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भारत में मत्स्य क्षेत्र से संबंधित योजनाओं के सही क्रियान्वयन के लिए केंद्र और राज्यों दोनों द्वारा अनेक प्रवर्तन तथा उपाय किए गए हैं। इस क्षेत्र के अंतर्गत केंद्र द्वारा समर्थित योजनाओं की प्रगति नीचे लिखे अनुसार है:-
- 'अंतर्देशीय मास्त्यिकी और जल कृषि के विकास पर केंद्र द्वारा समर्थित योजना' के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2006-07 के दौरान 20.75 करोड़ रु. की राशि मोचित की गई थी। 2007-08 के दौरान (दिसंबर 2007 तक) मत्स्य कृषि के अंतर्गत 40,000 हेक्टर जल क्षेत्र लाने और 27,000 मत्स्य किसानों के प्रशिक्षण का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए विभिन्न राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों को 9.67 करोड़ रु. की राशि मोचित की गई हैं।
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'स्वच्छ पानी जल कृषि का विकास' की योजना में 2006-07 के दौरान, 22,984 हेक्टर का अतिरिक्त क्षेत्र मत्स्य कृषि के अंतर्गत लाया गया और 37,923 मछुआरों को उन्नत रीतियों का प्रशिक्षण दिया गया। योजना से लगभग 33898 व्यक्ति लाभान्वित हुए हैं। मत्स्य खेती की नई प्रौद्योगिकी के समावेश और एफएफडीए के प्रयासों के कारण, योजना के अंतर्गत शामिल पोखरों तथा तालाबों की राष्ट्रीय औसत उत्पादकता 3100 कि.ग्रा./ हेक्टर/ वर्ष के आंकडे तक पहुंच गई है। योजना के आरंभ से 2006-07 तक, लगभग 7.21 लाख हेक्टर जल क्षेत्र मत्स्य कृषि के अंतर्गत लाया गया है, 8.63 लाख मछुआरों को मत्स्य खेती की उन्नत रीतियों में प्रशिक्षित किया गया, और कार्यक्रम के अंतर्गत लाभ उठाने वालों की संख्या लगभग 12.38 लाख है।
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'खारा पानी जल कृषि का विकास' की चल रही योजना के शुरू से 2006-07 तक, लगभग 28,885 हेक्टर जल क्षेत्र श्रिम्प कृषि के अंतर्गत लाया गया है और 27,236 श्रिम्प किसानों को श्रिम्प खेती की उन्नत रीतियों में प्रशिक्षित किया गया हैं। कार्यक्रम के अंतर्गत लाभ उठाने वालों की संख्या लगभग 25,726 हैं।
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केंद्र द्वारा समर्थित 'समुद्री मात्स्यिकी मूल संरचना और कटाई-उपरांत क्रियाओं के विकास पर योजना' के अंतर्गत क्रियान्वयन एजेंसियों को 2006-07 के दौरान 48.48 करोड़ रु. की राशि मोचित की गई और 2007-08 के दौरान (31 दिसंबर 2007 तक) 31.36 करोड़ रु. की राशि मोचित की गई।
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'तटीय मात्स्यिकी विकास' योजना के अंतर्गत सागर में मछुआरों की सुरक्ष के लिए स्थिति का पता लगाने वाले और संचार उपस्कर लगा दिए गए हैं। इन उपस्करों की यूनिट लागत लगभग 1.50 लाख रु. बनती है, जिसका 20 प्रतिशत, किंतु 30,000 रु. से अधिक नहीं, 10 वीं योजना के दौरान 1,666 नौकाओं के लाभ के लिए राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) के माध्यम से सब्सिडी के रूप में उपलब्ध कराया गया था। और, 2006-07 के दौरान 'एचएसडी तेल पर मछुआरा विकास छूट' योजना के लिए 1532.35 लाख रु. की राशि मोचित की गई थी।
