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उद्योग और सेवाएं
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सेवा क्षेत्रक:
सूचना प्रौद्योकगिकी और आईटी समर्थित सेवाएं
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सूचना प्रौद्योगिकी देश में तेजी से विकसित होते क्षेत्रकों में एक है। वर्ष 1999-2000 में सकल घरेलू उत्‍पाद 1.2 प्रतिशत से बढ़ कर 2006-07 में 5.2 प्रतिशत और 2007-08 में 5.5 प्रतिशत आंका गया है। आ‍ई उद्योग आई टी सॉफ्टवेयर और सेवाओं से और आई टी समर्थित सेवाओं में संचालित होता है। भारत के सॉफ्टवेयर और सेवा उद्योग मूल्‍य श्रृंखला में ऊपर की ओर जा रहे हैं और इससे भारत को वैश्विक बाजारों में अच्‍छी ब्रांड इक्विटी मिल रही है। भारतीय सॉफ्टवेयर और सेवा निर्यात के साथ आईटीईएस-बीपीओ को 2007-08 में 40.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर (163,000 करोड़ रु.) आंका गया जबकि 2006-07 में यह 31.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर (141,000 करोड़ रु.) था, जिसमें डॉलर के संदर्भ में 28.3 प्रतिशत की वृद्धि और रुपए के संदर्भ में 15.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाई गई है।

व्‍यापार प्रक्रियान्‍वयन बाह्य स्रोतन (आईटीईएस-बीपीओ) क्षेत्रक भारतीय सॉफ्टवेयर और सेवाउ द्योग के लिए विकास हेतु मुख्‍य संचालक के रूप में उभरा है। यह युवा कॉलेज ग्रेजुएटों के बीच सबसे बड़ा रोजगार सृजक बन गया है। भारत में रोजगार रत आईटी और आईटीईएस -बीपीओ व्‍यावसायियों की संख्‍या 1999-2000 में 284,000 से बढ़कर 2006-07 में 1.63 मिलियन हो गई है। इसके अतिरिक्‍त यह उद्योग दूर संचार, विद्युत, निर्माण, सुविधा प्रबंधन, सूचना प्रौद्योगिकी, परिवहन, केटरिंग और अन्‍य सेवाओं में प्रत्‍यक्ष और प्रेरित रोजगार के माध्‍यम से रोजगार के लाखों अवसर उत्‍पन्‍न करने में भी सहायता देता है।

भारतीय कम्‍पनियां अपनी सेवा प्रदायों का‍ विस्‍तार कर रही हैं ग्राहकों को अपना विदेशी कार्यरत गहन करने और निम्‍न प्रयुक्‍त व्‍यापार प्रक्रियान्‍वयनों से उच्‍च में जाने में समर्थ बना रही हैं। ये वैश्विक सेवा आपूर्ति क्षमताओं में हरित पहलों, सीमापार विलयनों और अधिग्रहणों के संयोजन के माध्‍यम से वृद्धि करते हैं और साथ ही ये स्‍थानीय कंपनियों के साथ भागीदारी और सहयोग भी करते हैं। यह उन्‍हें नई सेवाओं का प्रत्‍यक्ष प्रदाय करने में सहायता की है।

अधिकांश कम्‍पनियों ने अपनी आंतरिक प्रक्रिया‍ओं और प्रचालनों को अंतरराष्‍ट्रीय मानकों के सदृश्‍य बनाया है जैसाकि अंतरराष्‍ट्रीय मानक संगठन (आईएसओ); क्षमता परिपक्‍वता मॉडल (सीएमएम); और छ सिगमा। इसने भारत को विश्‍वासनीयता स्रोतन गंतव्‍य के रूप में स्‍थापित करने में सहायता की है। दिसम्‍बर 2007 के अनुसार 498 से अधिक भारत स्थित केन्‍द्र (भारतीय और बहुराष्‍ट्रीय स्‍वामित्‍व वाली कंपनियां) में सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग इंस्‍टीट्यूट (एसईआई), कारनेगी मेलन केपेबिलिटी मेच्‍युरिटी मॉडल में प्रमाणित (सीएमएम) स्‍तर 5 (दुनिया के किसी भी देश से उच्‍चतर) में 85 कंपनियों के साथ गुणवत्ता प्रमाणन प्राप्‍त किया है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (डीआईटी) देश में नोडल एजेंसी है, जो सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में राष्‍ट्रीय नीतियों के निर्माण, क्रियान्‍वयन, और समीक्षा करने के लिए जिम्‍मेदार है। सिलीकन सुविधा, इंटरनेट, कम्‍प्‍यूटर आधारित सूचना प्रौद्योगिकी और प्रक्रियान्‍व्‍यन जिसमें हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर शामिल हैं, अंतरराष्‍ट्रीय निकायों से संबंधित प्रक्रियाओं और विषयों का मानकीकरण, ज्ञानाधारित उद्यमों का संवर्धन, ई-कामर्श, सूचना प्रौद्योगिकी शिक्षा, आदि का इसके द्वारा समाधान किया जाता है।

