भारत संसार के फलों और सब्जियों का भंडार है। फलों और सब्जियों की व्यापक विविधता का घर होने के नाते अन्य देशों के बीच उत्पादन के आंकड़ों में भारत की अनन्य स्थिति है। ताज़ा उत्पादों में भारत का 90 प्रतिशत से अधिक निर्यात पश्चिम एशिया और पूर्व यूरोप के बाजारों में जाता है। तथापि, एक कृषि परामर्शदाता के अनुसार, इसे अपने खाद्य और संसाधन उद्योग को बड़े पैमाने पर बढ़ाने की ज़रूरत है।
कृषि मंत्रालय के अंतर्गत कृषि और सहकारिता विभाग कृषि क्षेत्र के विकास के लिए उत्तरदायी नोडल संगठन है।
खाद्य संसाधन उद्योग मंत्रालय एक सुदृढ़ और स्पंदनशील खाद्य संसाधन क्षेत्र विकसित करने के लिए उत्तरदायी सरकार की मुख्य केंद्रीय एजेंसी है। इसे स्थापित करने के उद्देश्य हैं: ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार के अधिक अवसर पैदा करना, किसानों को आधुनिक प्रौद्योगिकी से लाभ उठाने के योग्य बनाना, निर्यात के लिए अधिक उत्पादन करना और संसाधित खाद्य के लिए मांग को प्रेरित करना।
फल और सब्जी संसाधन उद्योगों को दुष्प्रभावित करने वाली कुछ प्रमुख बाधाओं को दूर करने के लिए और इसकी वृद्धि को अपेक्षित प्रोत्साहन देने के लिए खाद्य संसाधन उद्योग मंत्रालय की फल और सब्जी संसाधन क्षेत्र में अनेक प्लान योजनाएं हैं। इनमें निम्नलिखित के लिए योजनाएं शामिल हैं: उद्यमियों का प्रशिक्षण, फलों और सब्जियों के संसाधन के लिए, मशरूम संसाधन सहित, मूल संरचना सुविधाएँ बनाना, हॉप और औद्योगिक संपदाएँ, एफ़ एण्ड वीपी यूनिटों के स्थापना / प्रसार / उन्नयन तथा संविदा खेती के माध्यम से पीछे की ओर संपर्कों का विकास, विज्ञापन द्वारा बाजार को बढ़ावा देना, एफ़पीओ चिह्न और सांझे ब्रांड नाम के अंतर्गत लघु निर्माताओं के उत्पादों के विपणन को बढ़ावा देना, गुणता नियंत्रण प्रयोगशालाओं की स्थापना और नई तकनीकों तथा रीतियों को पहचानने में अनुसंधान एवं विकास, पैकेजिंग सहित।
विभिन्न राज्यों में महाराष्ट्र पहले स्थान पर है; क्षेत्रफल में इसका योगदान 27 प्रतिशत है और उत्पादन में 21.5 प्रतिशत आंध्र प्रदेश क्षेत्रफल तथा उत्पादन में दूसरे स्थान पर है और फलों का उसका योगदान 13 प्रतिशत तथा 16 प्रतिशत है। अधिकतम उत्पादकता मध्य प्रदेश में देखी गई (22.6 एमटी / हेक्टेयर), उसके बाद तमिलनाडु (19.9 एमटी / हेक्टेयर), गुजरात (15.9 एमटी / हेक्टेयर) और पश्चिम बंगाल (12.8 एमटी / हेक्टेयर) का स्थान है। 1991-92 से 2001-02 तक उत्पादकता में सबसे अधिक वृद्धि (5 प्रतिशत) केरल में थी, जब कि 2001-2002 से 2004-05 तक उत्तर प्रदेश में यह 10.2 प्रतिशत थी।