सेवा उद्योग प्रदेश के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए मेरुदंड का निर्माण करता है। यह विश्व की अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा और तेजी से विकसित होता क्षेत्र के रूप में उभरा है, जो वैश्विक उत्पादन और रोजगार में सबसे अधिक योगदान करता है। इसकी विकास दर कृषि और विनिर्माण क्षेत्रकों की तुलना में अधिक रही है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था का बड़ा और अति सक्रिय भाग है, रोजगार क्षमता और राष्ट्रीय आय में योगदान दोनों ही अर्थों में। इसमें व्यापक दायरे के क्रियाकलाप शामिल है जैसाकि व्यापार, परिवहन, संचार, वित्तीय, स्थावर सम्पदा और व्यापार सेवाएं तथा समुदाय सामाजिक और व्यैक्तिक सेवाएं। भारत में सेवा क्षेत्रक रूप में वर्ष 2002-2003 और 2006-2007 के बीच सकल घरेलू उत्पाद में औसत वृद्धि का 68.6 प्रतिशत का योगदान दिया है।
भारतीय अर्थव्यवस्था में अति महत्वपूर्ण सेवाएं स्वास्थ्य और शिक्षा रही है। वे एक सबसे बड़े और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रक हैं और देश की समग्र प्रगति की कुन्जी है। मजबूत और सुपरिभाषित स्वास्थ्य देखभाल क्षेत्रक स्वास्थ्य और उत्पाद कार्यबल का निर्माण करने में सहायता करता है तथा जनसंख्या स्थिर करने में सहायता करता है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण में क्षेत्रों में विभिन्न कार्यक्रमों के क्रियान्वयन करने, मुख्य संक्रमक रोगों की रोकथाम और नियंत्रण करने तथा पारम्परिक और देशी दवाई प्रणाली का संवर्धन करने के लिए जिम्मेदार है। तदनुसार यह राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, विभिन्न राज्यों में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन का क्रियान्वयन करने, मुख्य संक्रमक रोगों की रोकथाम और नियंत्रण करने तथा पारम्परिक और देशी दवाई प्रणाली का संवर्धन करने के लिए जिम्मेदार है। तदनुसार यह राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, विभिन्न राज्यों में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन का क्रियान्वयन करने, सर्वेक्षण और अध्ययन करने आदि जैसे उपाय कर रहा है। जबकि शिक्षा स्वास्थ्य सुधार में बहुत अधिक सहायता करती है, स्वच्छता और भूआकृतिक प्रोफाइल में सहायता करती है। मानव संसाधना विकास मंत्रालय देश से निरक्षरता हटाने में शामिल है। यह प्रारंभिक शिक्षा को साधारण बनाने, पूर्णरूप से वयस्क साक्षरता हासिल करने, शिक्षा संबंधी राष्ट्रीय नीति बनाने, सभी के लिए माध्यमिक और उच्च शिक्षा की आवश्यकता पूरी करना आदि से संबंधित है। भारत जन्म दर, मृत्यु दर कुल उर्वरकता दर और शिशु मृत्यु दर के कारण भूआकृतिक उल्लेखनीय परिवर्तन हासिल किया है एवं देश में अधिक साक्षरता दर प्राप्त किया है।
आर्थिक उदारीकरण युग में सेवा उद्योग में त्वरित परिवर्तन किया है। इसके परिणामस्वरूप वर्षों से भारत कृषि आधारित अर्थव्यवस्था से ज्ञानधारित अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर हुआ है। ज्ञान अर्थव्यवस्था अपने वृद्धि बढ़ाने और विकास के लिए ज्ञान का सृजन, प्रचार-प्रसार और उपयोग करती है। इस अर्थव्यवस्था का एक मुख्य कार्यात्मक स्तम्भ सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और आईटी समर्थित सेवा उद्योग है। सूचना प्रौद्योगिकी विभाग सूचना क्रांति के युग में भारत को अग्रणी बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। भारतीय उद्योग के समग्र विकास में आईटी का प्रबल क्षेत्रक होना जारी है। बड़ी संख्या में भारतीय सॉफ्टवेयर कम्पनियों ने अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता का प्रमाण प्राप्त कर लिया है। आईटी अवसंरचना, इलेक्ट्रॉनिक अभिशासन और आईटी शिक्षा के मुख्य मुद्दों संबंधी अनेकानेक नीतियां बनाई गई है।
दूसरा मुख्य और उभरता उद्योग मीडिया और मनोरंजन रहा है। यह मूल रूप से बौद्धिक सम्पदा प्रेरित क्षेत्रक है जिसके छोटे से बड़े खिलाड़ी देश भर में फैले हहुए है। इसमें फिल्म, संगीत, रेडियो, टेलीविजन और आंखों देखा मनोरंजन शामिल हैं। यह सबके लिए सूचना और शिक्षा मुहैया कराने द्वारा राष्ट्रीय नीतियों और कार्यक्रमों के बारे में लोगों में जागरूकता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सूचना और प्रसारणा मंत्रालय मीडिया उद्योग से संबंधित नियमों, विनियमों और कानूनो के निर्माण और प्रशासन के लिए जिम्मेदार है। इसके अतिरिक्त फुटकर विक्रय एक तेजी से बढ़ता सेवा क्षेत्रक रहा है आय और रोजगार दोनों ही दृष्टि ही दृष्टि से। बहुत से राष्ट्रीय और वैश्विक खिलाड़ी रिटेल खंड में निवेश करते रहे हैं और क्षेत्रक को और अधिक विस्तारित करने के सभ्ज्ञी प्रयास कर रहे हैं। देश में कुल रिटेल केन्द्रों में से अधिकांश खाद्य मदों से संबंधित है।
तथापि, सेवा उद्योग के सभी उप-क्षेत्रकों में उपलब्धियों को अनुपूरित करने और कमियों को पूरा करने के लिए यात्रा और पर्यटन क्षेत्रक को स्थायी तौर पर विकसित किया जाना है। सकल राजस्व और विदेशी मुद्दा अर्जन की दृष्टि से एक सबसे बड़ा उद्योग होने की वजह से यह अन्य आर्थिक क्षेत्रकों में वृद्धि और विस्तार अभिप्रेरित करता है जैसे, कृषि, बागवानी, मुर्गी पालन, हस्तशिल्प, परिवहन, निर्माण आदि तथा सेवा निर्यात के विकास को गति प्रदान करता है। यह देश की राष्ट्रीय एकीकरण प्रक्रिया का मुख्य योगदानकर्ता है तथा प्राकृतिक और सांस्कृतिक माहौल का संरक्षक है। पर्यटन मंत्रालय, अनेकानेक नीतिगत उपाय और प्रोत्साहन के कार्य रहा है ताकि क्षेत्रक को मजबूत किया जा सके जैसाकि राष्ट्रीय पर्यटन नीति की घोषणा।
ये सभी दर्शाते हैं कि सेवाओं में अर्थव्यवस्था का विकास त्वरित करने तथा लोगों की खुशहाली बढ़ाने में अपार क्षमता है। वे निवेशकों के लिए असंख्या निवेश अवसर प्रदान करते हैं। उनकी क्षमता अर्थव्यवस्था में स्थायी रोजगार अवसर सृजित करने तथा इसकी प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने की क्षमता है। उनके बिना भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व मंच पर सुदृढ़ और प्रबल स्थान हासिल न किया होता। इस प्रकार से सेवा क्षेत्रक अर्थव्यवस्था का अभिन्न अंग माना जाता है और इसमें पूरे देश में फैले हुए विभिन्न उप क्षेत्रक शामिल हैं।
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