विभाग भारत को सूचना क्रांति के युग में अग्रणी बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। इसके द्वारा की गई कुछ मुख्‍य पहलों में निम्‍नलिखित शामिल है :-

  • 'सूचना प्रौद्योगिमी और सॉफ्टवेयर विकास संबंधी एक राष्‍ट्रीय कार्यदल' का गठन किया गया है जिसका लक्ष्‍य देश के लिए दीर्घावधिक आईटी नीति का निर्माण करना और सूचना विज्ञान उद्योग के विकास की बाधाओं को दूर करने के लिए भी। कार्यदल में भारत का आईटी उद्योग का निर्माण करने और देश में आईटी के उपयोग का प्रचुरोद्भवके लिए विभिन्‍न उपाय सुझाए हैं। इसने सरकार को तीन मुख्‍य रिपोर्टों के रूप में अपनी सिफारिशें प्रस्‍तुत की है।

  • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम का अधिनियम जो इलेक्‍ट्रॉनिक वाणिज्य और इलेक्‍ट्रॉनिक संव्‍यहवहार; कम्‍प्‍यूटर संबंधी अपराधों की रोकथाम, इलेक्‍ट्रॉनिक फाइलिंग का संवर्धन या दस्‍तावेजीकरण औरे अंकीय हस्‍ताक्षर सुकर बनाने के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करता है। इसकालक्ष्‍य ई अभिशासन और उद्योग में वाणिज्‍य को गति देने के लिए समर्थकारी माहौल का सृजन करना है।


  • क्षेत्र का सामाजिक – आर्थिक विकास के लिए सात उत्तर पूर्व राज्‍यों और सिक्किम में सामुदायिक सूचना केन्‍द्रो (सीआईसी) की स्‍थापना की गई है। ये सी आई सी इंटरनेट कनेक्टिविटी, ई-मेल सुविधाएं, नागरिकों और सरकार के बीच अंतरा मुख, दूरस्‍थ शिक्षा कार्यक्रम, राष्‍ट्रीय कार्यक्रमों संबंधी सूचना, आपदा प्रबंधन प्रणाली, जन स्‍वास्‍थ्‍य जागरूकता आदि जनता की मुहैया कराते हैं।

  • ई- अभिशासनएक ऐसा क्षेत्र है जिसमें सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) सरकार की कार्य शैली और जिस तरीके से सरकारी सेवाएं नागरिकों को उपलब्‍घ कराई सरकार की कार्यशैली और जिस तरीके से सरकारी सेवाएं नागरिको को उपलब्‍ध कराई जाती है उन पर काफी प्रभाव डालता है। ई-अभिशासन परियोजनाएं से क्षमता, वृद्धि, सरकार की सेवाओं की क्षमता बढ़ाने और गुणवत्ता सुधारने की संभावना है। इसलिए राष्‍ट्रीय ई- अभिशासन योजना (एनईजीपी) की घोषणा आम जनता के लिए उसके क्षेत्र में सार्वजनिक सेवा प्रदाय केन्‍द्रों के माध्‍यम से सभी सेवाओं की सक्षमता, पारदर्शिता और विश्‍वासनीयता सुनिश्चित करने की परिकल्‍पना की जाती है। इसके अतिरिक्‍त विभिन्‍न आईटी कार्यकलाप जैसाकि सॉफ्टवेयर अनुप्रयोग पैकेजों का विकास, ई-अभिशासन अवसंरचना का सृजन, राष्‍ट्रीय आईडी, नागरिक आंकड़ाधार, स्‍मार्ट कार्ड आदि को मुख्‍य आधार पर बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।