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'संसाधन विशिष्ट गंभीर सागर मत्स्यन वाहन' के घटक के अंतर्गत, प्रौद्योगिकी अधिग्रहण और वित्तीय प्रोत्साहन के लिए 10 अदद वर्तमान श्रिम्प ट्रॉलरों का परिवर्तन किया जाएगा जिसके लिए रू. 15 लाख प्रति वाहन की सब्सिडी दी जाएगी।
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'मत्स्यन पत्तनों और मत्स्य अवतरण केंद्रों की स्थापना' की योजना के अंतर्गत विभिन्न तटीय राज्यों / संघ राज्य क्षेत्र में क्रियान्वयन के लिए 6 बड़े मत्स्यन पत्तन, 58 छोटे मत्स्यन पत्तन और 189 मत्स्य अवतरण केंद्र शुरू किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, 12 छोटे मत्स्यन पत्तन और 11 मत्स्य अवतरण केंद्र मरम्मत और नवीकरण / आधुनिकीकरण के लिए गए हैं। दसवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान इस घटक के क्रियान्वयन के लिए रू. 100.00 करोड़ की राशि आबंटित की गई थी। इस घटक के अंतर्गत विभिनन क्रियान्वयन एजेसियों को दी गई केंद्रीय वित्तीय सहायता इस प्रकार है- (i) छोटे मत्स्यन पत्तनों और मत्स्य अवतरण केंद्रों के निर्माण के लिए तटीय राज्यों को परियोजना लागत का 50 प्रतिशत और यूटी को 100 प्रतिशत; (ii) बड़े मत्स्यन पत्तनों के निर्माण के लिए तटीय राज्यों, यूटी तथा पोर्ट ट्रस्टों को 100 प्रतिशत सहायता और सुरक्षित मछुआरा संस्थाओं/संगठनों के लिए मूल संरचना सुविधाएं उपलब्ध कराना; (iii) 'बनाओ, चालाओ और अंतरित करो' (बीओटी) आधार पर छोटे मत्स्यन पत्तनों और मत्स्य अवतरण केंद्रों के निर्माण के लिए 50 प्रतिशत सहायता। इसके अतिरिक्त, इस घटक के अंतर्गत नए मत्स्यन पत्तनों मत्स्य अवतरण केंद्रों का निर्माण और वर्तमान सुविधाओं का आधुनिकीकरण भी शुरू किया गया है। वर्तमान मत्स्यन पत्तनों और मत्स्य अवतरण केंद्रों की मरम्मत तथा नवीकरण / आधुनिकीकरण के लिए तटीय राज्यों तथा पोर्ट ट्रस्टों को परियोजना लागत के 50 प्रतिशत के बराबर और यूटी को 100 प्रतिशत केंद्रीय वित्तीय सहायता दी जाती हैं।
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'ड्रेजर टीएसडी सिंधु राज के रखरखाव' पर योजना के अंतर्गत वर्तमान मत्स्यन पत्तनों एवं मत्स्य अवतरण केंद्रों के तलमार्जन / विगादन के लिए विभिनन क्रियान्वयन एजेंसियों को वर्तमान मत्स्यन पत्तनों तथा मत्स्य अवतरण केंद्रों पर तलमार्जन / विगादन की लागत के 50 प्रतिशत के बराबर केंद्रीय सहायता दी गई हैं। यूटी के मामले में रखरखाव, तल मार्जन का 100 प्रतिशत खर्चा केंद्रीय सरकार द्वारा वहन किया जाता हैं।
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हार्वेस्ट-उपरांत मूल संरचना को सुदृढ करने और आदर्श विपणन तंत्र के माध्यम से हार्वेस्ट-उपरांत हानि को न्यूनतम करने की दष्टि से 'हार्वेस-उपरांत मूल संरचना का विकास' योजना में संशोधन किया गया और 10 वीं योजना के दौरान वह वृहद् योजना के एक घटक के रूप में जारी रही। इस अवधि के दौरान देश में 13 बर्फ संयंत्र/शीत संग्रहागार, 45 मत्स्य खुदरा दुकानें /कियोस्क, 31 ऊष्मारोधित हिमशीतित वाहन स्थापित किए गए। 2006-07 और 2007-08 (दिसंबर 2007 तक) के दौरान क्रमश: 4.78 करोड़ रु. और 0.92 करोड़ रु. की राशि का मोचन किया गय हैं।
