रेशम भारत के जीवन में रच बस गया है। हजारों वर्षों से यह भारतीय संस्कृति और परम्परा का अभिन्न अंग बन गया है। कोई भी अनुष्ठान किसी न किसी में रेशम के उपयोग के बिना पूरा नहीं होता है। रेशम उत्पादन और सिल्क रेशमी कपड़ा एक मुख्य उप क्षेत्र है जिसमें कपड़ा क्षेत्र आता है। रेशम उत्पादन कृषि आधारित कुटीर उद्योग है। रेशम उत्पादन का आशय बड़ी मात्रा में रेशम प्राप्त करने के लिए रेशम उत्पादक जीवों को पालन होता है। रेशम उत्पादन कृषि आधारित श्रम गहन उद्योग है। रेशम उत्पादन उद्योग में शामिल मुख्य क्रियाकलाप हैं :
- रेशम कीट खाद्य पौधों की खेती करना;
- कच्चा रेशम के उत्पादन के लिए रेशम कीट पालना;
- रेशम फिलोमेंट निकालने के लिए कोकून का रीलिंग; और
- अन्य कोकून पश्च प्रसंस्करण जैसे कि, मरोड़ना, डाइ करना, बुनना, प्रिटिंग और तैयार करना
रेशम उत्पादन एक अन्यन्त गहन श्रम क्षेत्र है, जिसमें कृषि (रेशम उत्पादन) और उद्योगों क्रियाकलाप शामिल होते हैं। भारत का रेशम कच्चा उत्पादन में विश्व में दूसरा स्थान है। इस स्थान के साथ-साथ इसकी अपार रोजगार क्षमता, जो रेशम पालम और सिल्क को भारतीय कपड़े के नक्शे में अपरिहार्य बनाता है।
रेशम का मूल्य बहुत अधिक है परन्तु इसकी उत्पादन की मात्रा कम है जो विश्व के कुल कपड़ा उत्पादन का केवल 0.2 प्रतिशत है। यह आर्थिक महत्व का मूल्यवर्धित उत्पाद प्रदान करता है।
मूंगा रेशम के उत्पादन में भारत का एकाधिकार है। यह कृषि क्षेत्र में एकमात्र नकदी फसल है जो 30 दिनों के भीतर प्रतिफल प्रदान करता है। रेशम उत्पादन महत्वपूर्ण आर्थिक क्रियाकलाप के रूप में उभरा है यह देश के अनेकानेक भागों में लोकप्रिय होता जा रहा है क्योंकि इसकी परिपक्वन अवधि छोटी होती है, संसाधनों का तुरंत पुन: चक्रन होता है। यह सभी प्रकार के किसानों के लिए उपयुक्त होता है विशेषतया सीमांत और छोटे जमीन धारकों के लिए चूंकि यह आप बढ़ाने के लिए समृद्ध अवसर प्रदान करता है और साल भर के लिए स्वयं परिवार के लिए रोजगार का सृजन करता है।
भारत सरकार की देश में रेशम उद्योग के विकास के लिए समवर्ती जिम्मेदारी है। केन्द्रीय स्तर पर, कपड़ा मंत्रालय नोडल संगठन है जिसमें रेशम उत्पादन और रेशमी कपड़ा उद्योग एक मुख्य कार्यात्मक क्षेत्र के रूप में हैं।
रेशम उत्पादन के संवर्धन और विकास के लिए अनेक केन्द्रीय रूप से प्रायोजित योजनाएं हैं, जिनके द्वारा भारत सरकार विभिन्न क्रियाकलाप कर रही है जैसे रेशम उत्पादन संबंधी मूल संरचना का सृजन नर्सरी और फार्मों का विकास, बागान क्षेत्र का विस्तार आदि।