  • स्‍टेट वाइड एरियास नेटवर्क (स्‍वान) पांच वर्षों में 29 राज्‍यों और 6 संघ राज्‍य क्षेत्रों में पूरे देश में स्‍टेट वाइड एरिया नेटवर्क की स्‍थापना करने के लिए योजना है। योजना में कम से कम 2 एमपीबी क्षमता का बैंडविथ के साथ ब्‍लॉक स्‍तर तक राज्‍य और संघ राज्‍य क्षेत्र के मुख्‍यालयों से एसडब्‍ल्‍यूएएन की स्‍थापना करने के लिए राज्‍यों और संघ राज्‍य क्षेत्रों को केन्‍द्रीय सहायता मुहैया कराने की परिकल्‍पना की जाती है।

  • राज्‍य आंकड़ा केन्‍द्रों को एनईजीपी के तहत ई-अभिशासन कार्यकलापों की सहायता करने के लिए एक महत्‍वपूर्ण तत्‍व के रूप में अभिचिह्नांकित किया गया है। विभिन्‍न राज्‍यों में डाटा भंडारण या आंकड़ा केन्‍द्र का सृजन करने का प्रसताव है ताकि आम रूप से प्राप्‍त डाटा का रखरखाव बहुत से ई-अभिशासन अनुप्रयोगों की सहायता के लिए किया जा रहा है।

  • सार्वजनिक सेवा केन्‍द्र (सीएससी) एनईजीपी के तीन अवसंरचना स्‍तम्‍भों में एक है और नागरिकों के द्वार पर सरकारी और निजी सेवा प्रदाय के लिए वास्‍तविक अग्रणी के रूप में कार्य करने वाला माना जाता हैं। सरकार ने देश में ग्रामीण क्षेत्रों में 100,000 ब्राडबैण्‍ड इंटरनेट समर्थित सीएससी की स्‍थापना सुकर बनाने के लिए एक योजना का अनुमोदन कर दिया है जिसका कार्यान्‍वयन सरकारी निजी साझेदारी में किया जाता है।

  • बीपीएल परिवारों के लिए विशिष्‍ट आईडी परियोजना शुरू की गई है जिसका लक्ष्‍य देश के सभी निवासियों का कोर आंकड़ाधार का सृजन करना और 18 वर्ष से अधिक आयु के ऐसे सभी निवासियों के लिए विशिष्‍ट आईडी संख्‍या का आबंटन करना है जिससे कि सरकारी सामाजिक कल्‍याण योजना का बेहतर लक्ष्‍य निर्धारण किया जा सके और गरीबी उन्‍मूलन पहलें की जा सके।

  • ई जिला परियोजनाएं शुरू की गई हैं जिनका लक्ष्‍य जिला स्‍तर पर पिछले कार्य प्रवाह का कम्‍प्‍यूटरीकरण करना है उपयुक्‍त व्‍यापार प्रक्रिया रीइंजीनियरिंग से, जिला स्‍तर पर कार्य भार कम करना, मामलों या शिकायतों का तेजी से प्रक्रियान्‍वयन सुनिश्चित करना, और विभिन्‍न सरकारी योजनाओं का बेहतर मॉनीटरिंग समर्थ बनाना है। इसका उद्देश्‍य वेब आधारित मोड में अनेकानेक सेवाओं को ऑनलाइन लाना, इसमें सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत अनुप्रयोग सहित, हाउस साइट के लिए अनुप्रयोग, राशन कार्ड, शिक्षकों का स्‍थानांतरण, मतदान सूची में समावेशन, पुलिस शिकायत दर्ज करना, जन्‍म/मृत्‍यु प्रमाणपत्र जारी करना और भूमि रिकॉर्डों की प्रतियां। इनमें से अधिकांश सेवाएं जिला स्‍तर पर दी जाती है वे सरकार और नागरिकों के बीच मुख्‍य अंतरापृष्‍ठ मुख्‍य के रूप में कार्य करते हैं।

