पशुपालन, डेयरी और मात्स्यिकी राज्य का विषय है, अत: पशुपालन, डेयरी और मात्स्यिकी विभाग इन क्षेत्रों के विकास में राज्य सरकारों के पयासों को सहयोग देता है। यह विभाग पशु रोगों के नियंत्रण के लिए, आनुवंशिक संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन एवं उन्नयन के लिए, पोषक आहार तथा चारे की उपलब्धता बढ़ाने के लिए, संसाधन तथा विपणन सुविधाओं के चिरस्थायी विकास के लिए, और पशुधन तथा मात्स्यिकी उद्यमों के उत्पादन व लाभकारिता की वृद्धि के लिए राज्य सरकारों को सहायता उपलब्ध कराता रहा है।
तदनुसार, राज्य सरकारों ने अलग विभाग स्थापित किए हैं जो राज्य में पशुपालन और डेयरी उद्योग के विकास के लिए उत्तरदायी हैं। उनमें से कुछ निम्नलिखित हैं :
पशुपालन विभाग, महाराष्ट्र सरकार मूलत: राज्य में पशुधन नीति बनाने और लागू करने के लिए उत्तरदायी हैं। यह अपना काम विभाग के अधीन विभिन्न अधिकारियों तथा संस्थाओं के माध्यम से करता है, अधिकांशत: प्लान तथा प्लानेतर योजनाओं के माध्यम से विभिन्न विकासात्मक गतिविधियों के क्रियान्वयन के रूप में। इसके काम की कुछ मुख्य मदें निम्नलिखित से संबंधित हैं::
- पशुपालन तथा मुर्गियों के लिए प्रजनन नीति;
- पशु स्वास्थ्य रक्षा और रोग नियंत्रण;
- रोग निदान और चौकसी;
- आनुवांशिक सुधार कार्यक्रम के लिए पशु-चिकित्सा, जैव वैज्ञानिक और महत्वपूर्ण निवेशों का निर्माण एवं आपूर्ति;
- महाराष्ट्र पशु एवं मत्स्य विज्ञान विश्व-विद्यालय के माध्यम से पशु-चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान;
- सहकारी कुक्कुट पालन और बैकयार्ड कुक्कुट पालन को प्रोत्साहित करना;
- पशु उत्पादों के उत्पादन के सांख्यिकीय आकलन का संकलन और विश्लेषण;
- आहार और चारे का विकास;
- देशज नस्लों का संरक्षण;
- पशुधन, पशु उत्पादों के गुणता नियंत्रण से संबंधित नियमों तथा अधिनियमों का क्रियान्वयन, विशेषत: निर्यात के लिए।
पशुपालन और पशु चिकित्सा सेवा विभाग, कर्नाटक सरकार,
के अनेक क्रियाकलाप हैं यथा चारा संसाधनों, विस्तार तथा प्रशिक्षण के साथ-साथ पशुओं, भैंसों, सुअरों, कुक्कुटों, भेड़ो और बकरियों का विकास; सामाजिक-आर्थिक कार्यक्रमों को लागू करना। इसके अतिरिक्त विभाग हर वर्ष 'समेकित नमूना सर्वेक्षण' करता है और हर पांच वर्ष में 'पशुधन गणना'।: विभाग के मुख्य उद्देश्य हैं :
- राज्य के घरेलू पशुओं तथा कुक्कुट वर्ग के लिए स्वास्थ्य रक्षा उपलब्ध कराना और उन्हें संक्रामक तथा असंक्रामक रोगों से बचाना।
- वैज्ञानिक प्रजनन, आहार तथा प्रबंधन द्वारा पशुधन तथा कुक्कुट वर्ग की उत्पादकता में सुधार।
- किसानों को उन्नत पशुपालन रीतियों में विस्तार सेवाएं और व्यावहारिक प्रशक्षिण सुविधाएं उपलब्ध कराना।
- उत्पादकों और उपभोक्ताओं दोनों के लाभ के लिए पशुधन तथा कुक्कुट सहकारी संस्थाओं को सहायता उपलब्ध कराना।
- लघु एवं सीमांत किसानों तथा कृषि मजदूरों की आय बढ़ाने के लिए और वित्तीय संस्थाओं से वित्तीय सहायता लेने में उनकी मदद करने के लिए योजनाएं बनाना।
- सामाजिक-आर्थिक कार्यक्रमों को लागू करना यथा विशेष पशुधन प्रजनन कार्यक्रम, विशेष घटक योजना और सरकार की जनजातीय उप-प्लान योजनाएं।
- प्रमुख पशुधन उत्पादों अर्थात् दूध मांस, ऊन, अंडे तथा उनके उप-उत्पादों के उत्पादन के आकलन के लिए हर वर्ष समेकित नमूना सर्वेक्षण करने के अतिरिक्त पांच वर्ष में एक बार पशुधन गणना करना।
पशुपालन और पशु चिकित्सा विभाग,
मेघालय सरकार, को पशुधन तथा कुक्कुट विकास के सभी पहलुओं का उत्तरदायित्व सौंपा गया है, यथा दूध, मांस, अंडों तथा ऊन का उत्पादन बढ़ाकर पशुधन और कुक्कुट तथा उनके उत्पादों का उत्पादन, संसाधन और विपणन। पशु स्वास्थ्य रक्षा सेवा तथा पशु रोगों का निवारण इष्टतम उत्पादन के लिए स्वस्थ पशुधन बनाए रखने के लिए एक प्राथमिकता है। पशुधन तथा कुक्कुट के प्रजनन, आहार तथा प्रबंधन के लिए उपयुक्त मूल संरचना की रचना, दूध, मांस तथा अंडों का संसाधन और पशुधन तथा पशुधन उत्पादों के विपणन को भी यथोचित महत्व दिया गया है। इसके अतिरिक्त, यह विभाग पशुधन उत्पादकों को अपेक्षित प्रशिक्षण और विस्तार समर्थन भी उपलब्ध कराता है ताकि उनके बीच पशुधन तथा कुक्कुट के वैज्ञानिक पालन को बढ़ावा मिले और फलस्वरूप ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा हों।
पशुधन तथा कुक्कुट क्षेत्र में विकासात्मक परिवर्तन लाने के लिए सरकार द्वारा अनेक कार्यक्रम तथा मूल संरचना विकास शुरू किए गए हैं जहां विभाग की गतिविधियों मुख्यत: निम्नलिखित मोटे उद्देश्यों के गिर्द केंद्रित थीं : -
- उपचार और निवारक टीकों द्वारा पशुधन तथा कुक्कुट वर्ग को रोग की विभीषिका से बचाना।
- स्थानीय पशुधन के उन्नयन के लिए उन्नत प्रजनन तकनीकों को समावेश करना।
- विस्तार तथा अनुसंधान को अपना कर बेहतर पशुपालन रीतियां सुनिश्चित करना।
- शिक्षा और प्रशिक्षण द्वारा यथेष्ट तकनीकी तथा व्यावसायिक जन-शक्ति का निर्माण करना।
- पशुधन और कुक्कुट उद्योग स्थापित करने को प्रोत्साहित करना।