भारत संसार में मसालों का सबसे बड़ा निर्यातक हैं। यह प्रति वर्ष 0.40 मिलियन टन से अधिक मसालों का निर्यात करता हैं जो वैश्विक निर्यात के परिमाण का लगभग 48 प्रतिशत और निर्यात मूल्य का 44 प्रतिशत हैं। भारतीय मसालों का अधिकतर निर्यात यूएसए को होता हैं और उसके बाद यूरोपीय संघ, मलेशिया, चीन, सिंगापुर, श्रीलंका, जापान तथा मध्य पूर्व के देशों को।
गत एक दशक के दौरान मसालों के निर्यात में काफी वृद्धि हुई हैं - मूल्य की दृष्टि से वार्षिक औसत वृद्धि दर 11.1 प्रतिशत हैं। वर्ष 2007-08 के दौरान, मसालों के निर्यात से आय ने पहली बार 1 बिलियन डॉलर के आंकड़े को पार किया और मसालों के निर्यात में मात्रा तथा मूल्य दोनों दृष्टियों से अब तक का उच्चतम मान दर्ज किया। उसी अवधि के दौरान, भारत से मसालों का निर्यात 444,250 टन हुआ जिसका मूल्य 1101.80 मिलियन यू एस डॉलर हैं - मूल्य की दृष्टि से 2006-07 से 39 प्रतिशत की वृद्धि। इस समय भारत सारे संसार में मसाला तेल और ओलियोरेजिन का एकमात्र आपूर्तिकर्ता हैं। कढ़ी पाउडर, मसाला पाउडर, मसाला मिश्रण तथा उपभोक्ता पैकों में मसालों के मामले में भारत एक दुर्जेय स्थिति में हैं। बोर्ड के सतत् प्रयासों के फलस्वरूप निर्यात में मूल्य वर्धित उत्पादों का हिस्सा बढ़कर 60 प्रतिशत हो गया हैं।
(स्रोत : डीजीसीआई एंड एस, कलकत्ता / लदान बिल / निर्यातकों की विवरणियां)
मसाला बोर्ड की मदद से, निर्यातकों ने स्थायी आधार पर गुणता सुधारने के लिए यथेष्ट मूल संरचना भी स्थापित कर लिया हैं। निर्यातकों ने गुणता सुधार और प्रौद्योगिक उन्नयन को एक सतत कार्यक्रम के रूप में अपना लिया हैं। यह बाजार की स्वीकार्यता के बदलते हुए स्तरों के अनुरूप हैं। बोर्ड द्वारा ध्यान दिए जाने वाले अन्य क्षेत्र हैं: चुने गए बाजारों में निर्यात को प्रोत्साहित करना; आयातक देशों में नीति निर्माताओं के साथ अंत:क्रिया; नए अंत्य प्रयोगों का विकास; किसानों का खेत के स्तर पर प्रशिक्षण; आदि।
दूसरी ओर, भारतीय अर्थव्यवस्था के उदारीकरण के साथ, मसालों का आयात क्रमश: बढ रहा हैं और वर्ष 2003-04 के दौरान अब तक के उच्चतम स्तर 1,34,260 टन पर पहुंच गया है जिसका मूल्य 591.40 करोड़ रु. (यूएस $ 128.88 मिलियन) हैं। वर्तमान विदेश व्यापार नीति के अनुसार, देश में मसालों के आयात पर कोई मात्रात्मक प्रतिबंध नहीं है, सिवाय 'बीज गुणता' मसालों और लहसुन जैसी मदों के। आयात के लिए सीमा शुल्क भी क्रमश: कम कर दिए गए हैं। श्रीलंका के साथ द्विपक्षी करारनामे के अंतर्गत, मसालों के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति हैं। मूल्य वर्धन और पुननिर्यात के लिए भी शुल्क-मुक्त आयात संभव हैं।
(स्रोत : डीजीसीआई एंड एस, कोलकाता, सीमा शुल्क से डीएलआई)