कृषि और सहकारिता विभाग, कृषि मंत्रालय भारत में मसालों के समेकित विकास के लिए उत्तरदायी प्रमुख एजेंसी हैं। वह भारत के भूमि, जल, मृदा तथा पादप संसाधनों का इष्टतम प्रयोग करके इस क्षेत्र में तीव्र वृद्धि प्राप्त करने के लिए राष्ट्रीय नीतियां, योजनाएं और कार्यक्रम बनाता हैं। वह विभिन्न मसाला उत्पादों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकारों द्वारा किए जा रहे प्रयासों में सहयोग देता हैं।
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत काम कर रहे पांच पण्य बोर्डों में से एक भारतीय मसाला बोर्ड हैं। यह अनुसूचित मसालों के निर्यात प्रोत्साहन और उनमें से कुछ (यथा इलायची और वनीला) के उत्पादन विकास के लिए उत्तरदायी एक स्वायत्त निकाय हैं। यह मसालों के निर्यात प्रोत्साहन से संबंधित अनेक उत्तरदायित्वों का निभाता है, यथा गुणता प्रमाणन; गुणता नियंत्रण; निर्यातकों का पंजीकरण; व्यापार जानकारी का संग्रहण एवं प्रलेखन; मसालों के आयात तथा निर्यात से संबंधित नीति मामलों पर केंद्रीय सरकार के निवेशों की व्यवस्था; आदि। मसाला बोर्ड के मुख्य कार्य हैं:-
- छोटी तथा बड़ी इलायची के घरेलू विपणन का अनुसंधान, विकास और विनियमन;
- वनीला का अनुसंधान और उत्पादन विकास;
- सभी मसालों का कटाई उपरांत सुधार;
- मसालों के ऑर्गेनिक उत्पादन, संसाधन और प्रमाणन का प्रोत्साहन;
- उत्तर पूर्व में मसालों का विकास;
- उत्तम मूल्यांकन सेवाओं और ब्रांड प्रोत्साहन की व्यवस्था; आदि।
और, मसाला उद्योग के प्रयासों के समन्वित विकास के लिए और भारतीय मसाला बोर्ड के प्रयासों में सहयोग के लिए
अखिल भारतीय मसाला निर्यातक मंच बनाया गया हैं। इस मंच का मुख्य उद्देश्य यह है कि निर्यातकों के बीच सदावना तथा सहयोग बढ़ाया जाए और उनकी समस्याओं को कम करने में मदद की जाएं। मंच के मिशन में शामिल हैं:-
- उत्पादों के प्रवर्तन तथा पैकेजिंग विकास और उन्नयन द्वारा मसालों के निर्यात में प्रति यूनिट प्राप्ति को असंगत रूप से बढ़ाने का प्रयास करना।
- राज्य और केंद्रीय निकायों की नीतियों को प्रभावित करने के लिए गतिविधियां चलाना और उनमें भाग लेना।
- स्वच्छता के मानकों के लिए प्रयास करके और कटाई उपरांत संभाल के सुरक्षित प्रयोग को प्रोत्साहित करके आपूर्ति श्रृंखला में बेहतर प्रौद्योगिकियों तथा खेती की रीतियों में हस्तक्षेप करना और विकास को उत्प्रेरित करना
- समग्र बाजार, तकनीकी तथा नीति जानकारी के भंडार के यप में काम करना और वह अपने सभी सदस्यों को उपलब्ध कराना।
- उद्योग के सामूहिक ज्ञान का प्रसार करना और सर्व संबंधित को वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराना।
स्थापना के समय से मंच ने बहुत प्रगति कर ली हैं। अब, देश के विभिन्न भागों से उसके एक सौ से अधिक सदस्य हैं जिनका मसाला व्यापार के साथ घनिष्ट संबंध हैं। अब वह मसाला निर्यात व्यापार के 90 प्रतिशत से अधिक का प्रतिनिधित्व करता हैं। अपनी पहुंच बढ़ाने और अपनी सेवाओं का विस्तार समग्र मसाला निर्यातक समुदाय तक करने के उद्देश्य से वह और सदस्यों को शामिल करने का प्रयास कर रहा हैं। सदस्यता वास्तविक मसाला निर्यातकों के लिए खुली है और सह-सदस्यता उनके लिए जिनका मसाला व्यापार में संबंधित हित हों।
