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बागवानी और संबद्ध' क्षेत्र देश में खाद्य और पोषण सुरक्षा का अभिन्न तत्व है। बागवानी मुख्य खंड है जबकि इसे विभिन्न उप खंड हैं फल, सब्जियां, सुगंधित और हर्बल पौध फूल, मसाले और बागानी फसलें। ये सभी आर्थिक सुरक्षा के अनिवार्य तत्व माने जाते हैं भारत की व्यापार कृषि-अबोहवा, विविध प्रकार की बड़ी मात्रा में बागवानी फसलें उगाने के लिए अनुकूल है जिसमें कंद-मूल, घुबर फसलें, मशरूम सजावटी फसलें बागानी फसलें जैसे नारियल, ताड़ काजू और कोकोआ शामिल हैं।
भारत सरकार में बागावानी फसलों को भूमि के सक्षम उपयोग और प्राकृतिक संसाधनों का अनुकूलतम उपयोग द्वारा कृषि में स्थिति अनुकूल तरीके से विविधकरण के साधन के रूप में मान्यता दी है। बागवानी में रोजगार के अपार अवसर विशेषकर बेरोजगार युवाओं और महिलाओं के लिए सृजन की क्षमता है। बहुत सी वस्तुओं के उत्पादन में भारत नेतृत्व करते आ रहा है जैसे आम, केला, क्षारीय नींबू, नारियल, ताड़, काजू, अदरक, हल्दी और काली मिर्च। वर्तमान में यह विश्व में फल और सब्जियों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है।
भारत का सब्जी उत्पादन चीन के बाद दूसरा स्थान है और फूलगोभी, के उत्पादन में पहला स्थान है प्याज में दूसरा और बंदगोभी में तीसरा स्थान है। भारत ने फूलों के उत्पादन में भी उल्लेखनीय विकास किया है। इसके अतिरिक्त यह मसालों का सबसे बड़ा उपभोक्ता, उत्पादक और निर्यातक है। भारत में व्यापक किस्म के मसाले पाए जाते हैं जैसे काली मिर्च, इलायची (छोटी और बड़ी), अदरक, लहसुन और बहुत किस्म की पेड़ और बीज मसाले। देश में लगभग सभी राज्य एक या अधिक मसाले उगाते हैं। मुख्य मसाला उत्पादक राज्य है आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, उड़ीसा और मध्य प्रदेश। पूर्वोत्तर क्षेत्र और अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह के पास भी संभावित मसाला उत्पादन क्षेत्र हैं विशेषतया जैविक रूप से।
इसके अतिरिक्त नारियल सदाबहार फसल है। लगभग 10 मिलियन लोग इसके उत्पादन, प्रसंस्करण और संबंधित क्रियाकलापों पर निर्भर रहते हैं। यह मुख्यत: देश के तटीय राज्यों तथा पूर्वोत्तर क्षेत्रों के 1.84 मिलियन हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में उगाया जाता है। इसका उत्पादन 8.67 मिलियन टन है। भारत नारियल उत्पादन में विश्व का अग्रणी देश है।
इस प्रकार से, वर्षों से बागवानी और संबद्ध क्षेत्र के विकास के लिए बहुत अधिक प्रगति की गई है। निवेश वृद्धि के फलस्वरूप उत्पादन बढ़ा है और ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बागवानी उत्पाद की उपलब्धता बढ़ी है। क्षेत्र की उन्नति और वाणिज्यिकीकरण के लिए बहुत सी योजनाएं और नीतियां समय-समय पर लाई गई हैं। क्षेत्र में मौजूदा संभावना से बड़ी संख्या में निवेशक फायदा उठा रहे है तथा दोहन न किए गए संभावना की खोज कर रहे हैं।