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तीव्र मीनू
 
Closing or Changing a Business
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Closing or Changing a Business किसी व्‍यवसाय किस्‍म को परिवर्तित करना
Closing or Changing a Business किसी पंजीकृत कंपनी तथा अपंजीकृत कंपनी को परिसमाप्‍त करना
Closing or Changing a Business विनियामक अपेक्षाएं
   
 
Closing or Changing a Business
Closing or Changing a Business
किसी व्‍यवसाय किस्‍म को परिवर्तित करना :
निजी कंपनी को सार्वजनिक कंपनी में रूपांतरित करना
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कंपनी अधिनियम (धारा 43, 43 क,44), में ऐसे रूपांतरण के लिए दो प्रक्रियाविधियां निहित हैं।

डिफाल्‍ट द्वारा रूपांतरण

कंपनी (संशोधन) अधिनियम, 2000 , में यह शर्त निर्धारित की गई है कि किसी निजी कंपनी के अनुच्‍छेदों में चार प्रतिबंधों का प्रावधान किया जाएगा:-

  • शेयरों के अंतरण पर प्रतिबंध;
  • कंपनी के शेयरों या ऋणपत्रों में अभिदान करने के लिए जनता को आमंत्रित करने पर प्रतिबंध;
  • सदस्‍यों की अधिकतम संख्‍या पर प्रतिबंध जिनकी संख्‍या उन सदसयों को छोड़कर जो कंपनी के कर्मचारी या भूतपूर्व कर्मचारी हैं, 50 से अधिक नहीं होगी; तथा
  • इसके सदस्‍यों, निदेशकों या उनके संबंधियों को छोड़कर किन्‍हीं अन्‍य व्‍यक्तियों से कोई जमाराशियां आमंत्रित या स्‍वीकार करने पर प्रतिबंध।

यदि किसी निजी कंपनी द्वारा किसी भी उक्‍त प्रतिबंध के अनुपालन में चूक की जाती है तो ऐसी कंपनी अधिनियम द्वारा निजी कंपनी को प्रदत्‍त विशेषाधिकारों तथा छूओं की पात्र नहीं रहेगी तथा सार्वजनिक कंपनी पर प्रयोज्‍य सभी प्रावधान ऐसी निजी कंपनी पर प्रयोज्य होंगे।

तथापि, यह प्रावधान किया गया है कि कंपनी या कोई भी इच्‍छुक व्‍यक्ति चूक के कारण के लिए राहत प्रदान करने हेतु अपेक्षित शुल्‍क के साथ केन्‍द्र सरकार के समक्ष याचिका दायर कर सकता है। याचिका के साथ निम्‍न दस्‍तावेज लगाए जाएंगे:-

  • ज्ञापन की प्रति तथा संगम अनुच्‍छेद;
  • दस्‍तावेजों की प्रतियां जिनमें यह दर्शाया गया हो कि अधिनियम के अंतर्गत निर्धारित शर्तों के अनुपालन में चूक की गई हैं;
  • याचिकों का सत्‍यापन करने वाला शपथपत्र;
  • अपेक्षित आवेदन शुल्‍क के भुगतान के साक्ष्‍य स्‍वरूप बैंक ड्राफ्ट;
  • बोर्ड के संकल्‍प अथवा निष्‍पादित वकालतनामा, जैसा भी मामला हो, भी प्रति के साथ उपस्थिति ज्ञापन

केन्‍द्र सरकार, इस बात से संतुष्‍ट हो जाने पर कि अधिनियम के अंतर्गत यथा परिकल्पित शर्तों के अनुपालन में असफलता संयोगवश था अथवा किसी लापरवाही के कारण या किसी अन्‍य पर्याप्‍त कारण से थी अथवा यह कि अन्‍य आधारों पर राहत प्रदान करना न्‍यायोचित एवं साम्‍यापूर्ण है, यह आदेश दे सकती है कि कंपनी या किसी अन्‍य इच्‍छुक व्‍यक्ति को ऐसी शर्तों एवं निबंधनों पर, जो न्‍यायालय उचित एवं न्‍यायसंगत समझे, चूक के परिणामों से मुक्‍त कर सकती है।

आदेश की तिथि से कंपनी पुन: उन सभी विशेषाधिकारों तथा छूटों की पात्र हो भी जो निजी कंपनी को उपलब्‍ध हैं। किन्‍तु अंतर्वर्ती अवधि के दौरान सार्वजनिक कंपनी पर यथा प्रयोज्‍य अधिनियम के प्रावधान प्रयोज्‍य होंगे।

