रेशम पालन उद्योग एक स्थितिकी अनुकूल कृषि आधारित श्रम गहन ग्रामीण कुटीर उद्योग है जो ग्रामीण किसानों, विशेषतया समाज के आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों के सहायक रोजगार उपलब्ध कराता है तथा उनकी आय को अनुपूरित करता है।
रेशम पालन उद्योग के संवर्धन तथा विकास के लिए अनेक केन्द्र प्रायोजित योजनाएं हे जिनके माध्यम से भारत सरकार निम्न भिन्न भिन्न क्रियाकलाप कर रही हैं :-
- रेशम उद्योग संबंधित अवसंरचना का सृजन;
- नर्सरियों तथा फार्मों का विकास;
- बागान क्षेत्रों का विस्तार;
- कोकून के उत्पादन तथा विपणन में रेशम के कीड़ों को पालने वाले व्यक्तियों को तकनीकी जानकारी उपलब्ध करना;
- कौशल उन्नयन तथा प्रशिक्षण कार्यक्रम, इत्यादि;
रेशम पालन उद्योग के विकास के लिए उत्प्रेरक विकास कार्यक्रम (सीडीपी)
केन्द्रीय रेशम बोर्ड राज्य सरकारों के सहयोग से तथा साथ ही ग्रामीण विकास मंत्रालय के समूह दृष्टिकोण / एसजीएसवाई कार्यक्रम के जरिए रेशम उद्योग के विकास हेतु उत्प्रेरक विकास कार्यक्रम क्रियान्वित कर रहा है।
- इस का लक्ष्य विभिन्न क्रियाकलापों जैसे होस्ट रोपण, बीज उत्पादन, रेशम के कीड़े के पालन, रीलिंग तथा ट्विस्टिंग, बुनाई, मुद्रण तथा रंजन में बेहतर प्रौद्योगिकी प्रक्रियाएं अपनाने को संवर्धित करना है ताकि उत्पादन तथा उत्पादकता में वर्धन हो तथा रेशम की उत्कृष्टता का उन्नयन हो।
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इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य प्रौद्योगिकी समावेशन, निवेश स़ृजन, उत्पादकता सुधार तथा रोजगार सृजन है। यह कार्यक्रम प्रचालनों में पणधारकों की सहायता करता है जो खाद्य वनस्पति की कृषि से लेकर शहतूत, टस्सर, इरी तथा मूगा रेशम में उत्पादों के विपणन से संबद्ध हैं।
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सहायता तथा प्रोत्साहन मुख्यत: शहतूत तथा शहतूत भिन्न क्षेत्रों में फार्म तथा फार्मेत्तर दोनों क्रियाकलापों में लघु तथा सीमांतीय किसानों तथा लघु उद्यमियों को उपलब्ध कराए जाते हैं।
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इसमें रेशम उत्पादक राज्यों में उत्कृष्ट कोकूनों तथा कच्चे रेशम के उत्पादन में सहायता दी जाती है।
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सीडीपी के अंतर्गत अधिकांश संघटकों में वित्तीय सहायता का प्रस्ताव किया जाता है जिसके अंतर्गत लाभानुभोगियों को आर्थिक सहायता/सहायता रेशम बोर्ड तथा संबंधित राज्य सरकार, दोनों द्वारा उपलब्ध कराई जाती है।
केन्द्रीय रेशम बोर्ड निधियों के प्रवाह के अनुवीक्षण द्वारा रेशम उद्योग के विकास हेतु विभिन्न योजनाओं / परियोजनाओं को क्रियान्वित कर रहा है। यह रेशम उद्योग से जुड़े मामलों पर सरकार परामर्श देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह देश के विभिन्न भागों में अवस्थित अपने अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थानों में प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन के माध्यम से अनुसंधान एवं विकास सहायता भी प्रदान कर रहा है तथा अपेक्षित तकनीकी जनशक्ति के सृजन को सुकर बना रहा है।
उद्योग में महिलाओं द्वारा निभाई जाने वाली प्रमुख भूमिका के ध्यान में रखते हुए उनके लिए व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। उदाहरणार्थ, फरवरी 2004 से जैव प्रौद्योगिकी विभाग की वित्तीय सहायता के साथ केन्द्रीय रेशम उद्योग अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान में ''महिलाओं के लिए रेशम प्रौद्योगिकी परिसर की स्थापना'' परियोजना के तहत प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।
आज तक, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडू, केरल तथा महाराष्ट्र जैसे विभिन्न राज्यों से लगभग 2500 कृषक महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया है। कौशल तथा आय को बढ़ावा देने वाली महत्वपूर्ण विधाओं जैसे एकीकृत पोषकतत्व तथा रोग प्रबंधन, यंग एज सिल्कवॉर्म रियरिंग, कम्पोजिट रियरिंग, एकीकृत कीट तथा रोग प्रबंधन, सिल्कवॉर्म सीड प्रोडक्शन, रेशम उद्योग के उप-उत्पादों का मूल्यवर्धन तथा इरगोनामिकल साउंड उपकरणी के जरिए तलकर्षण अपचयन के प्रशिक्षण के दौरान व्यापक रूप से शामिल किया जाता है।
रेशम उद्योग में सतत अनुसंधान एवं विकास निष्कर्षों के कारण अनेक प्रौद्योगिकियों का विकास किया गया है तथा इसके कारण कोकून की उत्पादन लागत काफी कम हो रही है। हाल ही में, शहतूत कृषि तथा सिल्कवॉर्म प्रहस्तन, दोनों में इन नवीन अनुसंधान निष्कर्षों के प्रवर्तन से रेशम उद्योग को एक मुख्य पेशे के रूप में प्रचालनरत किया जा रहा है तथा अनेक राज्यों में इसे देश की एक प्रमुख नकदी फसल के रूप में क्रियान्वित किया जा रहा है।