कृषि मंत्रालय के अंतर्गत कृषि एवं सहकारिता विभाग पुष्प उद्यान क्षेत्र के विकास के लिए उत्तरदायी नोडल संगठन है। यह देश के भूमि, जल, मृदा तथा पौध संसाधनों के इष्टतम उपयोग के माध्यम से त्वरित संवृद्धि हासिल करने की ओर लक्षित राष्ट्रीय नीतियों और कार्यक्रमों के निरुपण तथा क्रियान्वयन के लिए उत्तरदायी है।
यह उर्वरकों, बीजों, कीटनाशियों, कृषि औजारों जैसी निविष्टियों तथा सेवाओं की सामयिक तथा पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी संभव उपाय करता है तथा साथ ही किसानों को कृषिय ऋण, फसल बीमा उपलब्ध कराता है तथा उनके कृषि उत्पादन के लिए लाभप्रद प्रतिफल सुनिश्चित करता है।
कृषि एवं सहकारिता विभाग में उद्यान कृषि प्रभाग में क्षेत्र के समग्र त्वरित विकास की देख रेख का उत्तर दायित्व विहित किया गया है। इसकी स्थापना निम्न अधिदेश के साथ की गई है :-
- उद्यान कृषि फसलों के उत्पादन, उत्पादकता तथा उपयोग में सुधार लाने के लिए कार्यक्रमों को क्रियान्वित करना।
- उद्यान कृषि की त्वरित संवृद्धि की ओर लक्षित नीतियों को समर्थित तथा निरुपित करना।
- उद्यान कृषि फसलों के बीजों तथा रोग मुक्त रोपण सामग्री की उपलब्धता को सुकर बनाना।
- उद्यान कृषि के संवर्धन के लिए नेतृत्व उपलब्ध कराना तथा क्रियाकलापों को समन्वित करना।
- किसानों को प्रौद्योगिकी अंतरण के लिए सुविधाकारक के रूप में कार्य करना तथा सूचना प्रौद्योगिकी के प्रयोग को संवर्धित करना।
- किसानों को उच्चतर प्रतिफल तथा लोगों के लिए पोषणात्मक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उद्यानकृषि उत्पाद के बेहतर उपयोग तथा वर्धित खपत को संवर्धित करना।
- निवेशों की आपूर्ति, प्रौद्योगिकी के अंतरण और मानव संसाधन विकास की गतिविधियों के लिए एक सशक्त आधार प्रदान करना।
- पूर्वोत्तर क्षेत्र, पहाडियों, जनजातीय तथा पिछड़े क्षेत्रों में लोगों की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए उद्यान कृषि को संवर्धित करना।
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय एक मजबूत तथा उत्साही खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र का विकास करने के लिए उत्तरदायी सरकार का मुख्य केन्द्रक अभिकरण है। इस की स्थापना ग्रामीण क्षेत्रों में वधित कार्य अवसरों का सृजन करने, किसानों को आधुनिक प्रौद्योगिकी से लाभ उठाने में समर्थ बनाने, निर्यातों के लिए अधिशेषों का स़ृजन करने तथा प्रसंस्कृत भोजन के लिए मांग को अभिप्रेरित करने के उद्देश्य से की गई है।
मंत्रालय द्वारा देख रेख किए जा रहे विषय निम्न हैं :
- फल एवं सब्जी प्रसंस्करण उद्योग
- खाद्यान्न मिलिंग उद्योग
- डेयरी उत्पाद
- मुर्गीपालन तथा अंडों, मांस तथा मांस उत्पादों का प्रसंस्करण
- मत्स्य प्रसंस्करण
- रोटी, तिलहन, भोजन (खाद्य), अल्पाहार भोजन, बिस्कुट, कंफेक्शनरी (कोको प्रसंस्करण तथा चौकलेट सहित), माल्ट सत्व, प्रोटीन आइसोलेट, उच्च प्रोटीन खाद्य पदार्थ, दुग्धाहार;
- शीरा रहित आधार से अल्कोहल युक्त पेय पदार्थ;
- वायु युक्त जल/मृदु पेय पदार्थ तथा अन्य प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ;
- खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के लिए विशेषीकृत पैकेजिंग; तथा साथ ही
- खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए तकनीकी सहायता तथा परामर्श
राज्य सरकारों ने अपने संबंधित राज्यों में इस क्षेत्र के संवर्धन तथा विकास के लिए पृथक विभाग स्थापित किए हैं। इनमें से कुछ निम्नलिखित हैं :-
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग तथा उद्यान कृषि विभाग, पश्चिम बंगाल सरकार
विभाग ने इस क्षेत्र के विकास के लिए अनेक पहलें भी हैं :
- राज्य सरकार ने उत्तरी बंगाल में मुंगपू में एक उच्च प्रौद्योगिकी पुष्प उद्यान केन्द्र की स्थापना की है। इस केन्द्र उन उद्यमियों को सामान्य मूलसंरचना उपलब्ध कराएगा जिनके पास अपेक्षित अवसंरचना का निर्माण करने के लिए संसाधनों का अभाव है।
- पश्चिम बंगाल राज्य खाद्य प्रसंस्करण तथा उद्यान कृषि विकास निगम लि. के जरिए राज्य सरकार मुलिकघाट, कोलकाता में फूलों के परीक्षण हेतु शीत श्रृंखला मूलसंरचना के साथ फूलों के लिए एक बाज़ार परिसर की स्थापना करने की योजना बना रह है।
- शीत भंडारण सुविधाओं से युक्त एक व्यापक बहुमंजिला फूल बाजार राज्य सरकार की पहल के अंतर्गत हाल ही में पानसकूरा में स्थापित किया गया है।
- खाद्य प्रसंस्करण उद्योग तथा उद्यान कृषि विभाग, पश्चिम बंगाल सरकार राणाघाट में केवल मात्र फूलों के लिए एक बाज़ार परिसर की स्थापना करने की योजना बना रहा है।
उद्यानकृषि विभाग, कर्नाटक सरकार
कर्नाटक देश में आधुनिक उद्यानकृषि के क्षेत्र में एक प्रगतिशील राज्य है। कर्नाटक में प्रवृत विविध कृषि - पारिस्थितिकी परिस्थितियों ने विभिन्न प्रकार की उद्यान कृषि फसलों जैसे फल, सब्जियां, फूल मामले, रोपण फसले, जड़ तथा ट्यूबर फसले, चिकित्सीय तथा सुगंधित फसलें इत्यादि को उगाना संभव बना दिया है। कर्नाटक फलों का तीसरा सर्वाधिक बड़ा उत्पाद है तथा क्षेत्रफल एवं वनस्पति फसलों के उत्पादन में इसका स्थान पांचवां है। फल फसलों के उत्पादन में राज्य का स्थान तीसरा तथा क्षेत्रफल की दृष्टि से प्रथम है। रोपण फसलों के उत्पादन तथा क्षेत्रफल की दृष्टि से इस का स्थान क्रमश: तीसरा तथा दूसरा है। कर्नाटक मसालों, सुगंधित तथा चिकित्सीय फसलों का सबसे बड़ा उत्पादक है।
कर्नाटक सरकार विकास के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में फल तथा वनस्पति प्रसंस्करण क्षेत्र पर विचार कर रही है। बढ़ते शहरीकरण तथा वर्धित गुणता सचेतना से प्रसंस्कृत फल तथा सब्जी के बाजार के तीव्रता से बढ़ने की आशा है। अत: कृषि उत्पादों के विकास की विशाल संभाव्यता है।