| खुदरा व्यापार को अंतिम उपभोक्ता को समान और सेवाओं को बेचने के संबंध में सभी कारोबारी क्रियाकलापों को शामिल करके परिभाषित किया गया है। यह उत्पाद आपूर्ति श्रृंखला में अंतिम संपर्क है। भारत में खुदरा व्यापार एक तेजी से बढ़ता उद्योग है। इसके एक सबसे बड़ा एकल क्षेत्रक होने का अनुमान है (कृषि के बाद) प्रतिफल और रोजगार दोनों की दृष्टि से। आईटी बैंडवेगन में अग्रणी होने के बाद भारत खुदरा व्यापार की ओर बढ़ रहा है।
भारतीय रिटेल क्षेत्र लगभग 15 मिलियन रिटेलरों के साथ काफी बिखरा हुआ है। देश में कुल रिटेल आउटलेट की बड़ी संख्या में से अधिकांश खाद्य पदार्थों के साथ संबंधित है। वर्ष 1990 से बड़े औद्योगिक घरानों जैसे रहेजा, पीरामल, टाटा आदि ने रिटेल उद्योग में प्रवेश करना आरंभ किया। इसके अतिरिक्त अनेकानेक भारतीय और विदेशी कम्पनियां अपने ब्रांडों के लिए विशिष्ट केन्द्रों की स्थापना कर रहे हैं देश के भीतर और विदेशों दोनों में। उदाहरण के लिए 'भारती समूह' ने विश्व की सबसे बड़ी रिटेल श्रृंखला ''वॉल मार्ट'' के साथ संयुक्त उद्यम में प्रवेश आंरभ किया।
इसके परिणामस्वरूप विगत कुछ वर्षों में भारतीय खुदरा व्यापार क्षेत्रक में तेजी से परिवर्तन हो रहा है। किराना स्टोर, फेरी वाला, सब्जी वाला पारम्परिक स्वरूप धीरे-धीरे विभागीय स्टोर, बट्टा स्टोर, माल्स, सुपर मार्केट, सुविधा स्टोर, फास्ट फुड केन्द्र, विशेष स्टोर, भंडारण फुटकर व्यावसायी, हैपरमार्केट आदि द्वारा ले लिया जा रहा है। उदाहरण के लिए पेंटालून ने 2002 में बिग बाजार नाम के रियायती स्टोर शुरू किए, रिलायंस ने हैदराबाद में 'रिलायंस फ्रेश' के नाम से अपनाया पहला सुपर बाजार खोला और तब से इसने अनेक राज्यों में अपने पैर फैलाए हैं। सुबीक्षा आडटलेट देश में सबसे तेजी से फैलने वाले आउटलेट में से एक है। इस प्रकार से भारतीय खुदरा व्यवसाय के वर्तमान चरण में असंगठित छोटे और मझौले खुदरा व्यापार धीरेधीरे अधिक संगठित फुटकर व्यावसाय में बदलता जा रहा है।
उपलब्ध अनुमानों के अनुसार 1,330,000 करोड़ रु. का रिटेल बाजार, खाद्य और किराना रिटेल सबसे बड़ा एकल ब्लॉक आकलित किया गया है, जिसका मूल्य 7,92,000 करोड़ रु. आंका गया है (59.5 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ), परन्तु इस संगठित क्षेत्र की हिस्सेदारी कम है। कपड़े, वस्त्रोद्योग और फैशन संबंधी सहायक वस्तुएं 9.9 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ 1,31,300 करोड़ रु. के साथ दूसरा सबसे बड़ा ब्लॉक बनाते है। परन्तु सबसे बड़ा संगठित क्षेत्र रिटेलिंग है, जो टाइम वेयर, (48.9 प्रतिशत हिस्सेदारी) और फुटवेयर (48.4 प्रशितत हिस्सेदारी) क्षेत्र है। वर्ष 2007 में संगठित रिटेल की हिस्सेदारी 5.9 प्रतिशत आंकी गई थी, जो 78,300 करोड़ रु. थी। अनुमान है कि वर्ष 2010 तक खुदरा क्षेत्र 2,30,000 करोड़ रु. का आंकड़ा स्पर्श करेगा (स्थिर मूल्यों पर) जो कुल रिटेल बाजार का लगभग 13 प्रतिशत है। जबकि आधुनिक रिटेल खण्ड 2007 में 42.4 प्रतिशत की दर पर बढ़ा और अब इसमें तीव्र वृद्धि दर बने रहने की आशा है, विशेष रूप से इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि प्रमुख वैश्विक कंपनियां और भारतीय कॉर्पोरेट घराने एक बड़े स्तर पर बाजार में प्रवेश कर रहे हैं। आधुनिक खुदरा व्यापार में इस वृद्धि का संबंध अनेकानेक कारकों के साथ है विशेषकर, बढ़ती क्रय शक्ति, त्वरित वैश्विक अन्योन्ययक्रिया और एकीकरण तथा उपभोक्ता की आवश्यकताओं जीवन शैली और मनोभाव में परिवर्तन होना है। पुन: शॉपिंग सेंटर के व्यापार से ही वर्ष 2010-11 तक 40,000 करोड़ रु. का व्यापार होने का अनुमान है।
इसके अतिरिक्त बड़ा संगाठित खुदरा व्यापार वर्ग जटिल प्रौद्योगिकी और संचार नेटवर्क का उपयोग करता है, कम मूल्य पर गुणवत्ता उत्पादों के उपलब्ध कराने द्वारा उपभोक्ताओं को अनेक प्रकार का लाभ पहुंचाता है। ग्राहकों के लिए विस्तृत विकल्प देता हे, सुविधा के साथ्ज्ञ दुकानदारी, जगह और मनोरंजन आदि मुहैया कराता है। यह सम्पूर्ण रूप से अर्थव्यवस्था के विकास के लिए भी फायदेमंद है क्योंकि यह प्रसंस्कृत और पैकड माल के जन विपणन के लिए अग्रवर्ती संबंध मुहैया कराता है। इसकी विस्तृत पहुँच और बधिर्त प्रमात्रा जो अधिक विनिर्माण, और रोजगार, जीवन का बेहतर स्तर और अधिक सम्पन्नता देता है।
वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए खुदरा व्यापार क्षेत्रक में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश से इसकी उत्पादकता, प्रतिस्पर्धा और क्षमता में और अधिक सुधार होगा। विदेशों से ऐसे निवेश निम्नलिखित के लिए घरेलू प्रयासों को अनुपूरित करने और पूर्ण करने का साधन हैं:- प्रौद्योगिकी उन्नयन का अवसर प्रदान करना, और वैश्विक प्रबंधकीय कौशल एवं प्रचालनों का अभिगमन, मानव और प्राकृतिक संसाधनों का अधिकम उपयोग, निर्यात बाजार खोलना, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष संबंध बनाना अंतरराष्ट्रीय रूप से गुणवत्ता समान और सेवाएं आदि मुहैया कराना।
भारत खुदरा निवेश के लिए भी एक अत्यंत आकर्षक बाजार है। बहुत से राष्ट्रीय और वैश्विक कंपनियां खुदरा व्यापार में निवेश कर रही हैं और अधिक विस्तार के लिए महत्वाकांक्षी योजनाएं है। विशाल मध्यम वर्ग, बढ़ती क्रय शक्ति के साथ लगभग सभी दोहन न किए गए उद्योग में वैश्विक खुदरा व्यावसायियों को आकर्षित कर रहे हैं। भारतीय बाजार में पहले से मौजूद कुछ अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में मौक्डोनाल्ड और पीजा हट जैसे फास्ट फुड श्रृंखला, दोमिनोस, लेवाइस, नाइके, अडिडास, बेनेटन, सोनी, शार्प, कोडाक आदि शामिल हैं।
घरेलू रिटेल उद्योग में निवेश के अवसर अधिकांश उत्पाद श्रेणियों में मिलते हैं, विशेष रूप से खाद्य और किराना (सबसे बड़ी श्रेणी), घरेलू सुधार और उपभोक्ता वस्तुएं, पोशाके,खान पान गृह, आपूर्ति श्रृंखला मूल संरचना (शीत श्रृंखला और रसद) आदि। भारत के पास अंतरराष्ट्रीय खुदरा कंपनियों के लिए विस्तृत किस्म के सामान के लिए स्रोत आधार के रूप में उभरने की क्षमता है।