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केंद्र द्वारा समर्थित ''मछुआरों, मास्त्यिकी प्रशिक्षण और विस्तार के लिए कल्याण कार्यक्रम पर राष्ट्रीय योजना'' के बारे में :-
- लगभग 2.20 लाख मछुआरों को बचत एवं राहत घटक के अंतर्गत लाने के लिए, 2433 मकानों के निर्माण के लिए और 16.55 लाख मछुआरों को सामूहिक दुर्घटना बीमा घटक के अंतर्गत शामिल करने के लिए राज्यों/ संघ राज्य क्षेत्र /फिशकॉपफेड़ को 2006-07 के दौरान 23.80 करोड़ रु. की राशि मोचित की गई थी। 2007-08 के दौरान (31 दिसंबर 2007 तक) राज्यों/ संघ राज्य क्षेत्र / फिशकॉफेड को लगभग 1.07 लाख मछुआरों को बचत-एवं-राहत घटक के अंतर्गत लाने के लिए, मछुआरों के लिए 4373 मकानों के निर्माण के लिए और 18.22 लाख मछुआरों को सामूहिक दुर्घटना बीमा के अंतर्गत शामिल करने के लिए 15.37 करोड़ रु. की राशि मोचित की गई।
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2006-07 के दौरान मत्स्य किसानों के प्रशिक्षण के लिए, 4 प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना / उन्नयन के लिए, जागरूकता केंद्र की स्थापना के लिए, प्रशिक्षण / विस्तार मेनुअल तैयार करने के लिए, हस्तपुस्तिकाओं के प्रकाशन के लिए, वृत्त चित्र के निर्माण के लिए और कार्यशालाएं / गोष्ठियां आयोजित करने के लिए विभिन्न राज्यो/संगठनों को 2.59 करोड़ रु. की राशि मोचित की गई थी। 2007-08 के दौरान (31 दिसंबर 2007 तक) विभिन्न राज्यों/संगठनों को उसी उद्देश्य के लिए 0.74 करोड़ रु. की राशि मोचित की गई है।
- 'मत्स्य क्षेत्र के लिए डाटाबेस और सूचना नेटवर्किंग का सुदृढ़ीकरण' पर योजना के अंतर्गत, 2006-07 के दौरान 3.63 करोड़ रु. की और 2007-08 के दौरान 31 दिसंबर 2007 तक 2.22 करोड़ रु. की राशि का मोचन किया गया।
इसके अतिरिक्त, खाद्य संसाधन उद्योग मंत्रालय मत्स्य संसाधन क्षेत्र में भरपूर निवेश लाने के लिए हर प्रयास कर रहा है। वह मत्स्य संसधन यूनिटों की स्थापना / प्रौद्योगिकी उन्नयन / आधुनिकीकरण के लिए वित्तीय सहायता देने में सक्रियता से लगा हुआ है। 2006-07 के दौरान, 17 समुद्री खाद्य संसाधन यूनिटों को 3.82 करोड़ रु. की वित्तीय सहायता दी गई, और 2007-08 के दौरान (31.12.08 तक) 10 समुद्री खाद्य संसाधन यूनिटों को 2.01 करोड़ रु. की राशि दी गई। 11 वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान खाद्य संसाधन परियोजनाओं की स्थापना / आधुनिकीकरण / उन्नयन के लिए वित्तीय सहायता देने की योजना का विकेंद्रीकरण कर दिया गया है (01.04.2007 से)। विकेंद्रित योजना के अंतर्गत 31.12.2007 तक, बैंकों के माध्यम से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए मत्स्य क्षेत्र में 5.82 करोड़ रु. के 13 मामले अनुमोदित किए गए हैं।
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