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Closing or Changing a Business
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Closing or Changing a Business किसी व्‍यवसाय किस्‍म को परिवर्तित करना
Closing or Changing a Business किसी पंजीकृत कंपनी तथा अपंजीकृत कंपनी को परिसमाप्‍त करना
Closing or Changing a Business विनियामक अपेक्षाएं
   
 
Closing or Changing a Business
Closing or Changing a Business
विनियामक अपेक्षाएं:
औद्योगक और वित्तीय पुनर्निर्माण बोर्ड (बीआईएफआर)
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भारत सरकार ने, औद्योगिक रुग्‍णता की समस्‍या का सामना करने के लिए रुग्‍ण औद्योगिक कंपनी (विशेष प्रावधान), अधिनियम, 1985(एआईसीए), के क्षेत्राधीन औद्योगिक एवं वित्तीय पुनर्गठन बोर्ड (बीएफआईआर) की स्‍थापना की थी। इसकी स्‍थापनाआर्थिक कार्य विभाग , वित्त मंत्रालय, संभावित रुग्‍ण उपक्रमों के पुनरुद्धार और पुनर्वास के लिए और अव्‍यावहारिक तथा रुग्‍ण औद्योगिक कंपनियों को बंद करने और परिसमाप्‍त करने के लिए अर्ध न्‍यायिक निकाय के रूप में की गई थी। मंत्रालय का औद्योगिक वित्त प्रभाग औद्योगिक एवं वित्‍तीय पुनर्गठन के लिए बीआईएफआर के अध्‍यक्ष एवं सदस्‍यों की नियुक्ति संबंधी कार्य करता था तथ औद्योगिक रुग्‍णता संबंधी सभी अन्‍य विषयों पर कार्य करता था।

एसआईसीए के अधीन रुग्‍ण औद्योगिक कंपनी के निदेशक मंडल के लिए पुनरुद्धार और पुनर्वास स्‍कीम तैयार करने तथा ऐसी कंपनी के संबंध में अपनाए जाने वाले अन्‍य उपचारात्‍मक उपायों के बारे में बीआईएफआर को संदर्भित करना और रिपोर्ट करना अनिवार्य है। बीआईएफआर 1987 में इसकी शुरूआत से सितम्‍बर अंत 2006 तक 6,991 संदर्भ प्राप्‍त किए हैं।

30 सितंबर, 2006 की स्थिति के अनुसार बीआईएफआर को प्राप्‍त संदर्भ
क्रम
सं.
स्थिति निजी केंद्रीय
पीएसयू
राज्‍य
पीएसयू
कुल पीएसयू कुल
1. प्राप्‍त संदर्भ 6,695 108 188 296 6,991
2. पंजीकरण अस्‍वीकार 1,484 17 66 83 1,567
3. संवीक्षा के अधीन 12 0 0 0 12
पंजीकृत संदर्भ (=1-2-3) 5,199 91 122 213 5,412
5. खारिज निपटान
  (i) गैर अनुरक्षणीय 1,660 11 36 47 1,707
  (ii) बहुल पंजीकृत 218 0 0 0 218
6. अनुमोदित/स्‍वीकृत पुनर्वास योजना
  (i) बीआईएफआर द्वारा 695 27 26 53 748
  (ii) एएआईएफआर/एससी द्वारा 11 1 0 1 12
7. क्रम संख्‍या 6 में से लंबी अवधि तक रुग्‍ण घोषित 462 9 14 23 485
8. संबंधित उच्‍च न्‍यायालय के लिए अनुशंसा समाप्‍त करना 1,234 29 40 69 1,303
9. अब छोड़ा गया 119 5 3 8 127
कुल (5+6+8+9) 3,937 73 105 178 4,115
लंबित
10. परिचालित मसौदा योजना 42 2 0 2 44
11. जारी नोटिस समाप्‍त करना 85 1 4 5 90
12. रुग्‍णता निर्धारण के लिए लंबित 357 2 1 3 360
13. रुग्‍ण घोषित 678 11 10 21 699
14. असफल और पुन: खोली गई योजनाएं 8 1 0 1 9
15. एएआईएफआर द्वारा वापस भेजे गए मामले 43 1 2 3 46
16. न्‍यायालय द्वारा आस्‍थगन आदेश 46 0 3 3 49
कुल ((ग=क-ख) 1,262 18 17 35 1,297
स्रोत : बीआईएफआर, आर्थिक कार्य विभाग, वित्‍त मंत्रालय     

