केंद्रीय स्तर पर, कृषि मंत्रालय के अंतर्गत
पशुपालन, डेयरी और मत्स्य क्षेत्र विभाग, भारत में मत्स्य उद्योग के समग्र विकास के लिए उत्तरदायी मुख्य एजेंसी है। यह मत्स्यन तथा मत्स्य क्षेत्रों से संबंधित सभी मामलों को देखता हैं, अंतर्देशीय भी और समुद्री भी। यह पशुधन के उत्पादन, संरक्षण, रोगों से बचाव तथा सुधार और डेयरी विकास, और उत्पादकता सुधारने के लिए राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों (यूटी) में अपेक्षित मूल संरचना के विकास से संबंधित मामलों को भी देखता है।
यह विभाग मत्स्य के क्षेत्र में नीतियां तथा कार्यक्रम बनाने में राज्यों/ संघ राज्य क्षेत्रों की सरकारों को सलाह भी देता है। मुख्य जोर स्वच्छ तथा खारे पानी में जल कृषि के प्रसार और मत्स्य कर्मियों के कल्याण पर दिया जाता है। विभाग मत्स्य क्षेत्र में उत्पादन तथा उपादकता बढ़ाने के लिए उपयुक्त नीतियां बनाने / आरंभ करने के अतिरिक्त विभिन्न उत्पादन, निवेश आपूर्ति तथा मूल संरचना कार्यक्रम और कल्याण अभिमुखी योजनाएं चलाता रहा है।
विभाग के नियंत्रण में अनेक मत्स्य संस्थान हैं, अर्थात्:-
और, अनुसंधान एवं विकास के आधुनिक उपकरणों का प्रयोग करके, जैव-प्रौद्योगिकी सहित, मत्स्य क्षेत्र की अप्रयुक्त संभावनाओं को प्राप्त करने के लिए राष्ट्रीय मत्स्य क्षेत्र विकास बोर्ड (एनएफडीबी) स्थापित किया गया है बोर्ड का मुख्यालय हैदराबाद में है। इसे स्थापित करने के मुख्य उद्देश्य है:-
- मत्स्य क्षेत्रों और जल कृषि से संबंधित गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करना और व्यावसायिक प्रबंधन करना;
- केंद्रीय सरकार में विभिन्न मंत्रालयों / विभागों द्वारा चलाई जा रही मत्स्य क्षेत्रों से संबंधित गतिविधियों को समन्वित करना और राज्यों / संघ राज्य क्षेत्रों की सरकारों के साथ भी समन्वय करना;
- प्रग्रहण तथा कृषि मत्स्य क्षेत्रों के उत्पादों के उत्पादन, संसाधन, भंडारण, परिवहन तथा विपणन में सुधार करना;
- प्राकृतिक जलीय संसाधनों का चिरस्थायी प्रबंधन और संरक्षण करना मत्स्य धन सहित;
- मत्स्य क्षेत्रों से उत्पादन तथा उत्पादकता बढ़ाने के लिए अनुसंधान एवं विकास के आधुनिक साधनों का प्रयोग करना, जैव-प्रौद्योगिकी सहित;
- मत्स्य क्षेत्रों के लिए आधुनिक मूल संरचना तंत्र उपलब्ध कराना और उनका प्रभावी प्रबंधन तथा इष्टतम उपयोग सुनिश्चित करना;
- काफी रोजगार पैदा करना;
- मत्स्य क्षेत्र में महिलाओं को प्रशिक्षित और संशक्त करना;
- खाद्य तथा पोषण सुरक्षा में मत्स्य के योगदान को बढाना, आदि।
एनएफडीबी द्वारा चलाई जा रही या चलाई जाने वाली मुख्य गतिविधियां हैं: पोखरों तथा तालाबों में गहन जल कृषि; जलाशयों में मत्स्य विकास; तटीय जल कृषि; मैरीकल्चर; समुद्री शैवाल की खेती; मूल संरचना; मत्स्यन पत्तन और अवतरण केंद्र; मत्स्य संसाधन केंद्र तथा मत्स्य का सौर शुष्कन; घरेलू विपणन; प्रौद्योगिकी उन्नयन; गंभीर सागर मत्स्यन और ट्यूना संसाधन; आदि।
इसके अतिरिक्त, खाद्य संसाधन उद्योग मंत्रालय, है जो मत्स्य के संसाधन में सक्रियता से लगा हुआ है। वह भारत में एक दृढ एवं विविधतापूर्ण संसाधन क्षेत्र का विकास करने के लिए उत्तरदायी सरकार की केंद्रीय एजेंसी है और मत्स्य तथा मत्स्य उत्पादों के संसाधन की वृद्धि पर विशेष ध्यान देता है। उसका उद्देश्य है: ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अधिक अवसर पैदा करना; किसानों को आधुनिक प्रौद्योगिकी के लाभ उठाने के योग्य बनाना; निर्यात के लिए अधिक उत्पादन करना; और संसाधित खाद्य के लिए मांग को प्रेरित करना। वह उत्पाद तथा प्रक्रम विकास के लिए संसाधन क्षेत्र में आर एंड डी को प्रोत्साहित करता है। वह मूल्य वर्धित निर्यात को बढ़ावा देने के लिए नीति समर्थन, प्रोन्नति प्रवर्तन और भौतिक सुविधाएं भी उपलब्ध कराता है।
क्योंकि मत्स्य क्षेत्र राज्य का विषय है, अत: इसके विकास का मूल उत्तरदायित्व राज्य सरकारों पर है। राज्य / संघ राज्य क्षेत्र स्तर पर, मत्स्य क्षेत्र के विभिन्न पहलुओं को देखने वाले अनेक विभाग / प्रभाग हैं। उनमें से कुछ है:-
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मात्सियकी निदेशालय, अंडमान और निकोबार प्रशासन
- मात्स्यिकी निदेशालय, अरुणाचल प्रदेश
- मात्स्यिकी विभाग, असम
- मात्स्यिकी विभाग, छत्तीसगढ़
- मात्स्यिकी विभाग, केरल
- मात्स्यिकी विभाग, हरियाणा
- मात्स्यिकी विभाग, हिमाचल प्रदेश
- मात्स्यिकी विभाग, लक्षद्वीप
- मात्स्यिकी विभाग, मध्यप्रदेश
- मात्स्यिकी विभाग, ओडिशा