मसाले उद्यान कृषि की एक मुख्य फसल है जिसका प्रयोग खाद्य पदार्थों को सुगंधित करने और स्वादिष्ट बनाने के लिए किया जाता हैं। यह मूलत: वनस्पति उत्पाद या उनका मिश्रण होता हैं, बिना किसी बाह्य द्रव्य के, और खाद्य पदार्थों को सुरभित करने के लिए प्रयोग किया जाता हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था के उदारीकरण के कारण, भारत के मसाला उद्योग ने बहुत तेजी से प्रगति की हैं। यह देश में लोगों की बड़ी संख्या के लिए, विशेषत: ग्रामीण लोगों के लिए, आजीविका और रोजगार का स्रोत हैं।
भारत को मसालों का घर कहा जाता है। यहां विविध प्रकार के मसाले पैदा होते हैं, यथा काली मिर्च, इलायची (छोटी और बड़ी), अदरक, लहसुन, हल्दी, लाल मिर्च आदि। यह मसालों और मसाला उत्पादों का सबसे बड़ा उत्पादक, उपभोक्ता और निर्यातक हैं। आईएसओ द्वारा सूचीबद्ध 109 मसालों में से भारत, अपने विविधतापूर्ण कृषि जलवायवी प्रदेशों के कारण, 75 पैदा करता हैं। देश के लगभग सभी राज्य और संघ राज्यक्षेत्र (यूटी) कोई न कोई मसाला उगाते हैं। विश्व मसाला व्यापार में, वैश्विक निर्यात में भारत का हिस्सा 48 प्रतिशत है और निर्यात मूल्य में 44 प्रतिशत हैं। यह हर वर्ष 0.40 मिलियन टन से अधिक मसालों का निर्यात करता हैं। पिछले वर्षों में मसालों के आयात में क्रमिक वृद्धि हुई हैं।
इस सब से पता चलता है कि विश्व मसाला उत्पादन में भारत की प्रमुख स्थिति हैं। सारे संसार के उद्यमी इस क्षेत्र में अवसरो की खोज कर रहे हैं। सरकार ने, केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर मसाला उद्योग के ठोस विकास के लिए उपाय और उपक्रम किए हैं। इस क्षेत्र में अनुसंधान को प्रोत्सहित करने और निर्यात की गतिविधियों को तेज करने के लिए मुख्य संगठन 'कृषि और सहकारिता विभाग' और 'भारतीय मसाला बोर्ड' हैं।
हर 2 या 3 वर्ष में एक बार अखिल भारतीय मसाला निर्यातक मंच और मसाला बोर्ड द्वारा संयुक्त रूप से 'विश्व मसाला कांग्रेस' का आयोजन किया जाता हैं। यह विभिन्न देशों से मसाला निर्यातकों और आयातकों का एक आवधिक सम्मेलन होता हैं। यह विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करने एक दूसरे की आवश्यकताओं / क्षमताओं को समझने का एक अवसर होता हैं और मसाला व्यापार में एक महत्त्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय घटना सिद्ध हुआ हैं। हाल में 10वीं विश्व मसाला कांग्रेस फरवरी 2010 में नई दिल्ली में आयोजित की गई थी।