रोपण फसलों के क्षेत्र में उद्यमकारिता के एकीकृत संवर्धन के लिए, सरकार ने समय समय पर पर अनेक नीतियों तथा योजनाओं का निरुपण किया है। इन सब का उद्देश्य चाय, कॉफी, रबर इत्यादि जैसी रोपण फसलों के उत्पादकता स्तरों को बढ़ाना तथा साथ ही फसलों के उत्पादकों को अपेक्षाकृत अधिक प्रोत्साहन देना है।
वर्तमान में, सर्वाधिक प्रमुख योजनाओं में से एक योजना 'मूल्य स्थिरीकरण निधि योजना (पीएसएफएस)', है जिसे चाय, कॉफी, रबर तथा तम्बाकू उत्पादकों के लिए अप्रैल 2003 में शुरू किया गया था। इसे इन वस्तुओं के इकाई मूल्य वसूली में गिरावट की पृष्ठभूमि में शुरू किया गया था जो कभी कभी इनकी उत्पादन लागत से भी नीचे गिर जाता था। पीएसएफ का मुख्य उद्देश्य सरकारी अभिकरणों द्वारा अधिप्राप्ति प्रचालकों का सहारा लिए बिना उत्पादकों के हितों का सुरक्षोपाय करना तथा वित्तीय राहत की व्यवस्था करना है जब मूल्य (कीमतें) विनिर्दिष्ट स्तर से नीचे गिर जाएं। 12.77 लाख उत्पादकों (4 हेक्टेयर की भूमिधारिता तक), के लक्ष्य में से, अारंभिक चरण में 3.42 लाख छोटे उत्पादकों (2 हेक्टेयर भूमिधारिता तक), को शामिल करने का निर्णय लिया गया। 31 मार्च 2007, की स्थिति के अनुसार, योजना के अंतर्गत नामांकन की संख्या 45,268 थी।
30 नवम्बर, 2007, की स्थिति के अनुसार पीएसएफ की संचित निधि में 435.1 करोड़ रु. थे जिसमें से 432.9 करोड़ रुपए का अंशदान भारत सरकार का है तथा 2.3 करोड़ रु. की राशि उत्पादकों द्वारा प्रवेश शुल्क के रूप में दी गई है। 31 मार्च, 2007 की स्थिति के अनुसार मूल्य स्थिरीकरण कोष न्यास (पीएसएफटी) में ब्याज के रूप में 103.4 करोड़ रु. की राशि भी उपलब्ध है। अप्रैल 2003 में योजना की शुरूआत से पीएसएफ न्यास ने वर्ष 2003, 2004, 2005 और 2006 के लिए मूल्य स्पैक्ट्रम बैंड घोषित किए हैं तथा वचनबद्ध संचयी वित्तीय सहायता की राशि 3.71 करोड़ रु. की है। तथापि, अपना अंशदान जमा कराने में उत्पादकों के चूक के कारण अभी तक चाय एवं कॉफी उत्पादकों को केवल 1.16 करोड़ रुपए की सहायता की निर्मुक्ति की जा सकती है।
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पीएसएफ के अंतर्गत वचनबद्ध की गई वित्तीय सहायता (करोड़ रु.) |
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| वस्तु |
2003 |
2004 |
2005 |
2006 |
Total |
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| रबर |
0 |
0 |
0 |
0 |
0 |
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| कॉफी |
0.82 |
0.58 |
0 |
0 |
1.40 |
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| चाय |
0.09 |
0.73 |
0.74 |
0.75 |
2.31 |
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| कुल |
0.91 |
1.31 |
0.74 |
0.75 |
3.71 |
(स्रोत : आर्थिक सर्वेक्षण 2007-08)
नारियल उत्पादकों के हित का संरक्षण करने के उद्देश्य से, 'नारियल संबंधी प्रौद्योगिकी मिशन' की शुरूआत की है। मिशन का मुख्य उद्देश्य एक ऐसे प्रक्रम के विकास में सहायता करना है जो नारियल कृषि को प्रतिस्पर्द्धी बना दे तथा युक्ति संगत प्रतिफल सुनिश्चित करें। मिशन के अन्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं :-
- नारियल विकास के क्षेत्र में चल रहे असंख्य सरकारी कार्यक्रमों में क्षैतिज तथा ऊर्ध्वस्थ एकीकरण लाने के उद्देश्य से इन कार्यक्रमों में समाभिरुपता तथा सहकालिकता की स्थापना करना;
- उत्पादन, पश्च फसल तथा खपत श्रृंखला में सभी कड़ियों पर समुचित, पर्याप्त, सामयिक तथा समवर्ती ध्यान का सुनिश्चय करना;
- नारियल विकास के लिए सृजित मूलसंरचना तथा विद्यमान निवेश के लिए आर्थिक पारिस्थितिकीय तथा सामाजिक लाभों को इष्टतम करना;
- कुशल (कौशल युक्त) रोज़गार का सृजन करने के लिए आर्थिक रूप से वांछनीय विविधीकरण तथा मूल्यवर्धन का संवर्धन करना;
- मिशन मोड में कमियों को दूर करने के लिए प्रदर्शन तथा संवर्धन के जरिए सहभागिता दृष्टिकोण का प्रयोग का प्रौद्योगिकियों का प्रसार करना; इत्यादि।