  • राष्‍ट्रीय सूचना विज्ञान केन्‍द्र (एनआईसी) की केन्‍द्रीय, राज्‍य और जिला स्‍तर पर सरकारी विभागों में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी अनुप्रयोगों को संचालित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। यह सरकारी सेवाओं में सुधार, इसके कार्यों में व्‍यापक पारदर्शिता और विकेन्‍द्रीकृत आयोजना और प्रबंधन में सुधार सुकर बनाता है। इसके द्वारा चलाई गई कुछ मुख्‍य परियोजनाओं में बजट का कम्‍प्‍यूटरीकरण, केन्‍द्रीय उत्‍पाद शुल्‍क का कम्‍प्‍यूटरीकरण, वाणिज्यिक का कम्‍प्‍यूटरीकरण, सर्वोच्‍च न्‍यायालय, उच्‍च न्‍यायालय और जिला न्‍यायालय की न्‍यायालय कम्‍प्‍यूटरीकरण परियोजना, कृषि संबंधी घर सुमारी और विपणन, संसदीय चुनाव आंकड़ा पारेषण और विश्‍लेषण भूमि-रिकॉर्ड का कम्‍प्‍यूटरीकरण और उपयोगिता मैपिंग परियोजनाएं आदि शामिल है।

इसके अतिरिक्‍त यह सुनिश्चित करने के लिए कि आईटी का लाभ आम आदमी को मिले सरकार ने एक आंदोलन क्रांति है ताकि आम आदमी । दस भारतीय भाषाओं, नामत: हिन्‍दी, तमिल, तेलुगु, असमी, कन्‍नड़, मलयालम, मराठी, उडिया, पंजाबी और उर्दू भाषा के लिए सॉफ्टवेयर के साधन और फोंट पहले ही जारी किए गए हैं।

भारत में वैश्विक बाजार के लिए इलेक्‍ट्रॉनिकी /आईटी हार्डवेयर के विकास और विनिर्माण की संभाव्‍यता है परन्‍तु इस उद्योग को कुछ विशिष्‍ट कारकों में परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जैसे कि करों की उच्‍च दर, अपर्याप्‍त मूल संरचना, वित्त की ऊंची लागत, लेन देन की लागत, मालभाड़ा और बिजली, उत्‍पादन की कम मात्रा और कुछ उत्‍पादों ने बढ़ाया गया सीमाशुल्‍क आदि। सरकार ने इलेक्‍ट्रॉनिक और आईटी निर्माण क्षेत्र को एक प्रबलन क्षेत्र के रूप में चुना है और इन उद्देश्‍यों के साथ इलेक्ट्रॉनिक / आईटी हार्डवेयर निर्माण क्षेत्र में प्रोत्‍साहन का एक पैकेज प्रदान किया जाता है:- (i) उद्योग को वैश्विक प्रतिस्‍पर्द्धी बनाना; (ii) इसमें और अधिक प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश को आकर्षित करना; (iii) अत्‍य उत्‍पादों और उत्‍पादन लागतों की कीमतों को कम करना; (v) पैमाने की दक्षता का लाभ लेने के लिए मात्रा को बढ़ाना; (vi) मांग को बढ़ाना; आदि।

ऐसे सभी परिणामों परिणामस्‍वरूप भारत को एशिया प्रशांत क्षेत्र में सबसे तेज विकसित होता आईटी बाजारों के बीच रखा गया है। वैश्विक सॉफ्टवेयर जैसाकि माइक्रोसॉफ्ट, ओरेकल और सैप से यहां आजा कैपटिव विकास केन्‍द्र स्‍थापित किया है। आज अपने विशिष्‍ट लाभों के कारण भारत आईटीईएस के लिए मनपसंद गंतव्‍य बन गया है जो इसका समर्थक सरकारी नीतियां निर्धारित करते हैं, अवसंरचनात्‍मक सुविधाएं, निम्‍न जनशक्ति लागत, विकसित होता ज्ञान पूल, विशेषीकृत तकनीकी कौशल, उच्‍च उत्‍पादकता और सेवा की गुणवत्ता आदि। आईटी में निवेश गंतव्‍य के रूप में बढ़ता आकर्षण के परिणाम स्‍वरूप मस्तिष्‍क प्रवा को भी विपरीता दिशा दी है अर्थात भारतीय मूल के लोग जो विदेशा में व्‍यावसाय करने के चले गए, अब भारत में ही कार्य करने के लिए आकर्षिता हो रहे हैं।

^ ऊपर
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग
ई- गोव- मानक
ई. गवर्नेंस केन्‍द्र
विभाग द्वारा नीतियां
सूचना प्रौद्यो‍गिकी अधिनियम 2000 के लिए नियम
भारतीय भाषाओं के लिए औद्योगिकी (टीडीआईएल)
 
 
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