आज स्थिति के अनुसार खुदरा व्यापार में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश के लिए कोई नीति नहीं है। सरकार स्वत: मार्ग में नकद और कैरी थ्रू में 100 प्रतिशत एफडीआई और एक ही ब्रांड के उत्पाद व्यापार के खुदरा व्यापार में 51 प्रतिशत अनुमत करती है। इसके अतिरिक्त बड़े प्रचालकों के लिए विशेषधिकार मार्ग उपलब्ध है। सरकार खुदरा व्यापार क्षेत्रक में और अधिक उदारीकरण का प्रस्ताव करती है जिसके तहत उपभोक्ता वस्तुओं इलेक्ट्रॉनिक सामान, खेल कूद के सामान, और भवन उपकरण में 51 प्रतिशत एफडीआई अनुमत है। वर्तमान नीतिगत क्षेत्र भी विदेशी खुदरा व्यावसायियों को सीधे उपभोक्ताओं को बहु-बांडों को बेचने से प्रतिसिद्ध करती है। इन नीतिगत ढांचे में खुदरा व्यापारियों के लिए अनेक लाइसेंसिंग औपचारिकताएं शामिल हैं इसलिए एक ही स्थान पर स्वीकृति प्रणाली की मांग है जो पूरी प्रक्रिया को अव्यवस्था रहित करता है।
''भारतीय खुदरा व्यापारी (आरएआई)' संघ भारतीय संगठित खुदरा व्यापारी और आधुनिक खुदरा व्यापारियों की आवाज है जो उनकी मांगों को सामने रखता है। देश के प्रमुख रिटेलरों द्वारा आरंभ इसकी संस्थापक सदस्यता में प्रमुख रिटेलर जैसे आदित्य बिरला रिटेल लि., भारत पेट्रोलियम कॉ. लि., दमास गोल्ड फील्ड्स ज्वैलरी प्रा. लि., ग्लोबल स्टोक्स, लेवी स्ट्राउस (इंडिया) प्रा. लि., लाइफ स्टाइल इंटरेनशल प्रा. लि., मेकडोनाल्ड इंडिया (पश्चिम और दक्षिण), नल्ली, पेंटालून रिटेल (इंडिया) लि., रेमंड लि., रिलायंस वेब स्टोर लि., रिलायंस रिटेल लि., शॉपर्स स्टॉप, सुबीक्षा ट्रेडिंग सर्विसेज प्रा. लि., टीसीएस टेक्स्टाइल प्रा. लि., बॉम्बे डाइंग एण्ड मेनुफेक्चरिंग क. लि., टाइटन इंडस्ट्रीज़ लि., वाधवान फुड रिटेल (प्रा.) लि., जोडियाक क्लोदिंग क. लि. आदि।
भारतीय अर्थ व्यवस्था के खुदरा कारोबार को एक उछाल देने के लिए अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं जैसे कि पहली बार 'इंडिया रिटेल फोरम' के तहत पूरे खुदरा उद्योग के लिए, इमेजेज़ एफ एंड आर रिसर्च तथा कुछ अन्य विश्व की उच्च अनुसंधान तथा परामर्शी फर्में ( जैसे ए टी कीरनी, अंर्स्ट एंड यंग, प्राइस वाफटर हाउस कूपर, टेक्नोपैक, केपीएमजी, आईसीआईसीआई, ए सी नील्सन - ओआरजी मार्ग, सिनोवेट, कुशमेन और वेकफील्ड आदि) भारतीय खुदरा क्षेत्र के विस्तृत अध्ययन के लिए आगे आई हैं। 'इंडिया रिटेल रिपोर्ट 2007 और 2009' को आरंभ कराना तथा खुदरा उद्योग के लिए इस दिशा में एक पोर्टल 'इंडियारिटेलिंग.कॉम' अन्य संबंधित विकास हैं।
वर्तमान वृद्धि प्रवृत्ति के अनुसार भारत में संगठित खुदरा व्यापार ने वास्तव में शीर्ष गति हासिल की है और वह अब उड़ान के कगार पर है। परन्तु यह विश्वास किया जाता है कि खुदरा व्यापार का भारतीय स्वरूप अपना खुद की प्रवृत्ति बनाए रखने जा रही है, असंख्य लघु खुदरा व्यापार और अन्य व्यापारी शहर के केन्द्रों के अवस्थित हो रहे हैं और बड़ा संगठित खुदरा व्यापारी मेट्रो पोलिटन शहरों में आ रहे हैं। दूसरे शब्दों में लघु खुदरा व्यापारी शीर्ष स्थान पर बने रहेंगे कोने की दुकान के रूप में, क्योंकि व्यक्तिकृत सेवाओं और सुविधाजनक पैदल चलने की दूरी के कारण वे विशेष प्रकार की सेवा प्रदान करने में समर्थ हैं जिनकी हमेशा मांग होती रहेगी। |