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सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम:
ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था
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ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था का विकास हमारी योजना प्रक्रिया का एक प्राथमिक विषय है। तदनुसार स्‍थायी आधार पर ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की आर्थिक और सामाजिक खुशहाली सुधारने के लिए सतत प्रयास किए गए हैं। ग्रामीण विकास मंत्रालय के अंतर्गम ग्रामीण विकास विभाग एक नोडल संगठन है जो ग्रामीण जनता के सर्वांगीण उत्‍थान करने के लिए समर्पित है। यह विस्‍तृत पैमाने पर ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था के लिए कार्यक्रमों/योजनाओं के माध्‍यम से सुनिश्चित किया जाता है। योजना का लक्ष्‍य ग्रामीण शहरी विभाजन को पाटना, गरीबी हटाने, रोजगार सृजन, मूल संरचना विकास और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है। विभाग आवश्‍यक सहायता सेवा भी प्रदान करता है और अन्‍य गुणवत्ता इनपुट जैसे कि जिला ग्रामीण विकास एजेंसी और पंचायती राज संस्‍थाओं (पी आर आई एस) के सुदृढ़ीकरण के लिए सहायता, प्रशिक्षण और अनुसंधान, मानव संसाधन विकास, स्‍वैच्छिक कार्यों का विकास आदि, योजनाओं और कार्यक्रमों के नियमित क्रियान्‍वयन के लिए।

कार्यान्वित किए जा रहे कुछ महत्‍वपूर्ण कार्यक्रम/योजनाएं निम्‍नलिखित हैं :-

  • राष्‍ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 (एनआरईजीए):- यह जनता का अधिनियम है, जनता द्वारा है और जनता के लिए अधिनियम है। इसका लक्ष्‍य प्रत्‍येक घर को जिसका वयस्‍क सदस्‍य अकुशल हस्‍तकार्य करने की इच्‍छा रखता है, को प्रत्‍येक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों की गारंटी मजदूरी रोजगार प्रदान करने के माध्‍यम से जीविका की सुरक्षा मुहैया कराना है। यह कार्य की गारंटी भी उत्‍पादकता परिसम्‍पत्तियों के सृजन, पर्यावरण की रक्षा, ग्रामीण महिलाओं को सशक्‍तीकरण प्रदान करने, ग्रामीण-शहरी उत्‍प्रवास कम करने और ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक समानता बढ़ाने में भी सहायता करता है।

  • सम्‍पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना (एसजीआरवाई):- इसका लक्ष्‍य टिकाऊ समुदाय के सृजन, ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक और आर्थिक मूल संरचना का सृजन करने के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा सहित अतिरिक्‍त मजदूरी रोजगार प्रदान करना है। यह कार्यक्रम स्‍वलक्षित प्रकृति का है जिसका विशेष लक्ष्‍य महिलाओं, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति और ऐसे बच्‍चों के अभिभावक, जिन्‍हें खतरनाक कार्यों से वापस निकाला गया है, पर विशेष बल देना है। यह विशिष्‍ट रूप से पंचायती राज संस्‍थाओं द्वारा क्रियान्वित किया जाता है।

  • प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) :- इसका लक्ष्‍य ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्‍येक बसाव के लिए अच्‍छी बारहमासी सड़कों के द्वारा सम्‍पर्क प्रदान करना है। जिसमें 1000 व्‍यक्ति से अधिक रहते है, तीन वर्षों भीतर और प्रत्‍येक 500 व्‍यक्तियों की जनसंख्‍या से अधिक बसाव के लिए दसवीं योजना के अंत तक। पहाड़ी राज्‍यों (पूर्वोत्तर, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, जम्‍मू और कश्‍मीर, उत्तरांचल) के संबंध में और रेगिस्‍तान क्षेत्र (जैसे कि रेगिस्‍तान विकास कार्यक्रम में अभिचिहांकित किया गया है) तथा आदिवासी क्षेत्र के संबंध में 250 व्‍यक्तियों और इससे अधिक जनसंख्‍या के बसाव को जोड़ने के लक्ष्‍य है।

