देश में रेशम उद्योग के विकास के लिए भारत सरकार के पास समवर्ती उत्त्रदायित्व है। केन्द्रीय स्तर पर,
कपड़ा मंत्रालय
नोडल संगठन है जिसमें 'रेशम उद्योग तथा रेशम वस्त्र उद्योग' एक प्रमुख कार्यात्मक क्षेत्र है।
कपड़ा मंत्रालय कपड़ा उद्योग के लिए नीति निर्माण, आयोजना, विकास, निर्यात संवर्धन तथा कारोबार विनियमन हेतु उत्तरदायी है। इसमें सभी प्राकृतिक तथा मानव निर्मित सेल्युलोसयुक्त रेशे शामिल है जिनका प्रयोग कपड़ों, वस्त्रों तथा हस्तशिल्पों के निर्माण के लिए किया जाता है। मंत्रालय के विकासात्मक क्रियाकलापों में कपड़ा उद्योग के सभी क्षेत्रों को पर्याप्त कच्चा माल उपलब्ध कराना तथा संगठित एवं विकेन्द्रीकृत क्षेत्रों से युक्ति संगत मूल्यों पर फैब्रिक के उत्पादन को बढ़ाना शामिल है।
यह उद्योग के विभिन्न क्षेत्रों के आयोजित तथा सुमेल संवृद्धि के लिए भी दिशानिर्देश निर्धारित करता है। यह उद्योग की तकनीकी-आर्थिक स्थिति की निगरानी करता है तथा आधुनिकीकरण एवं पुनर्वास हेतु अपेक्षित नीतिगत ढांचा उपलब्ध कराता है।
केन्द्रीय रेशम बोर्ड (सीएसबी), बैंगलोर
केन्द्रीय रेशम बोर्ड देश में रेशम उद्योग की संवृद्धि तथा विकास को संवर्धित करने के उद्देश्य से केन्द्रीय रेशम बोर्ड अधिनियम, 1948 के तहत संघटित एक सांविधिक निकाय है।
रेशम उद्योग तथा रेशम कपड़ा उद्योग के विकास के लिए कार्यक्रमों का निरुपण तथा क्रियान्वयन जाता है। तथापि, केन्द्रीय रेशम बोर्ड अपने केन्द्रों के देशव्यापी नेटवर्क के माध्यम से अनुसंधान तथा विकास तथा साथ ही विस्तार एवं प्रशिक्षण के लिए आवश्यक सहायता उपलब्ध कराके राज्यों के प्रयासों को अनुपूरित करता है।
इसके अतिरिक्त, केन्द्रीय रेशम बोर्ड उत्कृष्ट सिल्कवॉर्म बीजों, शहतूत कटिंग्स इत्यादि के उत्पादन तथा आपूर्ति को आयोजित करता है तथा साथ ही प्रत्यक्ष रूप से तथा राज्य रेशम उद्योग विभागों के साथ संयुक्त रूप से विभिन्न रेशम पालन परियोजनाओं को क्रियान्वित भी करता है।
भारतीय रेशम निर्यात संवर्धन परिषद (आईएसईपीसी) मुम्बई
भारतीय रेशम निर्यात संवर्धन परिषद की स्थापना भारत सरकार द्वारा वर्ष 1983 में प्राकृतिक रेशम वस्तुओं के निर्यात को संवर्धित तथा विनियमित करने तथा फैब्रिक, निर्मित वस्तुओं, तैयार निर्मित परिधानों तथा मशीन निर्मित गलीचों जैसी उत्कृष्ट रेशमी वस्तुओं के विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप से भारत की छवि को संवर्धित करने के प्रमुख उद्देश्य से की गई थी।
आज 2000 फर्में आईएसईपीपी की सदस्य है तथा 100 से अधिक देशों को प्रतिवर्ष 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक के मूल्य की रेशमी वस्तुओं का निर्यात किया जाता है। यह परिषद विश्व में बाज़ार घटनाक्रमों, व्यापार नीतियों में परिवर्तनों इत्यादि के संबंध में अपने सदस्यों को सिल्क नेट नामक अपनी मासिक पत्रिकाओं के जरिए सूचना की तैयारी तथा प्रसार करती है।
संश्लिष्ट तथा कला रेशम सिल्क अनुसंधान संख्या (एसएएसएमआईआरए)
संश्लिष्ट तथा कला रेशम सिल्क अनुसंधान संघ एक सहकारी उद्यम है जिसकी स्थापना स्वतंत्रता के पश्चात एक बहु कार्य संस्थान के रूप में भारत के मानव निर्मित कपड़ा उद्योग द्वारा इसकी वैज्ञानिक तथा प्रौद्योगिकीय आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु की गई है। विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार के तहत वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद द्वारा यथेष्ट मान्यता के पश्चात इसकी स्थापना 12 जनवरी 1950 को की गई थी। बाद में इसे कपड़ा मंत्रालय के साथ संबद्ध कर दिया गया। एसएएसएमआईआरए की भव्यय संगमरमरी संरचना मुम्बई के एक प्रमुख स्थल में वोरली पहाड़ी, मुम्बई के नीचे लगभग 12,000 वर्ग मीटर आकार के एक भूखंड पर अवस्थित है। इस भवन को 1958 में पूरा किया गया था।
एसएएसएमआईआरए कपड़ा उद्योग की संवृद्धि तथा विकास के सहायतार्थ इसे वैज्ञानिक तथा तकनीकी सहायता प्रदान करने के प्रमुख उद्देश्य से बहुविध क्रियाकलापों में लगा हुआ है। इन क्रियाकलापों में अनुसंधान तथा विकास, तकनीकी सेवाएं तथा परीक्षण, इंस्ट्रुमेंटेशन, तकनीकी शिक्षा, तकनीकी सूचना का प्रसार तथा संगोष्ठियों और सम्मेलनों का आयोजन करना शामिल हैं।