ऐसे प्रेषण प्राप्‍त करने पर बीआईएफआर जांच करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि क्‍या कंपनी वास्‍तव में रुग्‍ण है या नहीं। इस प्रयोजन के लिए बोर्ड, किसी प्रचालन एजेंसी, के जरिए रुग्‍ण कंपनी के संबंध में तैयारी कर सकता है:-

  • उस कंपनी की पूर्ण वस्‍तु सूची, जिनमें सभी परिसम्‍पत्तियां और देनदारियां खाता बही, रजिस्‍टर, नक्‍शा, योजनाएं, रिकॉर्ड, हक के दस्‍तावेज या संपत्ति का स्‍वामित्‍व और किसी भी प्रकृति के इससे संबंधित दस्‍तावेज शामिल हैं।
  • शेयरधारकों और ऋणदाताओं की सूची (जमानती ऋणदाताओं और गैर जमानती ऋणदाताओं की अलग सूची दर्शाते हुए);
  • कंपनी के शेयरों और परिसं‍पत्तियों के संबंध में मूल्‍यनिर्धारण रिपोर्ट;
  • इसकी आरक्षित कीमत, पट्टा किराया या शेयर विनिमय अनुपात का अनुमान;
  • परफोर्मा खाते जहां अद्यतन लेखापरीक्षित न किए गए खाते उपलब्‍ध है।

ऐसी पूछताछ के आधार पर यदि बीआईएफ आर सुनिश्चित कर लेता है कि कंपनी रुग्‍ण हो गई है तो सह संबंधित कंपनी को अपना निवल मूल्‍य सकारात्मक करने के लिए समुचित समय देगा या ऐसी रुग्‍ण औद्योगिक यूनिटों की पुनर्बहाली के निमित्त पैकेज तैयार करने के लिए कुछ बैंकों और वित्त संस्‍थाओं को मिलाकर एक प्रचालन एजेंसी नियुक्‍त करेगा। पैकेज में निम्‍नलिखित उपायों में से एक या अधिक सन्निहित होंगे :-

  • कंपनी के पूंजी आधार का पुनर्गठन करना।
  • इसकी संसाधन की स्थिति में सुधार लाने के लिए अधिक पूंजी लगाना।
  • स्‍वास्‍थ्‍य यूनिट के साथ रुग्‍ण कंपनी का विलयन या सम्‍मेलन
  • कंपनी के उदार ऋण मुहैया कराना।
  • कंपनी में प्रौद्योगिकीय परिवर्तन और आधुनिकीकरण करना।
  • इसके प्रबंधन में परिवर्तन करना
  • कंपनी के ब्‍याज भार को बट्टे खाते डालना
  • इसके ऋणों को पुन:अनुसूचित करना
  • इसको राजकोषीय रियायत जैसे कर में कटौती, कर छूट या कर राहत प्रदान करना।

यदि बीआईएफआर के विचार से यदि रुग्‍ण औद्योगिक कंपनी अपने समुचित समय के भीतर अपना नविल मूल्‍य संचित हानि से अधिक करने में समर्थ नहीं होती है और इसके भविष्‍य में व्‍यवहार्य होने की संभावना नहीं है और यह उचित और समतुल्‍य है कि कंपनी बंद कर दी जाए तो यह कंपनी बंद करने के लिए उच्‍च न्‍यायालय की प्रक्रियाओं का अनुसरण करेगा।

बीआईएफआर का निर्णय सभी संबंधित पक्षों के लिए बाध्‍यकारी होगा। ऐसी एक यूनिट की पता लगाना, अभिचिन्‍हांकित करना, अन्‍वेषण करना, पुनर्वास करना, पुनर्बहाली और अंतत: ऐसी कंपनी को बंद करने की सिफारिश करना बीआईएफआर के हाथ में है। इसके साथ-साथ भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा बैंकों को उधारकर्ता के प्रोफाइल पर लगातार नजर रखने के लिए और आरंभिक अवस्‍था में रुग्‍णता का पता लगाने के लिए अर्थात जब यूनिट कमजोर होने लगी, के द्वारा कुछ उपायों की पहल भी की जाती है। इसने इन यूनिटों के पुनर्वास के संबंध में और पुनर्वास कार्यक्रम तैयार करने और क्रियान्‍वयन करने के लिए वाणिज्यिक बैंकों और सावधिक उधारदाता संस्‍थाओं के साथ बेहतर समन्‍वयन संबंधी मामलों के लिए विस्‍तृत दिशा निर्देश जारी किया है।