  • इंदिरा आवास योजना (आईएवाई):- यह आथ्रिक सहायता आधारित योजना है जिसका लक्ष्‍य ग्रामीण क्षेत्रों में निर्धनों के लिए मकान मुहैया कराना है। निर्धन लोगों की सहायता जो गरीबी रेखा के नीचे रहते हैं, और जो अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के है, बंधुआ मजदूर से मुक्‍त किए गए हैं और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति श्रेणियों को आवासीय मकान के निर्माण और सहायता अनुदान देकर मौजूदा कच्‍चे मकानों का उन्‍नयन करना इसका लक्ष्‍य है।

  • स्‍वर्ण जयंती ग्राम स्‍वरोजगार योजना (एसजीएसवाई):- यह ग्रामीण निर्धनों के लिए स्‍वरोजगार योजना है जिसका लक्ष्‍य सहायता प्राप्‍त निर्धन परिवारों को बैंक ऋण और सरकारी आर्थिक सहायता प्रदान करने द्वारा आय सृजन परिसम्‍पत्ति मुहैया कराते हुए गरीबी रेखा से ऊपर उठाना है। इसका एक लक्ष्‍य ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्‍या में सूक्ष्‍म उद्यम की स्‍थापना भी करना है जो गरीबों की क्षमता और प्रत्‍येक क्षेत्र पर आधारित होते हैं।

  • ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी सुख-सुविधाओं की व्‍यवस्‍था (पीयूआरए):- यह अभिचिन्‍हांकित ग्रामीण क्‍लस्‍टर में जहां शहर के आस पास 10-15 गांव हैं जिनकी जनसंख्‍या एक लाख या कम है, भौतिक और सामाजिक मूल संरचना में अंतरों को भरना और उनकी विकास क्षमता को और अधिक बढ़ाना है।

यह सुनिश्चित करने के लिए कि इन कार्यक्रमों के कर्यान्‍वयन में स्‍थानीय लोगों की आवश्‍यकताओं और महत्‍वकांक्षाओं को मद्देनजर रखा जाए पंचायती राज संस्‍थाएं महत्‍वपूर्ण साधन मानी जाती हैं। इसलिए अधिकांश ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के तहत महत्‍वपूर्ण भूमिका पंचायती राज संस्‍थानों को सौंपी जाती हैं। वे अधिकांश ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के क्रियान्‍वयन के लिए नींव के पत्‍थर हैं। तदनुसार स्‍थानीय अभिशासन को सुदृढ़ करने के लिए स्‍थायी प्रयास किए गए हैं, लोगों की भागीदारी और पंचायती राज संस्‍थानों के जरिए महिलाओं को सशक्‍त बनाने के संस्‍थागत किया गया है। राज्‍य सरकारों से पंचायती राज को पर्याप्‍त प्रशासनिक और वित्तीय शक्ति देने के लिए अनुरोध किया जा रहा है।

ग्रामीण विकास कार्यक्रम के प्रभावी और सफल कार्यान्‍वयन के लिए प्रत्‍येक जिले में जिला ग्रामीण विकास एजेंसियां स्‍थापित की गई हैं। उन्‍हें विशेष एजेंसियों के रूप में परिकल्पित किया गया है जो एक ओर गरीबी विरोधी कार्यक्रमों का प्रबंधन करने में सक्षम हैं और दूसरी ओर गरीबी उन्‍मूलन में उनको संबंधित करने में समन्‍वयन प्राप्‍त करने की आशा की जाती है। इसके अतिरिक्‍त यह डीआरडीए का कर्त्तव्‍य है कि वह यह पर्यवेक्षण और सुनिश्चित करे कि कुछ लक्षित समूहों (अनु. जाति और अनु. जनजातियों, महिला और विकलांग) के लिए अलग से दिए जाने वाले लाभ उन तक पहुंचे। कार्यक्रमों के क्रियान्‍वयन में पारदर्शिता बढाने के लिए वे समय समय पर विभिन्‍न कार्यक्रमों की प्रगति रिपोर्ट प्रकाशित करते हैं। वे उनके द्वारा प्राप्‍त निधियों के संबंध में वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए जिम्‍मदार हैं चाहे यह कन्‍द्रीय सरकार से प्राप्‍त होती हो या राज्‍य सरकारों से।

