भारत में उद्यान कृषि क्षेत्र ने, 2005-06 में, कृषि में जीडीपी के लगभग 28 प्रति शत का योगदान किया और उद्यान कृषि फ़सलों के उत्पादन में 8.9 प्रति शत की वृद्धि दर्ज की गई। प्याज़ के उत्पादन में कमी और मसालों के उत्पादन में गतिरोध के कारण 2006-07 के उत्पादन की वृद्धि घट कर 2.8 प्रतिशत रह गई। सब्जियों, फलों, रोपण फ़सलों तथा मसालों ने 2006-07 में उद्यान कृषि के कुल उत्पादन में क्रमश: 59.8 प्रतिशत, 30.9 प्रतिशत, 6.5 प्रतिशत और 2.1 प्रतिशत का योगदान किया।
उद्यान कृषि फ़सलों का अखिल भारतीय क्षेत्रफल और उत्पादन
(क्षेत्रफल - '000 हेक्टर, उत्पादन -' 000 टन) |
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| फ़सल
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2004-05 |
2005-06 (अंतिम) |
2006-07 (अनंतिम) |
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| क्षेत्रफल |
उत्पादन |
क्षेत्रफल |
उत्पादन |
क्षेत्रफल |
उत्पादन |
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| फल |
5049 |
50867 |
5339 |
55397 |
5506 |
57727 |
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| सब्जियाँ |
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| आलू |
1524 |
28788 |
1520 |
28697 |
1572 |
29647 |
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| प्याज़ |
614 |
7761 |
694 |
9228 |
656 |
8509 |
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| योग |
6744 |
101246 |
7131 |
110106 |
7211 |
111770 |
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| फूल खुले |
118 |
659 |
146 |
686 |
154 |
886 |
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| रोपण फसलें |
3147 |
9835 |
3283 |
11263 |
3221 |
12083 |
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| मसाले |
2532 |
4068 |
2422 |
3923 |
2422 |
3923 |
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| कुल उद्यान कृषि फ़सलें |
17827 |
167005 |
18713 |
181814 |
18980 |
186872 |
(स्रोत : उद्यान कृषि प्रभाग, कृषि और सहकारिता विभाग)
भारत आम, केला, चीकू तथा नींबू का सबसे बड़ा उत्पादक है। संसार के लगभग 39.5 प्रतिशत आम और 11 प्रतिशत केले भारत में पैदा होते हैं। अंगूर में, भारत की प्रति यूनिट क्षेत्रफल उत्पादकता संसार में सबसे अधिक है। सब्जियों के क्षेत्रफल तथा उत्पादन में भारत केवल चीन से पीछे है। फूलगोभी के उत्पादन में इसकी संसार में अग्रणी स्थिति है, प्याज़ में दूसरी और बंद गोभी में तीसरी।
फूलों के उत्पादन में भी भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है। 2006-07, के दौरान, देश ने 1.40 लाख हेक्टेयर क्षेत्र क्षेत्रफल से मिलियन 669000 मीट्रिक टन खुले फूलों और 27.23 मिलियन कटे फूलों की पैदावार की। और, भारत मसालों तथा मसाला उत्पादों का सबसे बड़ा उत्पादक, उपभोक्ता और निर्यातक है। 2005-06 के दौरान मसालों का कुल अनुमानित उत्पादन 4.86 मिलियन मीट्रिक टन था और क्षेत्रफल 3.20 मिलियन हेक्टेयर था। भारत काजू का भी सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है।
