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उद्यम पूंजी:
घरेलू उद्यम पूंजी निधियों का पंजीकरण
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भारतीय प्रतिभूति और विनियम बोर्ड (उद्यम पूंजी निधियां) विनियिमन 1996 भारत में उद्यम पूंजी निधियों के पंजीकरण और प्रचालन के लिए समग्र विनियामक रूपरेखा निर्धारित करता है। इन विनियमों के अनुसार उद्यम पूंजी निधि शब्‍द का अर्थ न्‍यास के रूप में स्‍थापित निधि या कंपनी, जिसमें एक कॉर्पोरेट निकाय शामिल हैं और इन विनियमों के अधीन पंजीकृत जो:- (i) जिसके पास पूंजी का समर्पित पूल हो; (ii) जो विनियमों में निर्धारित तरीके से जुटाई गई हो; और (iii) विनियमों के अनुसार निवेश करती हो।"

सेबी (उद्यम पूंजी निधियां) विनियमन, 1996 के मुख्‍य प्रावधान निम्‍नलिखित हैं:-

  • कोई कंपनी या न्‍यास या निकाय कॉर्पोरेट जो उद्यम पूंजी निधि के रूप में कोई कार्यकलाप करता या करने का प्रस्‍ताव रखना है वह सेबी के पास प्रपत्र क में (जैसा कि विनियमन की पहली सूची में विनिर्दिष्‍ट है) प्रमाणपत्र प्रदान करने के लिए आवेदन करेगा इसके साथ निर्धारित आवेदन शुल्‍क भी देगा। (द्वितीय सूची में दिया गया है)।

  • बोर्ड निवेशकों के हित में रिकॉर्ड अंतरण, दस्‍तावेज़ों या प्रतिभूति या निवेश समाधान जो इसके उद्यम पूंजी निधि के रूप में क्रियाकलापों से संबंधित हो, के संबंध में निदेशन जारी कर सकता है।

  • बोर्ड द्वारा प्रमाणपत्र प्रदान करने के प्रयोजन के लिए आवेदक को निम्‍नलिखित अर्हक मानदंड विशेष रूप से पूरा किया जाता है:-

    • यदि आवेदन कंपनी द्वारा किया जाता है:-

      • उद्यम पूंजी निधि के कार्यकलाप जारी रखने के रूप में अपने मुख्‍य लक्ष्‍य के रूप में संगम ज्ञापन;
      • इसके ज्ञापन और संगम अनुच्‍छेद द्वारा जनता को प्रतिभूति खरीदने के लिए आमंत्रित करना प्रतिसिद्ध किया गया है;
      • इसके निदेशक या मुख्‍य अधिकारी अथवा कर्मचारी प्रतिभूति बाजार से संबंधित किसी मुकदमा में संलिप्‍त न हो जिसका आवेदक के व्‍यापार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है;
      • इसके निदेशक, मुख्‍य अधिकारी या मुख्‍य अधिकारी अथवा कर्मचारी नैतिक हनन या किसी आर्थिक अपराध में कभी दोषी न हो;
      • आवेदक उपयुक्‍त और सही व्‍यक्ति हो।

    • यदि आवेदन न्‍यास द्वारा किया जाता है:-

      • न्‍यास की लिखत दस्तावेज के रूप में हो और यह भारतीय पंजीकरण अधिनियम 1908 (1908 का 16) के प्रावधानों के तहत विधिवत रूप से पंजीकृत हो;
      • न्‍यास का मुख्‍य लक्ष्‍य उद्यम पूंजी निधि के कार्यकलाप जारी रखना है;
      • इसके न्‍यासी कंपनी के निदेशक या कोई न्‍यासी प्रतिभूति बाजार से संबंधित किसी विवाद में संलिप्‍त न हो जिसका आवेदक के व्‍यापार पर प्रतिकूल असर हो सकता है;
      • इसकी न्‍यासी कंपनी के निदेशक यदि कोई हो या एक न्‍यासी ने किसी भी समय नैतिक हनन या किसी आर्थिक अपराध में सिद्ध दोषी न हो;
      • आवेदक उपयुक्‍त और सही व्‍यक्ति हो।