इस प्रकार से डीआरडीए की भूमिका को देखते हुए एक कार्यक्रम जो जिला ग्रामीण विकास एजेंसी प्रशासन कहलाता है, का क्रियान्‍वयन उनको व्‍यावसायिक बनाने के मुख्‍य उद्देश्‍य के साथ किया जा रहा है ताकि वे प्रभावी रूप से ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के प्रबंधन करने और प्रयोजनार्थ अन्‍य एजेंसियों के साथ अन्‍योन्‍याय क्रिया करने में समर्थ बनाया जा सके।

ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत तीन स्‍वायत्तशासी निकाय भी हैं :-
  • लोक कार्यक्रम और ग्रामीण प्रौद्योगिकी विकास परिषद (कपार्ट) इसकी स्‍थापना ग्रामीण विकास में उत्‍प्रेरणा देने, समन्‍वयन करने और स्‍वैच्छिक एजेंसियों को प्रोत्‍साहित करने के लिए की गई और उनकी ग्रामीण विकास परियोजनाओं में उनके वित्तीय सहायता देने के लिए भी की गई है। इस प्रकार से यह प्रत्‍यक्ष रूप से स्‍वैच्छिक एजेंसियों और उनकी परियोजनाओं के संबंध में कार्य करता है। आज, यह भारत में ग्रामीण विकास का मुख्‍य प्रवर्तक है, जो विस्‍तृत पैमाने पर विकासात्‍मक पहलों को क्रियान्वित करने में 12,000 से अधिक स्‍वैच्छिक संगठनों जो पूरे देश में फैले हुए हैं, से सहायता प्राप्‍त करता है। इसका लक्ष्‍य ग्रामीण स्‍तर के लोगों और संगठनों का गठन और सुदृढ़ करना है, रोजगार के अवसरों का सृजन और आर्थिक आत्‍मनिर्भरता, सामुदायिक परिसम्‍पत्तियों का सृजन करना और बुनियादी आवश्‍यकताओं को पूरा करना, पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों की संरक्षा और पुनर्सृजन करना भी है।

  • राष्‍ट्रीय ग्रामीण विकास संस्‍थान (एनआईआरडी) यह प्रशिक्षण अनुसंधान, कार्यानुसंधान और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में परामर्शी कार्य करने के लिए देश का शीर्ष निकाय है। इसका मिशन सरकारी और गैर-सरकारी पहलों के द्वारा जोर-शोर से ग्रामीण विकास को सुकर बनाना है। यह राष्‍ट्रीय स्‍तर के प्रशिक्षण की योजना बनाने और क्रियान्‍वयन करने में लगी हुई है।

  • राष्‍ट्रीय ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण (एनआरआरडीए) यह तकनीकी विशिष्‍ट, परियोजना मूल्‍यांकन, अल्‍पकालिक गुणवत्ता नियंत्रण निगरानीकर्ताओं की नियुक्ति, निगरानी प्रणाली का प्रबंधन और ग्रामीण विकास मंत्रालय को समय-समय पर रिपोर्ट प्रस्‍तुत करने द्वारा प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना को सहायता प्रदान करता है। अभिकरण की परिकल्‍पना, सुगठित, व्‍यावसायिक और बहु विधा निकाय के रूप में की गई हैं।

^ ऊपर

ग्रामीण विकास मंत्रालय
राष्‍ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम का कार्यात्‍मक दिशानिर्देश
पंचायती राज मंत्रालय
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