उद्यान कृषि क्षेत्र के संपूर्ण विकास के लिए, कृषि और सहकारिता विभाग ने राष्ट्रीय उद्यान कृषि मिशन (एनएचएम) चलाया है जिसका लक्ष्य है कि 2012 तक उद्यान कृषि का उत्पादन दुगना कर दिया जाए। एनएचएम के अंतर्गत 2006-07 के दौरान 18 राज्यों, दो संघ राज्य क्षेत्रों तथा राष्ट्रीय स्तर की 10 एजेंसियों के लिए कार्य योजनाएं अनुमोदित की गई हैं। 11 दिसंबर 2006 तक 560.29 करोड़ रु. की राशि का मोचन किया जा चुका है। 2005-06 तथा 2006-07 में मोचित की गई 1,575.30 करोड़ रु. की राशि में से राज्यों और राष्ट्रीय स्तर की एजेंसियों द्वारा 1,018.40 करोड़ रु; का खर्चा किया गया था। योजना के क्रियान्वयन के लिए 2007-08 के दौरान 1,150 करोड़ रु. का खर्चा निर्धारित किया गया था। जनवरी 2008 के अंत तक इसमें से 691 करोड़ रु. की राशि का मोचन कर दिया गया है।
चालू वित्तीय वर्ष 2007-08 में 'उत्तर पूर्वी राज्यों, सिक्किम, जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखण्ड में उद्यान कृषि के समेकित विकास के लिए प्रौद्योगिकी मिशन' के अंतर्गत 323.40 करोड़ रु. निर्धारित किया गया है, जिसमें से 227.40 करोड़ रु. उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए है और 96 करोड़ रु. जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखण्ड के लिए 1 जनवरी 2008 के अंत तक 210.64 करोड़ रु. की राशि मोचित की जा चुकी है। योजना के अंतर्गत की गई उपलब्धियाँ हैं :
- 97503 हेक्टेयर का अतिरिक्त क्षेत्र विभिन्न क्षैतिज फ़सलों के अंतर्गत लाया गया है।
- फसलों, सब्जियों तथा मसालों की फ़सलों के अंतर्गत लाया गया क्षेत्र क्रमश: 50667 हे., 16252 हे. और20262 हे. है।
- 5858 हे. क्षेत्र उच्च मूल्य वाली फ़सलों के अंतर्गत लाया गया है यथा औषधीय तथा सुगंधित पौधे और फूल।
- 17353 महिला उद्यमियों को उद्यान कृषि के विभिन्न पहलुओं में प्रशिक्षित किया गया।
- उत्तम रोपण सामग्री के उत्पादन के लिए मूल संरचना सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं यथा 420 नर्सरियों, 3055 सामुदायिक जलाशयों की स्थापना, 2121 हे. में ड्रिप सिंचाई को अपनाना।
इसके अतिरिक्त, कृषि और सहकारिता विभाग ने देश के प्रमुख शहरी केंद्रों में फलों, सब्जियों तथा अन्य नश्वर पदार्थों के लिए आधुनिक 'टर्मिनल मंडियों' को बढ़ावा देने के लिए उपक्रम किया है ताकि इलेक्ट्रॉनिक नीलामी, कोल्ड चेन तथा रसद, और सुविधापूर्वक स्थित प्राथमिक संग्रहण केंद्रों के माध्यम से संचालन के लिए आधुनिकतम मूल संरचना सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा सकें। प्रस्ताव है कि ये टर्मिनल मंडियां 'हब-एंड-स्पोक' स्वरूप पर काम करें जिसमें टर्मिनल मंडी (हब) को अनेक संग्रहण केंद्रों (स्पोक) के साथ जोड़ा जाएगा जो मूल उत्पादन केंद्रों में सुविधापूर्वक स्थित होंगे ताकि किसानों को अपने उत्पाद के विपणन के लिए सरलता से पहुंच मिल जाए। उनका निर्माण, स्वामित्व तथा संचालन निगमित / निजी / सहकारी सत्त्वों द्वारा किया जाएगा। यह सत्त्व कृषि-व्यवसाय, कोल्ड चेन, रसद, गोदाम - व्यवसाय, कृषि मूल संरचना तथा संबंधित पृष्ठभूमि से उद्यमियों का कंसोर्टियम हो सकता है। केंद्रीय / राज्य सरकार उपक्रम को समर्थन देने के लिए, प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया द्वारा निर्धारित अधिकतम 49 प्रतिशत तक इक्विटी भागीदारी के रूप में परियोजना को वित्तीय सहायता देती है। आंध्र प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, नागालैंड और संघ राज्य क्षेत्र चंडीगढ़ ने टर्मिनल मंडियां स्थापित करने के लिए ज़मीन की पहचान कर ली है।