इसके अतिरिक्त, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के एक घटक निकाय के रूप में भारतीय मसाला अनुसंधान संस्थान (आईआईएसआर) की भी स्थापना की गई हैं जो मसालों पर अनुसंधान को समर्पित हैं। यह मसाला सुधार, उत्पादन, संरक्षण तथा कटाई उपरांत प्रौद्योगिकी के सभी पहलुओं पर अनुसंधान करने और समन्वित करने के लिए एक उत्कृष्टता संस्थान के रूप में काम करता हैं। संस्थान की स्थापना निम्नलिखित मुख्य उद्देश्यों के साथ की गई है:-
- मसालों के आनुवंशिक संसाधनों के और मसालों के कृषि-पारिस्थितिक तंत्रों की मृदा, जल तथा वायु के भी संरक्षण के लिए सेवाओं और प्रौद्योगिकियों का विस्तार करना;
- पारंपरिक तथा गैर-पारंपरिक तकनीकों और अभिनव जैव प्रौद्योगिकी दृष्टिकोणों का प्रयोग करके मसाला की उच्च उत्पादी तथा उच्च गुणता वाली किस्मों का और चिरस्थायी उत्पादन तथा संरक्षण प्रणालियों का विकास करना;
- घरेलू तथा निर्यात उद्देश्यों के लिए, उत्पाद विकास और उत्पाद विविधीकरण पर जोर देते हुए, मसालों की कटाई उपरांत प्रौद्योगिकियों का विकास करना;
- मसालों की अनुसंधान क्रिया विधि तथा प्रौद्योगिकी उन्नयन में प्रशिक्षण के लिए केंद्र के रूप में काम करना और राष्ट्रीय अनुसंधान परियोजनाओं का समन्वय करना;
- यह सुनिश्चित करने के लिए कि अनुसंधान कृषक समुदाय की जरूरतों पर लक्षित है, नई तथा वर्तमान प्रौद्योगिकियां अपनाने की निगरानी करना;
- मसालों पर प्रौद्योगिक सूचना के भंडारण, पुन: प्राप्ति और प्रसार के लिए एक राष्ट्रीय केंद्र के रूप में काम करना।
संस्थान के अनुसंधान कार्यक्रम विभिन्न परियोजनाओं के अंतर्गत चलाए जाते हैं जो समय बद्ध और विशिष्ट उद्देश्यों वाली होती हैं। संस्थान में जिन प्रमुख क्षेत्रों के अंतर्गत अनुसंधान किया जा रहा है, वे हैं:-
- जर्मप्लाज्म का संग्रहण, संरक्षण, मूल्यांकन और सूचीकरण।
- पारंपरिक और जैव प्रौद्योगिक दृष्टिकोणों का प्रयोग करके उच्च उत्पादी, बढिया और जैव तथा अजैव तनावों का प्रतिरोध करने वाली किस्मों का विकास।
- उच्च उत्पादी जीन प्ररूपों का बड़े पैमाने पर उत्पादन और वितरण सुनिश्चित करने के लिए प्रसारण विधियों का मानकीकरण।
- उत्पादन तथा उत्पादकता बढ़ाने के लिए कृषि-तकनीकों का विकास।
- समेकित पीड़क और रोग प्रबंधन।
- कटाई उपरांत प्रौद्योगिकी।
- मसालों मे खेती, विपणन तथा सूचना प्रसार के सामाजिक-आर्थिक पहलू।
संस्थान से किसानों के लिए उपलब्ध सेवाएं हैं : प्रमुख मसालों की रोपण सामग्री की बिक्री (यथा काली मिर्च, अदरक, हल्दी, जायफल, दाल चीनी, लौंग, वनीला, इलायची आलस्पाइस, गार्सीनिया पाइपर छाबा, लंबी मिर्च आदि की उत्तम किस्में); मसाला उत्पादन में विभिन्न प्रौद्योगिकियों पर नाम मात्र दाम पर विस्तार साहित्य; नि:शुल्क फार्म सलाह सेवाएं; नाम मात्र दाम पर नैदानिक सेवाएं तथा मृदा परीक्षण, खाद परीक्षण, पादप तथा जल विश्लेषण; अनुरोध पर खेत का निरीक्षण; और नि:शुल्क प्रशिक्षण।