    • यदि आवेदन कॉर्पोरेट निकाय द्वारा किया जाता है:-

      • इसकी स्‍थापना या संस्‍थापन केंद्रीय या राज्‍य विधान के कानूनों के तहत हो;
      • आवेदक उद्यम पूंजी निधि के कार्यकलाप करते रहने के लिए अनुमत है;
      • आवेदक उपयुक्‍त और सही व्‍यक्ति हो;
      • ऐसे निकाय कॉर्पोरेट के निदेशक या न्‍यासी जैसा भी मामला हो को नैतिक हनन या किसी आर्थिक अपराध में संलिप्‍त होने की वजह से सिद्ध दोषी न पाया गया हो;
      • ऐसे निकाय कॉर्पोरेट के निदेशक या न्‍यासी जैसा भी मामला हो प्रतिभूति बाजार से संबंधित किसी विवाद में संलिप्‍त न हों जिसका आवेदक के व्‍यापार पर प्रतिकूल असर हो सकता है।

  • भारतीय प्रतिभूति और विनियम बोर्ड (उपयुक्‍त और सही व्‍यक्ति के लिए मानदंड) विनियमन, 2004 के प्रावधान सभी आवेदकों या उद्यम पूंजी निधियों के लिए इन विनियमों के तहत प्रयोज्‍य होंगे। बोर्ड आवेदक को यथावश्‍यक और अधिक जानकारी देने की अपेक्षा भी कर सकता है।

  • सभी तरह से अपूर्ण आवेदन बोर्ड द्वारा अस्‍वीकार किया जाएगा। तथापि, ऐसे किसी आवेदन को अस्‍वीकार करने के पहले आवेदक को आवेदन की प्राप्ति से तीस दिनों के भीतर बोर्ड द्वारा दर्शाई गई आपत्तियों को दूर करने का मौका दिया जाएगा।

  • यदि बोर्ड इस बात से संतुष्‍ट होता है कि आवेदक प्रमाणपत्र देने के लिए अर्हक है तो यह आवेदक को इसकी सूचना भेजेगा। सूचना प्राप्त होने पर विनियमन की दूसरी सूची में यथा विनिर्दिष्‍ट पंजीकरण शुल्‍क का भुगातन, आवेदक करेगा। इसके बाद सेबी प्रपत्र ख में आवेदक को पंजीकरण का प्रमाणन प्रदान करेगा।

  • दिया गया प्रमाणपत्र निम्‍नलिखित शर्तों के अध्‍याधीन होगा:-

    • उद्यम पूंजी निधि भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम 1992 और इन विनियमों के प्रावधानों का अनुपालन करेगा;
    • यह उद्यम पूंजी निधि को छोड़कर कोई अन्‍य कार्यकलाप जारी नहीं रखेगा;
    • यदि पहले बोर्ड को प्रस्‍तुत की गई कोई सूचना या विवरण गलत या गुमराह करने वाली पाया जाती है या पहले प्रस्‍तुत सूचना में किसी प्रकार का परिवर्तन आता है तो यह तुरंत लिखित रूप में इसकी सूचना बोर्ड को देगा।

  • यदि बोर्ड की राय में प्रमाणपत्र नहीं दिया जाना चाहिए तो आवेदक को समुचित सुनवाई का अवसर देने के पश्‍चात आवेदन को अस्‍वीकार कर सकता है। इस संबंध में बोर्ड का निर्णय तीस दिनों के भीतर आवेदक को सूचित किया जाएगा। अस्‍वीकार करने पर आवेदक उद्यम पूंजी निधि के रूप में कोई कार्यकलाप जारी नहीं रखेगा।

  • उद्यम पूंजी निधि किसी भी निवेशक चाहे भारतीय हो या विदेशी या अनिवासी भारतीय ये यूनिट जारी करने के द्वारा धन जुटा सकता है। तथापि, यह ऐसे किसी निवेशक से निवेश स्‍वीकार नहीं कर सकता है जो निश्चित निर्धारित राशि से कम हो।

