उद्यान कृषि किसी भी राष्ट्र में कृषि की मुख्य रीति होती है। यह मूलत: बगीचों या फलोद्यानों की खेती का विज्ञान है, अर्थात इसका आशय फलों, सब्जियों, फूलों और सजावटी पौधों की खेती की प्रक्रिया से है। इसमें शामिल हैं : खेती की भूमि का क्षेत्र तथा उत्पादकता बढ़ाना, कृषि में प्रौद्योगिकी पहलू को लाना, किसानों की आय तथा उनके जीवन स्तर को ऊपर उठाना, रोज़गार के अवसरों को स्रोत बनाना, आदि।
भारत को विविध कृषि - जलवायु का वरदान प्राप्त है जो उद्यान कृषि की अनेक फ़सलें उगाने के लिए बहुत अनुकूल है यथा फल, सब्जियां, मूल कंद, सुगंधित तथा औषधीय पौधे, मसाले और रोपण फ़सलें यथा नारियल, सुपारी, काजू तथा कोको। यह फलों तथा सब्जियों तथा दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। 2006-07 में उद्यान कृषि के कुल उत्पादन में सब्जियों, फलों, रोपणन फ़सलों तथा मसालों का योगदान क्रमश: 59.8 प्रतिशत, 30.9 प्रतिशत, 6.5 प्रतिशत और 2.1 प्रतिशत था।
भारत में, कृषि और सहकारिता विभाग, कृषि मंत्रालय, देश के उद्यान कृषि क्षेत्र में उद्यम गतिविधियों को प्रोत्साहनहित करने के लिए नोडल एजेंसी। इसका ध्यान विभिन्न उद्यान कृषि फसलों के लाभों को खोलने पर है, जिसके लिए इसकी अनेक योजनाएँ हैं यथा 'राष्ट्रीय उद्यान कृषि मिशन' और 'उत्तर पूर्वी राज्यों, सिक्किम, जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखण्ड में उद्यान कृषि के समेकित विकास के लिए प्रौद्योगिकी मिशन'। उद्यान कृषि में समेकित विकास को बढ़ावा देने के लिए और फलों तथा सब्जियों के उत्पादन एवं संसाधन को समन्वित, प्रेरित और संपोषित करने के लिए राष्ट्रीय उद्यान कृषि बोर्ड (एनएचबी) की भी स्थापना की गई है।
देश के प्रमुख शहरी केंद्रों में फलों, सब्जियों 'टर्मिनल मंडियों' को बढ़ाना देने के लिए भी उपक्रम किया गया है ताकि इलेक्ट्रॉनिक नीलामी, कोल्ड चेन तथा रसद आदि के लिए अधुनातन मूल संरचना सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा सकें। ऐसी मंडी किसानों को अपने उत्पाद के विपणन के लिए सरलता से पहुंच उपलब्ध कराती है।
इस प्रकार, भारत के उद्यान, कृषि में व्यवसाय के असंख्य अवसर उपलब्ध हैं। विश्व भर से निवेशक तथा उद्यमी इस क्षेत्र में अधिकाधिक निवेश कर रहे हैं और भारत की उद्यान कृषि फ़सलों के व्यापार में सक्रियता से लगे हुए हैं। केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर सरकार देश में उद्यान कृषि की गतिविधियों की वाणिज्यीकरण के सभी प्रयास कर रही है।