Spacer
 
Spacer
  Business.gov.in Indian Business Portal
An Initiative of India.gov.in
 
 
तीव्र मीनू
 
Entrepreneurship in Agriculture & Allied Sectors
spacer
Agriculture कृषि क्षेत्र
Agriculture बागवानी और संबद्ध क्षेत्र
Agriculture पशुपालन तथा डेयरी
Agriculture मत्स्यिकी
Agriculture रेशम उत्‍पादन
   
 
Entrepreneurship in Agriculture & Allied Sectors
Promotion of Agriculture & Allied Sectors
बागवानी और संबद्ध क्षेत्र:
सुगंधित और हर्बल बागान
Previous Page
औषधीय, जड़ी बूटी और सुरभित पादप वनस्‍पति-जात का एक विशाल खंड बनाते हैं जो भैषज, प्रसाधन, सुगंध और सुवास उद्योगों द्वारा प्रयोग के लिए कच्‍ची सामग्री उपलब्‍ध कराते हैं। उनके औषधीय गुणों के कारण चिरकाल से देश में उनका प्रयोग किया जा रहा हैं।

भारत को मूल्‍यवान औषधीय और सुरभित पादप जातियों का भंडार माना जाता हैं। इसमें 15 कृषि-जलवायवी क्षेत्र हैं, 47000 भिन्‍न-भिन्‍न पादप जातियां हैं और 15000 औषधीय पौधे हैं। लगभग 2000 देशज पादप जातियों में रोगनाशक गुण हैं और 1300 जातियों अपनी सुगंध तथा सुवास के लिए प्रसिद्ध हैं। चिकित्‍सा की भारतीय प्रणालियों, अर्थात. आयुर्वेद, यूनानी तथा सिद्ध औषधियों की देश में बहुत मांग हैं। 1500 औषधीय पादपों की पहचान की गई हैं, जिनमें से 500 जातियां अधिकांशत: दवाइयां तैयार करने में प्रयोग की जाती हैं।

औषधीय पादप दवाइयां बनाने में प्रयुक्‍त 80 प्रतिशत कच्‍ची सामग्री उपलब्‍ध कराते हैं। इन दवाइयों की प्रभाविता मुख्‍यत: उचित प्रयोग और स‍ही कच्‍ची सामग्री की सतत उपलब्‍धता पर निर्भर करती हैं। चिकित्‍सा की भारतीय प्रणालियों और होम्‍योपैथी का घरेलू बाजार 4000 करोड़ रु. का हैं (2000) और दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा हैं। अकेली आयुर्वेद औषधियों का बाजार 3500 करोड़ रु. का है (2000)। इसके अतिरिक्‍त, प्राकृतिक उत्‍पादों की मांग भी बढ़ रही है यथा औषधीय महत्त्‍व की / भैषज मदें, आहार पूरक तथा प्रसाधन, घरेलू और अंतरराष्‍ट्रीय दोनों बाजारो में।

पर्यावरण और वन मंत्रालय ने भैषज उद्योग में उनके महत्त्‍व को देखते हुए 9500 से अधिक पादप जातियों की पहचार और प्रलेखन किया हैं। इनमें सें लगभग 65 पादपों की विश्‍व व्‍यापर में भारी और सतत मांग हैं। उत्‍पादन मूल्‍य में बाजार के हिस्‍से की दृष्टि से भारत छठे स्‍थान पर हैं। अपनी अनूठी जैव-विविधता के कारण निर्यात क्षेत्र में भारत को विशाल संभावना तथा लाभ उपलब्‍ध हैं। औषधीय और जड़ी-बूटी पादपों से भारत का निर्यात 446 करोड़ रु. है (2000)।

वाणिज्यिक दृष्टि से महत्त्‍वपूर्ण कुछ औषधीय पादप हैं: आमला, चिराता, कालमेघ, सफेद मूसली, अशोक, दारूहल्‍दी, कोकुम, सर्पगंधा, अश्‍वगंधा, गिलोय, कुथ, सेन्‍ना, अतीस, गुडमर कुटकी, शतावरी, बेल गुग्‍गल, मकोय, तुलसी, भुमि, अम्‍लकी, ईसबगोल, मुलेठी, वैविडंग, ब्राह्मी, जटामांसी, पथरचूर (कोलियस), वत्‍सनाम, चंदन, कालीहारी, पीपल, आदि।

विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, संसार की 80 प्रतिशत से अधिक आबादी अपनी स्‍वास्‍थ्‍य रक्षा की प्राथमिक जरूरतों के लिए पारंपरिक चिकित्‍सा पर भरोसा करती है, अधिकतर पादप आधारित अनुभव है कि जड़ी-बूटी उत्‍पादों का अंतरराष्‍ट्रीय बाजार 62 बिलियन यूएस डॉलर का हैं और आशा है कि वर्ष 2050 तक यह 5 ट्रिलियन यूएस डालर का हो जाएगा। भारतीय एक्सिम बैंक ने अपनी रिपोर्ट (1997) में कहा है कि भारत में औषधीय पादपों से संबंधित व्‍यापार का मूल्‍य 5.5 बिलियन यूएस डालर है और तेजी से बढ़ रहा हैं।

और, भारत के इस क्षेत्र में विश्‍व नेता के रूप में उभरने की संभावनाओं के साथ, यह देश जड़ी-बूटी क्षेत्र में निवेश तथा व्‍यवसाय के भरपूर अवसर उपलब्‍ध कराता हैं। हाल में, इस देश के नागरिकों में उन प्राकृतिक लाभों के बारे में प्रबुद्ध जागरूकता पैदा हुई है जो इस देश को वरदान में मिल हुए हैं। हर्बल चाय प्रचुरता से प्रयोग होने वाली एक सुरभित जड़ी-बूटी है जिसका अपना महत्त्‍व है। यह अपने बहुविध प्रभावों के कारण लोकप्रिय हो रही हैं। रोग-विशिष्‍ट हर्बल चाय बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

यह सब सिद्ध करता है कि भारत के पास संसार में सबसे उर्वरक पादप औषधीय शस्‍य हैं। सुरभित, औषधीय तथा जड़ी-बूटी रोपणों के विभिन्‍न खंडों में असंख्‍य अवसर उपलब्‍ध हैं। इस क्षेत्र में भरपूर निवेश आकर्षित करने के लिए और उद्यम की गतिविधियों को प्रोत्‍साहित करने के लिए, केंद्रीय और राज्‍य दोनों स्‍तरों पर विभिन्‍न प्रयास सक्रियता से किए जा रहे हैं।

संगठनात्‍मक रूपरेखा

कृषि मंत्रालय के अ‍धीन कृषि और सहकारिता विभाग, भारत में सुरभित तथा जड़ी-बूटी रोपणों के समेकित विकास को आगे बढ़ाने के लिए मुख्‍य एजेंसी हैं। वह इस क्षेत्र के लिए नीतियां और योजनाएं बनाने में सक्रियता से लगा हुआ हैं।

देश में औषधीय पादप क्षेत्र के समग्र विकास के लिए केंद्रीय स्‍तर पर राष्‍ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एनएमपीबी) की स्‍थापना की गई हैं। यह मुख्‍यत: औषधीय पादपों से संबंधित सभी मामलों के समन्‍वय के लिए उत्तरदायी है, जिसमें निम्‍नलिखित के लिए नीतियां और युक्तियां शामिल हैं : इस क्षेत्र की रक्षा, संपोषण तथा विकास की दृष्टि से संरक्षण, सही लुनाई, लागत-प्रभावी खेती, अनुसंधान एवं विकास, संसाधन, कच्‍ची सामग्री का विपणन। बोर्ड के मुख्‍य कार्य हैं :

  • देश के भीतर और विदेश में औषधीय पादपों से संबंधित मांग / आपूर्ति की स्थिति का आकलन करना;
  • औषधीय पादपों के विकास के लिए योजनाओं और कार्यक्रमों से संबंधित नीतिगत मामलों पर संबधित मंत्रालयों / विभागों / संगठनों / राज्‍य / संघ राज्‍य क्षेत्र सरकारों को सलाह देना;
  • जिन एजेंसियों के पास खेती के लिए जमीन और औषधीय पादपों के संग्रहण, भंडारण तथा परिवहन के लिए मूल संरचना हो, उन द्वारा हाथ में लिए जाने वाले प्रस्‍तावों, योजनाओं तथा कार्यक्रमों के निरूपण में मार्गदर्शन करना;
  • औषधीय पादपों की पहचान, सूचीकरण तथा परिमाणन को प्रोत्‍साहित करना;
  • औषधीय पादपों की इतर-स्‍थाने / स्‍वस्‍थाने खेती और संरक्षण को प्रोत्‍साहित करना;
  • संग्राहकों तथा उत्‍पादकों के बीच सहकारी प्रयासों को प्रोत्‍साहित करना और उन्‍हें अपने उत्‍पाद का भंडारण, परिवहन तथा विपणन प्रभावी ढंग से करने में मदद करना;
  • सूचीकरण, सूचना के प्रसार के लिए डाटाबेस प्रणाली स्‍थापित करना और उन पादपों के औषधीय प्रयोग के लिए पेटेंट प्राप्‍त करने के निवारण को सरल बनाना जो सार्वजानिक क्षेत्र में हैं;
  • कच्‍ची सामग्री के और मूल्‍य वर्धित उत्‍पादों के भी, चाहे औषधि, खाद्य पूरकों के रूप में या शस्‍य परिसाधनों के रूप में, आयात / निर्यात से संबंधित मामलों पर कार्रवाई करना जिसमें देश या विदेश में गुणता तथा विश्‍वसनीयता के लिए उनकी प्रतिष्‍ठा बढ़ाने हेतु उत्‍पाद के विपणन के लिए बेहतर तकनीकों को अपनाना भी शामिल हैं;
  • वैज्ञानिक, प्रौद्योगिक अनुसंधान तथा लागत-प्रभाविता अध्‍ययन करना और देना;
  • खेती और गुणता नियंत्रण के लिए प्रोटोकोल विकसित करना;
  • पेटेंट अधिकारों और अन्‍य बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) की रक्षा को प्रोत्‍साहित करना।