  • उद्यम पूंजी निधि द्वारा किए गए या किए जाने वाले सभी निवेश निम्‍नलिखित शर्तों के अध्‍याधीन होंगें:-

    • उद्यम पूंजी निधि पंजीकरण के लिए आवेदन के समय निवेश कार्यनीति का प्रकटन करेगा;
    • यह एक उद्यम पूंजी उपक्रम में निधि की 25% से अधिक राशि निवेश नहीं करेगा;
    • यह संबंधित कंपनियों में निवेश नहीं करेगा;
    • यह निधि के जीवन चक्र के अंतराल का प्रकटन करेगा आदि।

  • कोई भी उद्यम पूंजी निधि इसके द्वारा यूनिटें जारी करने की तारीख से तीन वर्ष समाप्‍त होने तक किसी मान्‍यताप्राप्‍त स्‍टॉक एक्‍सचेंज में अपनी यूनिटें सूचीबद्ध करने का हकदार नहीं होगा। और यह अपने किसी यूनिट की खरीद या ग्राहक बनने के लिए जनता को आमंत्रित करने वाला कोई दस्‍तावेज या विज्ञापन भी जारी नहीं करेगा।

  • उद्यम पूंजी निधि निम्‍नलिखित करेगा- (i) नियोजना ज्ञापन जारी करना, जिसमें निबंधन और शर्तें अंत‍निर्हित होंगी, जिनके अधीन निवेशकों से धन उगाहा जाना है; या (ii) निवेशकों के साथ अंशदान या ग्राहक करार करना जो निबंधन और शर्तें विनिर्दिष्‍ट करेगा जिसके अध्‍याधीन धन जुटाने का प्रस्‍ताव रखा जाता है।

  • प्रत्‍येक उद्यम पूंजी निधि आठ वर्ष की अवधि के लिए खाताबही रिकॉर्ड और दस्‍तावेजों का रखरखाव करेगा जो इसके कार्य स्थिति की वास्‍तविक और निष्‍पक्ष रूप से दर्शाएंगे। जिन स्‍थानों पर बहियां, रिकॉर्ड और दस्‍तावेज रखे जाते हैं उसकी सूचना लिखित रूप में बोर्ड को देगा.

  • एक कंपनी के रूप में स्‍थापित उद्यम पूंजी निधि को कंपनी अधिनियम 1956 (1956 का 1) के प्रावधानों के अनुसार समाप्‍त कर दिया जाएगा। जबकि निकाय कॉर्पोरेट के रूप में स्‍थापित उद्यम पूंजी निधि को जिस संविधि के तहत इसका गठन किया गया है उसके प्रावधानों के अनुसार समाप्‍त किया जाएगा।
  • न्‍यास के रूप में स्‍थापित उद्यम पूंजी निधि की योजना निम्‍न प्रकार से समाप्‍त होगी:- (i) जब योजना की अवधि यदि कोई हो जिसका उल्‍लेख नियोजन ज्ञापन के किया गया है, समाप्‍त हो जाता है; और (ii) यदि न्‍यासी कंपनी की राय में जैसा भी मामला हो, योजना यूनिटों में निवेशकों के हितों में समाप्‍त होगी (iii) यदि योजना में 75 प्रतिशत निवेशक यूनिट धारकों की बैठक में संकल्‍पना पारित करते हैं कि योजना समाप्‍त कर दी जाए; या (iv) यदि बोर्ड निवेशकों के हित में ऐसा करने का निदेश देता है।

  • बोर्ड स्‍वप्रेरणा से या सूचना या शिकायत प्राप्‍त करने पर खाता बही, रिकॉर्ड और उद्यम पूंजी निधि से संबंधित दस्‍तावेज़ों का इनमें से किसी कारण से निरीक्षण या जांच अधिकारी के रूप में एक या अधिक व्‍यक्तियों की नियुक्ति कर सकता है; अर्थात् :-

