक परिदृश्य में प्रबल स्थिति में है और परिकल्पना से आरंभन अवस्था तक अध्यतन डिजाइन के 10,000 टीसीडी (टन क्रासिंग प्रतिदिन) की क्षमता वाले संयंत्र के लिए सक्षम हैं। वर्तमान में संपूर्ण चीनी संयंत्रों के विनिर्माण के लिए संगठित क्षेत्र में 2 इकाइयां हैं और प्रति वर्ष लगभग 200 करोड़ की संस्थापित क्षमता वाले पुर्जे हैं।
- टर्बाइन और जेनरेटर सेट :- प्रति वर्ष 7000 मेगावॉट से अधिक के औद्योगिक टर्बाइनों सहित भाप और जल टर्बाइनों जैसे विभिन्न प्रकार के टर्बाइनों के निर्माण हेतु क्षमता स्थापित की गई। बीएचईएल के अलावा, जहां सबसे बड़ी संस्थापित क्षमता है, निजी क्षेत्र में ऐसी इकाइयां हैं जो विद्युत उत्पादन और औद्योगिक उपयोग के लिए भाप और हाइड्रो टर्बाइन के विनिर्माण के संलग्न हैं।
- मशीन टूल्स :- घरेलू उद्योग का एक सशक्त आधार स्थापित किया गया है और संगठित क्षेत्र में लगभग 200 मशीन ऊर्जा विनिर्माता कार्यरत हैं और साथ ही लघु सहायक क्षेत्र में लगभग 400 इकाइयां सक्रिय हैं। यह औद्योगिक रूप से विकसित देशों को सामान्य प्रयोजन और मानक मशीन टूल्स का निर्यात करने की भी स्थिति में है। विनिर्मित मशीन टूल्स अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता के मानक / सटीकता और विश्वसनीयता पूरा करते हैं। अनेकानेक सहायोग भी इस क्षेत्र में अध्यतन प्रौद्योगिकी लाने के लिए अनुमोदित किए गए हैं।
- स्विच गेयर और कंट्रोल गेयर :- घरेलू रूप से समस्त दायरे के सर्किट ब्रेकर्स बल्क ऑयल न्यूनतम ऑयल, एयर ब्लास्ट, वेक्यूम आदि सहित, का निर्माण किया जा रहा है। इस प्रकार उत्पादित उत्पादों के दायरे में 240 वॉट से 800 किलो वॉट तक का वॉल्टेज रेंज और इसमें स्विच गेयर सहित, कंट्रोल गेयर, एयर सर्किट ब्रेकर्स स्विच, रिवायरेबल फ्यूज और एचआरसी फ्यूज अपने संबंधित फ्यूज आधार सहित होल्डर्स आदि शामिल हैं। स्विच गियर बाजार का वर्तमान आकार 4000 करोड़ रु. से अधिक है। उद्योग डिजाइन और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में प्रतिस्पर्द्धी है चूंकि देश में उपलब्ध कौशल ढांचा अपेक्षाकृत कम खर्चीला है।
- शंटिंग लोकोमोटिव :- चूंकि स्थानीकृत और आंतरिक परिवहन सुविधाओं का रेलवें में इस्पात संयंत्र, ताप विद्युत संयंत्रों आदि में उपयोग किया जाता है अन्यों के साथ-साथ भेल पूर्ण रूप से रोलिंग का विनिर्माण करता है, अर्थात 5000 एचपी तक का वैद्युत लोकोमोटिव 350 एचपी से 3100 एचपी तक डीजल विद्युत लोकोमोटिव मुख्य लाइन और शंटिंग ड्यूटी स्टॉक एप्लीकेशन दोनों के लिए हैं। भारतीय रेल पर अधिकांश रेलगाडियां चाहे वे विद्युतीय या डीजल चलित हों, उनमें भेल के ट्रैक्शन लगाए जाते हैं जिनमें पारम्परिक डी सी ड्राइव और अत्याधुनिक ए सी ड्राइव लगे हुए होते है।
