कृषि मंत्रालय के अंतर्गत
कृषि और सहकारिता विभाग कृषि क्षेत्र के विकास के लिए उत्तरदायी नोडल संगठन है। यह देश के भूमि, जल, मृदा तथा पादप संसाधनों का इष्टतम प्रयोग करके तीव्र कृषि विकास उपलब्ध करने के लिए उद्दिष्ट राष्ट्रीय नीतियों तथा कार्यक्रमों के निरूपण और क्रियान्वयन के लिए उत्तरदायी है।
यह उर्वरकों, बीजों, पीडकनाशियों, कृषि उपकरणों जैसे निवेशों तथा सेवाओं की समय से और यथेष्ट आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी संभव उपाय करता है और कृषि ऋण, फसल बीमा भी उपलब्ध कराता है और किसान को उसकी कृषि उपज के लिए लाभकारी प्रतिफल सुनिश्चित करता है।
इसे कृषि से संबंधित विभिन्न प्रकार का सांख्यिकीय तथा आर्थिक डाटा एकत्र करने और रखने का उत्तरदायित्व भी सौंपा गया है जिसकी जरूरत, विकास नियोजन, कृषि गणना की व्यवस्था करने, कमी के समय राहत उपाय करने में राज्यों की मदद करने तथा सलाह देने, और बाढ़, सूखा, चक्रवात आदि जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में पड़ती है। यह कृषि तथा संबंधित क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग विकसित करने और कृषि पदार्थों में निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय संगठनों की गतिविधियों में भी भाग लेता है।
यह विभाग 24 प्रभागों और एक 'तिलहन, दालों तथा मक्का पर प्रौद्योगिकी मिशन' में व्यवस्थित है। इसके प्रशासनिक नियंत्रण में 4 संलग्न कार्यालय, 21 अधीनस्थ कार्यालय, 2 सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, 7 स्वायत्त निकाय और 11 राष्ट्रीय स्तर के सहकारी संगठन हैं। इसके अतिरिक्त दो प्राधिकारण स्थापित किए गए हैं, अर्थात् 'पादप विविधता और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण' और 'राष्ट्रीय वर्षा-पोषित क्षेत्र प्राधिकारण'। यह विभाग राज्य सरकारों द्वारा कृषि उत्पादन एवं उत्पादकता को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों में भी मदद करता है। इसके द्वारा किए जाने वाले कुछ अधिक महत्वपूर्ण कार्य है :
- किसानों को निवेशों तथा सेवाओं की पर्याप्त और समय से आपूर्ति का प्रयास यथा कृषि ऋण, उर्वरक, पीडकनाशी, बीज और उपकरण;
- फसल खराब हो जाने की स्थिति में किसानों को राहत उपलब्ध कराने के लिए 'फसल बीमा योजना' की व्यवस्था;
- कुछ मूल कृषि उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन कीमत (एमएसपी) निर्धारित करना ताकि भारत में खाद्य सुरक्षा और किसानों के लिए लाभकर कीमत सुनिश्चित हो सकें;
- सूखे के प्रबंधन में राज्यों की मदद करना और कमी के समय राहत उपाय करना;
- कृषि समुदाय के आर्थिक हितों की सुरक्षा के लिए कृषि उत्पाद के विपणन के समेकित विकास का प्रयास करना;
- गैर-सरकारी संगठनों, कृषक संगठनों तथा कृषि विश्व विद्यालयों के सहयोग से नई संस्थागत व्यवस्थाएं अपना कर कृषि विस्तार सेवाओं के सुधार में राज्य सरकारों की मदद करना;
- उपयुक्त जानकारी और प्रौद्योगिकी का प्रसार करके पादप संरक्षण उपायों को बढ़ावा देना;
- उत्तम बीजों के उत्पादन और पादपों की उन्नत किस्मों के वितरण के लिए उपायों को प्रोत्साहित करने की दिशा में काम करना;
- भावी जल संभर के पूर्ण और समेकित विकास के लिए लोगों की भागीदारी के साथ वर्षा-पोषित खेती के लिए उपयुक्त नीतियां बनाना और कृषक समुदाय की आय तथा पोषण स्तर को बढ़ाने के लिए एक खेती प्रणाली दृष्टिकोण को प्रोत्साहन; और
- यथोचित नीतिगत उपायों द्वारा और 'राष्ट्रीय सहकारिता विकास सहयोग (एनसीडीसी)', 'भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन परिसंघ लि. (नाफेड)'
और 'भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ (एनसीयूआई)' के माध्यम से भी सहकारी आंदोलन को सुदृढ करना।
खाद्य संसाधन उद्योग मंत्रालय एक दृढ तथा सक्रिय खाद्य संसाधन क्षेत्र विकसित करने के लिए उत्तरदायी सरकार की मुख्य केंद्रीय एजेंसी है। यह इस उद्देश्य से स्थापित किया गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अधिक अवसर पैदा किए जाएं, किसानों को आधुनिक प्रौद्योगिकी से लाभ उठाने के योग्य बनाया जाए, निर्यात के लिए अधिक पैदावार की जाए और संसाधित खाद्य के लिए मांग पैदा की जाएं।
विशाल समेकित संसाधन क्षमताएं विकसित करने की दिशा में घरेलू तथा विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए सरकार एक उत्प्रेरक तथा सहायक के रूप में काम करती है; यह अनुकूल नीति परिवेश बनाती हैं, करों तथा उप-करों को तर्कसंगत बनाने सहित। यह विदेशी सहयोग के लिए, निर्यात अभिमुखी यूनिटों (ईओयू) आदि के आवेदनों पर कार्रवाई करती है और भावी उद्यामी को उसके प्रयास में मदद/मार्गदर्शन करती है।
मंत्रालय निम्नलिखित विषयों पर ध्यान देता है :
- फल और सब्जी संसाधन उद्योग।
- खाद्यान्न पोषण उद्योग।
- डेयरी उत्पाद।
- कुक्कुट तथा अंडों, मांस और मांस उत्पादों का संसाधन।
- मत्स्य संसाधन।
- डबल रोटी, तिलहन, आटा (खाद्य), नाश्ते का आहार, बिस्किट, मिठाई, (कोको संसाधन और चॉकलेट सहित), माल्ट रस, प्रोटीन आइसोलेट, उच्च प्रोटीन आहार, दूध छुडाने का आहार।
- शीरा-रहित आधार से मादक पेय।
- वायु युक्त जल/ मृदु पेय और अन्य संसाधित आहार।
- खाद्य संसाधन उद्योगों के लिए विशेष पैकेज; और।
- खाद्य संसाधन उद्योग को तकनीकी सहायता और सलाह।