| मौजूदा और प्रस्तावित लघु उद्यमों का पंजीकरण स्वैच्छिक है और यह अनिवार्य नहीं है। इसका कोई सांविधिक आधार नहीं है परन्तु पंजीकरण स्वयं उद्यम के लिए फायदेमंद है क्योंकि यह यूनिट को केन्द्रीय या राज्य सरकारों द्वारा एसएसआई के संवर्धन के लिए दिए जाने वाल लाभों को लेने के लिए उसे अर्हक बनाता है। उनके द्वारा प्राप्त कुछ प्रोत्साहन क्रेडिट गारंटी योजना, प्राथमिकता क्षेत्रक उधार, पूंजी आर्थिक सहायता, कम किया हुआ सीमा शुल्क आईएसओ-9000 प्रमाणन प्रतिपूर्ति, विद्युत प्रशुल्क आर्थिक सहायता, कर कानून के तहत छूट से संबंधित हैं।
राज्य जिला उद्योग क्षेत्रक केन्द्र के निदेशालय या आयुक्तालय के लघु उद्योगों के पंजीकरण का पंजीकरण से संबंधित प्राधिकरण हैं। यह पंजीकरण स्थान विशिष्ट और उत्पाद विशिष्ट दोनों है। कुछ राज्य की राजधानी और मेट्रोपोलिटन शहरों की तरह यह केवल उन यूनिटों को दिया जाता है जो प्राधिकृत औद्योगिक क्षेत्रों/सम्पदा में स्थित हैं।
लघु यूनिट सामान्यत: दो प्रकार के पंजीकरण के अधीन होते हैं। आरंभ में प्रस्तावित उद्यम के लिए अनंतिम पंजीकरण दिया जाता है। इसे अनंतिम इसलिए कहा जाता है चूंकि उद्यम अभी अस्तित्व में नहीं आया है। यह विशिष्ट समय अवधि के लिए दिया जाता है जिसके दौरान यूनिट के स्थापित होने की संभावना होती है। अनंतिम पंजीकरण प्रमाणपत्र यूनिट को निम्नलिखित प्राप्त करने में समर्थ बनाता है :- (i) वित्तीय संस्थाओं, बैंकों से प्राथमिकता क्षेत्र उधार के तहत सावधि ऋण और कार्यात्मक पूंजी; (ii) आवास, भूमि और अन्य अनुमोदनों के लिए सुविधाएं; (iii) अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) और विनियामक निकायों से मंजूरी जैसे कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, श्रम विनियमन आदि।
एक बार जब यूनिट वाणिज्यिक उत्पादन शुरू करता है तो इसे स्थायी पंजीकरण दिया जाता है। यह जीवन भर का पंजीकरण है जिसे उद्यम के वास्तविक सत्यापन के बाद दिया जाता है और कुछ दस्तावेजों की जांच करने के बाद प्रदान किया जाता है। स्थायी पंजीकरण कराने के लिए कुछ औपचारिकताएं पूरी करना अपेक्षित हैं वे निम्नलिखित हैं :-
- नगर निगम से मंजूरी
- राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मंजूरी
- विद्युत बोर्ड से स्वीकृति
- परिसर का स्वामित्व/किराए पर लेने का अधिकार जहां यूनिट स्थित है
- प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी के मामले में साझेदारी प्रलेख की प्रति/संघ को अनुच्छेद ज्ञापन
- विनिर्मित उत्पाद के लिए बिक्री बिल
- प्रत्येक अन्त्य उत्पाद का बिक्री बिल
- प्रत्येक कच्ची सामग्री की खरीद बिल
- संस्थापित मशीनरी के खरीद बिल
- बीआईएस/क्यूसी प्रमाणपत्र, यदि प्रयोज्य है
- यूनिट की स्थिति, संस्थापित मशीनरी, विद्युत की आवश्यकता आदि का उल्लेख करते हुए एक शपथ पत्र।
संबंधित प्राधिकारी द्वारा जारी पंजीकरण प्रमाणपत्र यूनिट के लघु यूनिट होने का प्रमाण होता है। यह यूनिट को अनेक रियायत पाने में समर्थ बनाता हैं, जैसे :-
- आय कर से छूट और बिक्री कर की छूट, राज्य सरकार की नीति के अनुसार
- विद्युत प्रशुल्क आदि में प्रोत्साहन और रियायतें
- उत्पादित सामान के लिए कीमत और खरीद अधिमान
- मौजूदा नीति के आधार पर कच्ची सामग्री की उपलब्धता
यद्यपि अनंतिम पंजीकरण स्थायी पंजीकरण पाने के लिए अनिवार्य नहीं है परन्तु अनंतिम प्रमाणपत्र यूनिट को उद्यम की स्थापना करने में सहायता के लिए विभिन्न विभागों और एजेंसियों के पास आवेदन करन में समर्थ बनाता है।
ऐसी पंजीकरण प्रक्रिया पूरे राज्य में सामान्यत: एक समान होती है। तथापि, व्यक्ति राज्य द्वारा किंचित परिवर्तन किया जा सकता है। उदाहरण के लिए कुछ राज्यों में सिडो पंजीकरण योजना हो सकती है और एक राज्य पंजीकरण योजना भी, परन्तु पंजीकरण योजना जो भी हो, इसका मुख्य उद्देश्य सांख्यिकी रखना और ऐसे यूनिटों की सूची ताकि प्रोत्साहन दिया जा सके तथा एसएसआई का संवर्धन करने के लिए केन्द्रीय, राज्य और जिला स्तर पर नोडल केन्द्रों का सृजन किया जाए। यह औद्योगिक यूनिट को मान्यता प्रदान करना है और नीतिगत योजना के लिए आंकड़ाधार तैयार करने में सहायता करता है।
यदि लघु यूनिट निवेश सीमा पार करता है, किसी नई मद का विनिर्माण आरंभ करता है, या मद जिसके लिए औद्योगिक लाइसेंस की आवश्यकता होती है या किसी अन्य प्रकार की सांविधिक लाइसेंस की आवश्यकता होती है या स्वामित्व में रहने की शर्तें पूरी नहीं करता है, या नियंत्रण में रहने या किसी अन्य औद्योगिक उपक्रम को अनुषंगी होने की शर्तों को पूरा नहीं करता है तो इसका वि-पंजीकरण किया जा सकता है। |