- ट्रांसफार्मर :- घरेलू ट्रांसफार्मर उद्योग अध्यतन उपकरण प्रदान करने की क्षमता सहित सुस्थापित है। उद्योग में पावर ट्रांसफार्मर, वितरण ट्रांसफार्मर और साथ ही वेल्डिंग, ट्रेक्शन और भट्टियों आदि के लिए ट्रांसफार्मरों के विनिर्माण की क्षमता है। ऊर्जा दक्ष ट्रांसफार्मर, जिनमें कम शोर तथा हानि होती है, अंतरराष्ट्रीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विकसित किए जा रहे हैं।
- कपड़ा मशीनरी :- 600 से भी अधिक यूनिट कपड़ा मशीनरी के विनिर्माण में लगे हुए हैं, उनके संघटक उप-साधन और पुर्जें बनाने में रत हैं। इनमें से लगभग 100 यूनिट पूर्ण कपड़ा मशीनरी का विनिर्माण कर रहे हैं। दायरे में चटाई, कोडिंग, यान प्रक्रियान्वयन, फैब्रिक और बुनाई के लिए आवश्यक मशीनरी शामिल हैं।
इस विभाग द्वारा शामिल किए गए उद्योग अर्थव्यवस्था के लगभग सभी क्षेत्रों के लिए माल और सेवाएं प्रदान करते हैं जिसमें विद्युत, रेल और सड़क परिवहन भी शामिल हैं। विभाग विस्तृत पैमाने पर मध्यस्थ इंजीनियरिंग उत्पादों जैसे कास्टिंग, फोर्जिंग, डीजल इंजन, औद्योगिक गेयर और गेयर बॉक्स के विकास को सहायता करता है।
विभाग नियमित आधार पर 48 केंद्रीय सरकारी क्षेत्रक उद्यमों के निष्पादन को प्रशासित और उन पर निगरानी रखता है। यह इन उद्यमों और सरकार की अन्य एजेंसियों के बीच कड़ी का कार्य करता है। यह क्षमता उपयोग, लाभदायकता बढ़ाने और संसाधन सृजित करने में सुधार करने में उनके प्रयासों में सहायता करता है। यह दीर्घावधिक नीति निर्माण के लिए पीएचई और अन्य एजेंसियों के बीच अंतरापृष्ठ के रूप में कार्य करता है। यह दीर्घावधि और स्थायी आधार पर उनके कार्यों को प्रतिस्पर्द्धी और व्यवहार्य बनाने के लिए पीएसयू के पुनर्गठन को भी प्रोत्साहित करता है। विभाग के अधीन 48 सीपीएसई में से 34 वर्तमान में प्रचालनरत हैं और 14 सीपीएसई या तो प्रचालनरत नहीं है अथवा बंद कर दी गई है। विभाग के अधीन 34 प्रचालनरत सीपीएसई में कुल निवेश (सकल ब्लॉक) 31 मार्च 2007 को लगभग 9589.30 करोड़ रु. था।
विभाग के अधीन सीपीएसई इंजीनियरिंग या पूंजी माल के विनिर्माण, परामर्शी और संविदा सेवाओं में लगे हुए हैं। ये उद्यम विस्तृत दायरे के उत्पादों का उत्पादन करते हैं जिसमें मशीन टूल्स औद्योगिक मशीनरी, बॉयलर्स, गैस या वाष्प या हाइड्रो टर्बाइन, टर्बो जेनरेटर्स, वैद्युत उपकरण, रेलवे ट्रैक्शन उपकरण, प्रेसर वेसेल्स, एपी लोकोमोटिव, प्राइम मूवर्स, कार्षिक ट्रैक्टर, उपभोक्ता उत्पाद जैसे कि घड़ी, कागज़, टायर और नमक आदि शामिल हैं।
विभाग विभिन्न उद्योग संघों के साथ लगातार बातचीत करता है और उद्योग के विकास के लिए पहलों को प्रोत्साहित करता है। यह नीतिगत पहलों, प्रशुल्क और व्यापार के पुनर्गठन के लिए उपयुक्त हस्तक्षेपों, प्रौद्योगिकीय सहयोग का संवर्धन और उन्नयन और अनुसधान और विकास आदि द्वारा अपने विकास योजना को हासिल करने में उद्योग की सहायता करता है। |