पशुधन क्षेत्र में किसानों के सामने आनेवाली प्रमुख बाधाएं नस्ल, आहार एवं चारे, स्वास्थ्य रक्षा और उत्पाद के लिए लाभकर कीमत से संबंधित हैं। नई 'किसानों के लिए राष्ट्रीय नीति, 2007' में एक उपयुक्त कौशल द्वारा इन मुद्दों पर विचार किया गया हैं।
विभाग 2008-09 के दौरान 28 योजनाएं क्रियान्वित करना चाहता है जिनमें आंध्र-प्रदेश, कर्नाटक महाराष्ट्र तथा केरल में 31 आत्म हत्या प्रवण जिलों के लिए विशेष पैकेज भी शामिल हैं। इन 28 योजनाओं में से 16 पशुपालन से संबंधित हैं, 4 डेयरी विकास में, 6 मत्स्यिकी क्षेत्र से और 1 सचिवालय एवं अार्थिक सेवाओं से विभाग ने 2008-09 के लिए 1891.25 करोड़ रु. के वार्षिक योजना प्रस्ताव बनाए। इसमें 40 करोड़ रु. के प्रस्ताव के बदले में योजना आयोग ने 2008-09 के लिए 1000.00 करोड़ रु. का बजट आबंटित किया हैं।
ग्यारहवीं योजना के प्रस्ताव
योजना आयोग ने इस विभाग के लिए ग्यारहवीं योजना के लिए 8174.00 करोड़ रु. का व्यय निर्धारित किया हैं। इसमें शामिल है पशुपालन के लिए 4243.00 करोड़ रु. की राशि, डेयरी विकास के लिए 780.00 करोड़ रु. की, मत्स्यिकी के लिए 2776.00 करोड़ रु. की, सचिवालय एवं आर्थिक सेवाओं के लिए 35.00 करोड़ रु. की और आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र तथा केरल में 31 आत्महत्या-प्रवण जिलों में पशुधन व मत्स्यिकी के विशेष पैकेज के लिए 340.00 करोड़ रु. की राशि।
11 वीं योजना में पशुधन क्षेत्र के लिए समग्र रूप से 6 से 7 प्रतिशत प्रति वर्ष के बीच वृद्धि प्राप्त करने का प्रस्ताव है - दूध के लिए 5 प्रतिशत प्रति वर्ष की और मांस तथा कुक्कुट के लिए 10 प्रतिशत प्रति वर्ष की वृद्धि। अधिक वृद्धि का लाभ न्यायसंगत होना चाहिए, जिससे मुख्यत: लघु तथा सीमांत किसानों का और भूमिहीन मजदूरों का हित हो जिनके पास देश का अधिकतर पशुधन रहता है। इससे कम सुविधा प्राप्त क्षेत्रों का भी हित होना चाहिए यथा सूखा-प्रवण, शुष्क तथा अर्ध-शुष्क क्षेत्र। इस क्षेत्र को ग्रामीण इलाकों में लोगों के लिए रोजगार के अतिरिक्त अवसर भी उपलब्ध कराने चाहिएं, विशेषत: महिलाओं के लिए, जो घरों में पशुधन की देख-रेख करती हैं, और इस प्रकार महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए। 11वीं समुद्री मत्स्यिकी संसाधन और अंतर्देशीय जल योजना की नीति निम्नलिखित बातों पर आधारित है :
- वर्तमान विकास तंत्र की संस्थागत पुन: संरचना की जरूरत है, राष्ट्रीय स्तर पर भी और राज्य स्तर पर भी।
- आज की आवश्यकता एक चिरस्थायी और वित्तीय दृष्टि से व्यवहार्य पशुधन फार्मिंग है जो उद्यम के माध्यम से धन और स्व-रोजगार पैदा करें।
- सरकारी-निजी भागीदारी के सफल उदाहरणों को दोहराया जाए और 11 वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान उनका प्रसार किया जाए।
- 'आनंद' जैसे उत्पादक संगठनों के स्वरूप पर उपक्रम पशुधन के अन्य उत्पादों में भी शुरू किए जाएं, विशेषत: मांस और कुक्कुट।
- पशुधन किसानों के द्वार पर कुशल और प्रभावी विकेंद्रीकृत सेवाएं उपलब्ध कराने की जरूरत हैं।
- प्रौद्योगिक विकास उत्पादकों को अंतरित करने के लिए एक कार्यविधि बनाई जाएं।
- आंध्र प्रदेश में आत्महत्या प्रवण जिलों में, पशुधन क्षेत्र की आवश्यकताएं पूरी करने के लिए ऋण सुविधा उपलब्ध कराने की जरूरत हैं।