परन्‍तु रुग्‍ण औद्योगिक कंपनी (विशेष प्रावधान) निरसन अधिनियम, 1985, के अधीन जिसे रुग्‍ण औद्योगिक कंपनी (विशेष प्रावधान)अधिनियम, 2003, ने प्रतिस्‍थापित किया औद्योगिक एवं वित्तीय पुनर्गठन बोर्ड (बीआईएफआर) और औद्योगिक और वित्‍तीय पुनगर्ठन अपीलीय प्राधिकरण (एएआईएफआर) भंग हो गया। पुनर्बहाली और पुनर्वास के कार्य बीआईएफआर के स्‍थान पर राष्‍ट्रीय कंपनी कानून न्‍यायाधिकरण (एनसीएलटी) के सौंपा गया है और एनसीएलटी के आदेश के विरुद्ध कोई अपील एएआईएफआर की बजाए राष्‍ट्रीय कानून अपीलीय न्‍यायधिकरण के पास की जाएगी।

एनसीएलटी/एनसीएलएटी संबंधी संस्‍थागत ढांचा (द्वितीय) संशोधन अधिनियम, 2002 के तहत की व्‍यवस्‍था कंपनी की गई है ।

  • केन्‍द्र सरकार शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा एक न्‍यायाधिकरण का गठन करेगी जो राष्‍ट्रीय कंपनी कानून न्‍यायाधिकरण के रूप में जाना जाएगा और ऐसी शक्ति एवं कार्यों का निष्‍पादन करेगा जो इस अधिनियम के द्वारा या अधीन इसे प्रदान किया जाएगा या अस्‍थायी रूप से लागू किसी अन्‍य कानून द्वारा प्रदत्‍त होगी।
  • प्रस्‍तावित एनसीएलटी ऐसे कार्यों और अधिकारों का उपयोग करना जारी रखेगा जो वर्तमान में कंपनी विधि बोर्ड, बीआईएफआर और उच्‍च न्‍यायालय द्वारा रुग्‍ण यूनिट के परिसमापन, बंद करने, समावेशन और विलयन के संबंध में किए जाते हैं।
  • इसका एक अध्‍यक्ष और इतनी संख्‍या में न्‍यायिक और तकनीकीय सदस्‍य होंगे जिनकी संख्‍या 62 से अनधिक होगी, जैसाकि केंन्‍द्रीय सरकार उचित समझती है, की नियुक्ति उस सरकार द्वारा शासकीय गजेट में अधिसूचित की जाएगी।
  • अधिनियम के अधीन रुग्‍ण कंपनी का निदेशक बोर्ड एनएससीएलटी को संदर्भित करेगा और इसकी पुनर्बहाली और पुनर्वास की योजना तैयार करेगा और ऐसी कंपनी के संबंध में अपनाए जाने योग्‍य उपायों के निर्धारण के लिए यथा निर्धारित विवरण सन्निहित आवदेन के साथ न्‍यायाधिकरण के समक्ष प्रस्‍तुत करेगा। आवेदन के साथ न्‍यायाधिकरण द्वारा अनुमोदित लेखापरीक्षकों के पैनल से प्रमाणपत्र संलग्‍न होगा जिनमें कंपनी का निवल मूल्‍य पचास प्रतिशत या कम; होने के कारणों और इसके ऋण की पुनअर्दायगी में चूक जो ऐसी कंपनी को रुग्‍ण औद्योगिक बनाती है का उल्‍लेख किया जाएगा, जैसा मामला हो।
  • यदि न्‍यायाधिकरण संगत तथ्‍यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद यह मानती है कि रुग्‍ण औद्योगिक कंपनी की अपनी वित्‍तीय दायित्‍वों को पूरा करते हुए समुचित समय के भीतर संचित हानि से अधिक निवल मूल्‍य जुटाने संभावना नहीं है, और कंपनी के भविष्‍य में व्‍यवहार्य होने की संभावना नहीं है और कंपनी का बंद किया जाना न्‍यायसंगत और उचित है, तब यह कंपनी बंद करने का आदेश दे सकता है।

^ ऊपर

कंपनी कार्य मंत्रालय
कंपनी अधिनियम, 1956
कंपनी (संशोधन) अधिनियम, 2000
कंपनी (संशोधन) अधिनियम, 2002
कंपनी (संशोधन) अधिनियम, 2006
उद्योग (विकास और नियमन) अधिनियम, 1951
रुग्‍ण औद्योगिक कंपनी (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1985
रुग्‍ण औद्योगिक कंपनी (विशेष प्रावधान) निरसन अधिनियम, 2003
औद्योगिक एवं वित्तीय पुनर्गठन बोर्ड (बीआईएफआर)
वित्त मंत्रालय
भारतीय रिज़र्व बैंक
 
 
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