    • यह सुनिश्चित करने के लिए कि खाता बही रिकार्ड और दस्‍तावेज इन विनिमयों में विनिर्दिष्‍ट तरीके से उद्यम पूंजी निधि द्वारा रखे जाते हैं;
    • निवेशकों, ग्राहकों या किसी अन्‍य व्‍यक्ति से उद्यम पूंजी निधि के कार्यकलापों को प्रभावित करने वाले किसी विषय के संबंध में प्राप्‍त शिकायतों का निरीक्षण एवं जांच करने के लिए;
    • यह सुनिश्चित करने के लिए कि क्‍या उद्यम पूंजी निधि द्वारा इस अधिनियम और इन विनियमों के प्रावधानों का अनुपालन किया जाता है अथवा नहीं; और
    • स्‍व-प्रेरणा से उद्यम पूंजी निधि के कार्यों की प्रतिभूति बाजार या निवेशकों के हित में निरीक्षण या जांच करने के लिए।

  • उद्यम पूंजी निधि के प्रत्‍येक अधिकारी का यह कर्तव्‍य होगा जिनके संबंध में निरीक्षण या जांच के आदेश दिए गए हैं, जांच या निरीक्षण अधिकारी के समक्ष ऐसे बही, खाते और अपनी अभिरक्षा में या नियंत्रणाधीन अन्‍य दस्‍तावेज प्रस्‍तुत करें और ऐसे विवरण और सूचना उपलब्‍ध कराए जैसा कि उक्‍त अधिकारी को जांच या निरीक्षण के प्रयोजनों के लिए आवश्‍यक हो।

  • बोर्ड जांच या निरीक्षण रिपोर्ट पर विचार करने के पश्‍चात और उद्यम पूंजी निधि या इसके न्‍यासी को सुनवाई का समुचित अवसर देने के बाद प्रतिभूति बाजार या निवेशकों के हितों में उपयुक्‍त निदेशन जारी कर सकता है जिसमें निम्‍न प्रकृति के निदेशन शामिल होंगे :-

    • एक विशेष अवधि, के लिए नयी योजना शुरू नहीं करने के लिए या निवेशकों से धन नहीं जुटाने के लिए उद्यम पूंजी निधि की आवश्‍यकता;
    • संबंधित व्‍यक्ति को निधियों की किसी संपत्ति को जमा करने या इन विनियमों के अतिक्रमण से प्राप्‍त योजना धन को जमा करने से प्रतिसिद्ध;
    • निधि या योजना की परिसंपत्ति के नाम से संबंधित व्‍यक्ति के लिए निदेशन में विनिर्दिष्‍ट तरीके से अपेक्षा होना;
    • संबंधित व्‍यक्ति को किसी धन या परिसंपत्ति को संबंधित निवेशक को वापस करने की आवश्‍यकता अपेक्षित ब्‍याज या अयथा योजना के तहत संगृहीत राशि के साथ;
    • संबंधित व्यक्ति को पूंजी बाजार मेंकार्य करने या विनिर्दिष्‍ट अवधि के लिए पूंजी बाजार के अभिगमन से प्रतिसि‍द्ध करना।

  • बोर्ड उद्यम पूंजी निधि को दिया गया प्रमाणपत्र लिम्बित कर सकता है जहां यह:- (i) भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम या इन विनियमों के किसी प्रावधान का उल्‍लंघन करता है; (ii) बोर्ड द्वारा यथाअपेक्षित उद्यम पूंजी निधि के रूप में आने वाले कार्यकलापों के संबंध में कोई सूचना देने में विफल होता है; (iii) ऐसी सूचना देता हो जो गलत हो या किसी सामग्री विशेष में गुमराह करने वाली हो; (iv) बोर्ड द्वारा यथा अपेक्षित समय-समय पर विवरणियां और रिपोर्ट प्रस्‍तुत नहीं करता है और; (v) बोर्ड द्वारा आयोजित किसी पूछताछ, निरीक्षण या जांच में सहयोग नहीं करता हो; और (vi) निवेशकों की शिकायतों का समाधान करने में विफल होता या इसकी ओर से बोर्ड को संतोषजनक उत्‍तर देने में विफल होता है।

^ ऊपर

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी)
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (उद्यम पूंजी निधि) 1996
उद्यम पूंजी निधि के रूप में पंजीकरण कैसे कराएं
पंजीकृत उद्यम पूंजी निधियों की सूची
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