वाणिज्यिक पुष्प कृषि हाल में ही शुरू हुई है, यद्यपि पुष्पों की पारंपरिक खेती सदियों से हो रही है। अब पारंपरिक फूलों की अपेक्षा, निर्यात की उद्देश्य से, कटे फूलों पर अधिक ध्यान दिया जाने लगा है। 1991-92 से अर्थ व्यवस्था के उदारीकरण ने भारतीय उद्यमियों को प्रेरित किया है कि नियंत्रित जलवायवी परिस्थितियों के अंतर्गत निर्यात अभिमुखी पुष्प कृषि यूनिट स्थापित करें। हाल के समय में महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और हरियाणा पुष्प कृषि के प्रमुख केंद्रों के रूप में उभरे हैं। इस समय पुष्प कृषि के अंतर्गत कुल क्षेत्र लगभग 73,970 हेक्टेयर है और 4.60 लाख टन खुले फूलों की तथा 1155 लाख (संख्या) कटे फूलों की पैदावार होती है।
कृषि मंत्रालय के अधीन कृषि और सहकारिता विभाग पुष्प कृषि क्षेत्र के विकास के लिए उत्तरदायी नोडल संगठन है। यह राष्ट्रीय नीतियां तथा कार्यक्रम बनाने और क्रियान्वित करने के लिए उत्तरदायी है जिनका लक्ष्य देश के भूमि, जल, मृदा तथा पादप संसाधनों का इष्टतम उपयोग करके कृषि की तीव्र वृद्धि प्राप्त करना हो। कृषि और सहकारिता विभाग में उद्यान कृषि प्रभाग को इस क्षेत्र के समग्र त्वरित विकास पर नज़र रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसे स्थापित करने के उद्देश्य हैं: उद्यान कृषि फ़सलों के उत्पादन, उत्पादकता तथा उपयोग में सुधार के लिए कार्यक्रमों को लागू करना, उद्यान कृषि की त्वरित वृद्धि के लिए उद्दिष्ट नीतियां बनाना तथा उन्हें समर्थन देना, उद्यान कृषि फ़सलों की रोगमुक्त रोपण सामग्री तथा बीजों की उपलब्धता सरल बनाना, उद्यान कृषि को आगे बढ़ाने के लिए नेतृत्व उपलब्ध कराना और गतिविधियों को समन्वित करना, आदि।
पुष्प कृषि क्षेत्र के विकास और उन्नति के लिए सरकार द्वारा अनेक योजनाएं शुरू की गई हैं। 'वाणिज्यिक पुष्प कृषि का समेकित विकास' एक ऐसी योजना है जो निम्नलिखित उद्देश्यों के साथ लागू की जा रही है : उत्तम रोपण सामग्री तथा अंतरण प्रौद्योगिकी उपलब्ध करा कर पारंपरिक फूलों और कट फूलों के उत्पादन तथा उत्पादकता में सुधार करना, फूलों को वैज्ञानिक विधि से उगाने के लिए मानव संसाधन क्षमताओं में सुधार करना, रक्षित खेती के माध्यम से बेमौसमी तथा उत्तम फूलों के उत्पादन को प्रोत्साहित करना, और खेत पर फूलों की कटाई उपरांत संभाल को सुधारना।
राज्य सरकारों ने अपने - अपने राज्य में इस क्षेत्र की उन्नति तथा विकास के लिए अलग विभाग स्थापित किए हैं।