संप्रति, राष्‍ट्रीय स्‍तर पर, विकास के लिए 32 औषधीय पादपों को प्राथमिकता दी गई हैं। उन्‍होंने सरकारी तथा गैर-सरकारी दोनों संगठनों पर लागू होने वाली उन्‍नयन और वाणिज्यिक योजनाओं के अंतर्गत शामिल औषधीय पादप क्षेत्र के भिन्‍न-भिन्‍न क्षेत्रों में वित्तीय सहायता के लिए सक्रियता से योजनाओं व दिशा निर्देशों का निरूपण किया हैं। (i) उन्‍नयन योजना में मुख्‍यत: शामिल हैं: सर्वेक्षण, संरक्षण, शस्‍य उद्यान, विस्‍तार गतिविधियां, मांग-आपूर्ति अध्‍ययन, आर एंड डी, मूल्‍य वर्धन, आदि; (ii) वाणिज्यिक योजना में मुख्‍यत: शामिल हैं: उत्तम रोपण सामग्री का उत्‍पादन, बड़े पैमाने पर खेती, कटाई उपरांत प्रौद्योगिकी अध्‍ययन, अभिनव विपणन क्रियाविधि आदि। और, जागरूकता पैदा करने, एक-समान निगरानी कार्यविधि पर चर्चा करने तथा परियोजनाओं के प्रमुख अन्‍वेषकों को संवेदी बनाने के लिए देश में छह चुने हुए स्‍थानों पर प्रादेशिक कार्यशालाएं आयोजित की गई हैं।

एनएमपीबी की पहल से, प्रदेश / राज्‍य स्‍तर पर देश में औषधीय पादप क्षेत्र के विकास तथा वृद्धि के लिए संबंधित मुद्दों पर ध्‍यान देने के लिए राज्‍य औषधीय पादप बोर्ड (एसएमपीबी) स्‍थापित किए गए हैं। सितंबर 2006 तक पैंतीस (35) एसएमपीबी गठित किए जा चुके हैं। उनमें से कुछ हैं:-

^ ऊपर

 
राज्‍य औषधीय पादप बोर्ड
प्राथमिकता वाले 32 औषधीय पादपों की वार्षिक मांग
भारत में औषधीय पादप उद्यानों की सूची
औषधीय पादपों के अनुसंधान / खेती में लगी कुछ संस्‍थाओं/संगठनों की सूची
 
 
Government of India
spacer
 
 
Business Business Business
 
  खोजें
 
Business Business Business
 
Business Business Business
 
मैं कैसे करूँ
Business कम्‍पनी पंजीकरण करूं
Business नियोक्‍ता के रूप में पंजीकरण करें
Business केन्‍द्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) में शिकायत भरें
Business टैन कार्ड के लिए आवेदन करें
Business आयकर विवरणी भरें
 
Business Business Business
 
Business Business Business
 
  हमें सुधार करने में सहायता दें
Business.gov.in
हमें बताएं कि आप और क्‍या देखना चाहते हैं।
 
Business Business Business
Business
Business Business Business
 
निविदाएं
नवीनतम शासकीय निविदाओं को देखें और पहुंचें...
 
Business Business Business
Business
Business Business Business
 
 
पेटेंट के बारे में जानकारी
Business
कॉपीराइट
Business
पेटेंट प्रपत्र
Business
अभिकल्पन हेतु प्रपत्र
 
 
Business Business Business
 
 
 
Spacer
Spacer
Business.gov.in  
 
Spacer
Spacer