कृषि राज्य का विषय है, अत: अपने-अपने राज्य के भीतर इस क्षेत्र की वृद्धि तथा विकास सुनिश्चित करना राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है। तदनुसार अनेक राज्यों में अलग विभाग स्थापित किए गए हैं जिनमें से कुछ नीचे दिए जा रहे हैं।
कृषि विभाग, महाराष्ट्र सरकार
1942 में कानून बनाने और फिर 1943 में भूमि विकास अधिनियम के लागू हो जाने से कृषि विभाग ने भूमि विकास की अनेक गतिविधियां शुरू कीं। 1943 में पहली बार तत्कालीन सरकार ने कृषि और संबंधित क्षेत्रों में समस्याओं पर विचार करके एक व्यापक कृषि नीति बनाई। उस नीति के अनुसार कृषि फसलों के लिए सिंचाई के रूप में जल के प्रयोग पर जोर दिया गया। यह विभाग किसान को केंद्र बिंदु मानता है और सारा विभाग इस प्रकार व्यवस्थित है कि किसान को उन्नत प्रौद्योगिकी अपनाने और उपलब्ध संसाधनों के चिरस्थायी प्रयोग की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए एक ही तंत्र काम करता है।
कृषि विभाग, हिमाचल प्रदेश सरकार
हिमाचल प्रदेश मुख्यत: एक कृषि राज्य है। कुल आबादी के लगभग 71 प्रतिशत को सीधा कृषि से रोजगार मिलता है। कृषि क्षेत्र राज्य के कुल घरेलू उत्पाद में लगभग 30 प्रतिशत का योगदान करता है। कृषि विभाग किसान समुदाय की सेवा को समर्पित है। वह विभिन्न विकासात्मक कार्यक्रम लागू करता है और उत्पादकता, उत्पादन तथा खेत की फसलों की लाभकारिता बढ़ाने के लिए तत्संबंधी प्रौद्योगिकी का प्रसार करता है। मृदा, भूमि, जल आदि जैसे प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग इस प्रकार किया जा रहा है कि पारिस्थिक चिरस्थायित्व, किसाना समुदाय के आर्थिक उत्थान के अभीष्ट लक्ष्य प्राप्त हो सकें।
कृषि विभाग, पश्चिम बंगाल सरकार
यह विभाग निम्नलिखित से संबंधित गतिविधियों में लगा हुआ है : कृषि उत्पादन तथा उत्पादकता पर नीति निर्णय, प्रौद्योगिकी के जनन द्वारा उसका विस्तार, प्रौद्योगिकी का अंतरण, कृषि निवेशों की उपलब्धता और समय से वितरण सुनिश्चित करना, विशेषत: बीज उर्वरक, इमदाद, ऋण आदि और मृदा परीक्षण, मृदा संरक्षण, जल संरक्षण, बीज परीक्षण, बीज प्रमाणन, योजना उत्पादन, उर्वरकों तथा पीड़कनाशियों का गुणता नियंत्रण आदि द्वारा समर्थन सेवाओं सहित।
कृषि विभाग, तमिलनाडु सरकार
कृषि राज्य की अर्थव्यवस्था का सबसे प्रमुख क्षेत्र बनी हुई है, क्योंकि 70 प्रतिशत आबादी अपनी आजीविका के लिए कृषि तथा संबंधित गतिविधियों में लगी हुई है। राज्य का क्षेत्रफल 1.3 लाख वर्ग कि मी है और फसल का सकल क्षेत्रफल लगभग 63 लाख हेक्टर है। सरकार की नीति और उद्देश्य ये रहे हैं कि कृषि उत्पादन में स्थिरता सुनिश्चत की जाए और चिस्थायी तरीके से कृषि उत्पादन बढ़ाया जाए ताकि बढ़ती हुई आबादी की खाद्य की जरूरतों को पूरा किया जा सके और कृषि आधारित उद्योगों की कच्ची सामग्री की मांग भी पूरी की जा सके; इस प्रकार ग्रामीण जनता को रोजगार के अवसर उपलब्ध होते हैं। कृषि विभाग ने अनेक विकास योजनाएं लागू करके और उत्पादन बढ़ाने के लिए तत्संबंधी प्रौद्योगिकियों का प्रसार करके भी कृषि में उच्च वृद्धि दर हासिल करने की चुनौती स्वीकार की है।
कृषि विभाग, केरल सरकार
यह विभाग राज्य में खाद्य फसलों और नकदी फसलों दोनों का उत्पादन बढ़ाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम बनाने तथा क्रियान्वित करने से संबंधित है। यह खेती, पादप रक्षा आदि की वैज्ञानिक विधियों को बढावा देने के लिए किसानों के बीच क्रियाकलाप चलाता है और किसानों को बीजों की उच्च उत्पादी किस्मों, पौध, रोपण सामग्री तथा पादप रक्षी रासायनिक द्रव्यों की आपूर्ति की व्यवस्था करता है। विभाग किसानों के लिए ऋण की व्यवस्था से संबंधित नीतियां और कार्यक्रम भी बनाता है। कृषि अनुसंधान, शिक्षा और विस्तार विभाग के तीन महत्वपूर्ण कार्य है। यह कृषि फार्म चलाता है और एक इंजीनियरी स्कंध भी है।