फल तथा सब्जी प्रसंस्करण उद्योगों को प्रभावित करने वाली कुछ प्रमुख बाधाओं को दूर करने तथा इसके विकास को आवश्यक प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की फल तथा सब्जी प्रसंस्करण क्षेत्र में अनेक आयोजनागत योजनाएं हैं। इन में उद्यमियों के प्रशिक्षण हेतु योजनाएं, मशरुम प्रसंस्करण सहित, फल तथा सब्जी प्रसंस्करण, हॉप्स और औद्योगिक संपदाओं के लिए मूलसंरचनात्मक सुविधाओं का सृजन, फल तथा सब्जी प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना/विस्तार/उन्नयन तथा संविदा कृषि के जरिए पश्च संबंधनों का विकास, विज्ञापन के जरिए बाज़ार संवर्धन, एफपीओ चिन्ह का संवर्धन तथा समान ब्रांड नाम के तहत लघु विनिर्माता, उत्पादों का विपणन, गुणता नियंत्रण प्रयोगशालाओं की स्थापना पैकेजिंग के लिए नवीन तकनीकों तथा प्रक्रियाओं सहित नवीन तकनीकों तथा प्रक्रियाओं का पता लगाने के लिए अनुसंधान तथा विकास के लिए योजनाएं शामिल हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य प्रसंस्करण तथा प्रशिक्षण केन्द्रों की स्थापना की योजना के अंतर्गत गुणता परीक्षण उपकरणों इत्यादि सहित संयंत्र, मशीनरी तथा उपकरणों के लिए 2.00 लाख रुपए तक तथा वाणिज्यिक उत्पादन हेतु बीज पूंजी / परिक्रामी निधि हेतु 1.00 लाख रुपए तक की सहायता उपलब्ध कराई जाती है। बहु उत्पाद क्रियाकलापों के लिए स्थापित किए जाने वाले खाद्य प्रसंस्करण तथा प्रशिक्षण केन्द्र के मामले में, गुणता परीक्षण उपकरणों इत्यादि सहित संयंत्र तथा मशीनरी एवं उपक्रमों की लागत को पूरा करने के लिए सहायता की इस प्रमात्रा को बढ़ा कर 7.50 लाख रु. तथा वाणिज्यिक उत्पादन हेतु बीज पूंजी / परिक्रामी निधि के लिए 2.00 लाख रुपए किया जा सकता है। इस योजना के तहत सहायता राज्य / केन्द्र सरकारी विभागों, संयुक्त क्षेत्र उपक्रमों / सहायता प्राप्त क्षेत्रक उपक्रमों, सहकारिताओं, गैर सरकारी संगठनों, स्वैच्छिक संगठनों, सरकारी संगठनों इत्यादि के लिए उपलब्ध है। ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना करने वाले संभावी उद्यमियों का पता लगाने के लिए इन केन्द्रों का वित्तपोषण करने का प्रस्ताव है जिससे स्व-रोज़गार की व्यवस्था की जा सके तथा ग्रामीण जनसंख्या का शहरी क्षेत्रों की ओर संक्रमण कम हो। यह ग्रामीण क्षेत्रों के प्रौद्योगिकी के अंतरण तथा साथ ही आधुनिक प्रसंस्करण तकनीकों से अवगत होने में भी परिणामी होगी। ये खाद्य प्रसंस्करण तथा प्रशिक्षण केन्द्र एक लघु इकाई के प्रचालन तथा प्रबंधन में व्यावहारिक अनुभव भी उपलब्ध कराएंगे। प्रशिक्षणार्थी बुक कीपिंग, विनिर्माण, उत्पादों के विपणन में गुणता परीक्षण के प्रत्येक क्रियाकलाप में भाग लेंगे। ताकि उन्हें वास्तविक स्थितियों का उद्भासन प्राप्त हो जिससे उनमें वाणिज्यिक उद्यमों की स्थापना तथा संचालन का विश्वास सृजित (अभिप्रेरित) करना है। इस प्रकार की शिक्षा ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य प्रसंस्करण सहकारिताओं को प्रोत्साहन देने तथा सहयोग की भावना का सृजन करने के लिए भी आशयित है।
यह मंत्रालय फल तथा सब्जी प्रसंस्करण क्षेत्र में अनुसंधान और विकास परियोजनाओं के लिए सहायता भी उपलब्ध कराता है। कुछ महत्वपूर्ण परियोजनाएं निम्नलिखित हैं :-
- विश्लेषणात्मक तथा गुणता नियंत्रण प्रयोगशाला स्थापित करने के लिए प्रौद्योगिकी विकास केन्द्र, बैंगलोर;
- निर्यात हेतु आम तथा अन्य फलों के लिए वाष्प तापन उपचार सुविधाओं के लिए एपीईडीए, नई दिल्ली; और
- एफएओ से प्राप्त सौर प्रशीतन यूनिट की संस्थापना के लिए मै. फ्रेश मार्केटिंग को ऑपरेटिव सोसाइटी लि., हैदराबाद
- पश्च फसल संस्थान, पुणे
- ट्विन स्क्रू कुकर प्रोटो टाइप के लिए डॉ. सुभाष मुखर्जी मेमोरियल रिप्रोडक्टिव बायोलॉजी रिसर्च सेंटर, कलकत्ता
- ताजे सुगंधित अदरक ओलियोरेसिन के लिए क्षेत्रीय अनुसंधान प्रयोगशाला (सीएसआईआर), त्रिवेन्द्रम प्रायोगिक परियोजना
- केन्द्रीय खाद्य प्रौद्योगिकीय अनुसंधान संस्थान (सीएफटीआरआई), मैसूर खाद्य सुरक्षा जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान केन्द्र परियोजना
- ट्विन सोलर कुकर प्रोटो टाइप के लिए डॉ. सुभाष मुखर्जी मेमोरियल रिप्रोडक्टिव बायोलॉजी रिसर्च सेंटर, कलकत्ता
- केन्द्रीय खाद्य प्रौद्योगिकीय अनुसंधान संस्थान (सीएफटीआरआई), मैसूर भौतिक रासायनिक तथा एनजाइमेटिक आशोधनों द्वारा सतही विशेषताओं को बढ़ाने के लिए सस्ते स्रोतों से प्रोटीन का उपयोग