स्‍वेच्‍छा से रूपांतरण

कोई भी निजी कंपनी रूपांतरण की प्रक्रिया विधि का अनुसरण करके स्‍वेच्‍छा से सार्वजनिक कंपनी में रूपातंरण क सकती हैं:-

  • बोर्ड की बैठक का संयोजन करना तथा संगम अनुच्‍छेद परिवर्तित करने के तथा परिणामस्‍वरूप नाम को विशेष संकल्‍पों द्वारा बदलने के लिए आम बैठक का संयोजन करने के लिए समय का निर्णय करना, कार्य सूची प्रस्‍तुत करना। तथापि, यह परामर्शनीय है कि सार्वजनिक कंपनी पर प्रयोज्‍य अनुच्‍छेदों के एक नए समूह को अपनाए जाए। यह आवश्‍यक है क्‍योंकि कुछ अन्‍य अनुच्‍छेद भी है जिन्‍हें परिवर्तित किया जाना है जैसे आम बैठकों के लिए कोरम; निदेशकों की संख्‍या तथा आम बैठक के नोटिस की सेवावधि इत्‍यादि।
  • उपयुक्‍त स्‍पष्‍टात्‍मक विवरणों सहित विशेष संकल्‍पों का प्रस्‍ताव करते हुए आम बैठक का नोटिस भेजना।
  • यदि वर्तमान में दो सदस्‍यों की वैयक्तिक उपस्थिति का कोरम विद्यमान है तो आम बैठक का संयोजन करना तथा निम्‍न आशय का विशेष संकल्‍प पारित करना:-

    • उन अनुच्छेदों को हटाना जिन्‍हें केवल निजी कंपनी के अनुच्‍छेदों में ही शामिल किया जाना अपेक्षित है। ऐसे अन्‍य अनुच्‍छेद, जो सार्वजनिक, कपंनी पर प्रयोज्‍य नहीं है, हटा दिए जाने चाहिए तथा प्रयोज्‍य अनुच्‍छेदों को सन्निविष्‍ट किया जाना चाहिए।
    • उपर्युक्‍त परिवर्तनों के परिणामस्‍वरूप, इसके नाम से 'निजी' शब्‍द को हटा हैं।
    • प्रदत्‍त पूंजी को बढ़ाकर न्‍यूनतम 5 लाख रुपए करना। यदि प्राधिकृत पूंजी 5 लाख रुपए से कम है तो उसे भी बढ़ाया जाना अपेक्षित है।
    • जनता से पूंजी जुटाना।


  • उक्‍त विशेष संकल्‍प पारित करने के 30 दिनों के भीतर अनुचूसची II के अंतर्गत यथा निर्धारित प्रपत्र में विवरणिका दायर करना अथवा अनुसूची IV के अंतर्गत यथा निर्धारित प्रपत्र में विवरणिका के एवज में विवरणपत्र दायर करना।
  • इस प्रकार कार्य करने के लिए ई-प्रपत्र 32 में निदेशक की सहमति सार्वजनिक कंपनी में रूपांतरित निजी कंपनी द्वारा दायर की जानी अपेक्षित नहीं है।
  • पारित किए गए विशेष संकल्‍पों तथा स्‍पष्‍ट विवरण ई-प्रपत्र 23 में अपेक्षित शुल्‍क के साथ उनके पारित किए जाने के 30 दिनों के भीतर संबंधित कंपनी रजिस्‍टार (आरओसी) के पास दायर करना।
  • परिवर्तित नाम अर्थात 'निजी' शब्‍द हटाकर विद्यमान नाम में निगमन के नए प्रमाणपत्र को जारी करने के लिए संबंधित आरओपी को आवेदन करना। ऐसा प्रमाणपत्र जारी किए जाने पर, रूपांतरित कंपनी का नाम परिवर्तन अंतिम तथा पूर्ण होगा।
  • यदि कंपनी के तीन से कम निदेशक हैं तो निदेशकों की संख्‍या को बढ़ाकर कम से कम तीन करना। यदि कंपनी में सात से कम सदस्‍य हैं तो उन्हें बढ़ाकर कम से कम सात करना।
  • यद्यपि, कंपनी इसे सार्वजनिक बनाने के लिए अनुच्‍छेदों को परिवर्तित करने के लिए विशेष संकल्‍प पारित होते ही सार्वजनिक कंपनी बन जाती है, इसके नाम में परिवर्तन परिवर्तित नाम में संबंधित कंपनी रजिस्‍टार द्वारा नाया निगमन प्रमाणपत्र जारी करने पर ही प्रभावी होता है।
  • जब कोई निजी कंपनी सार्वजनिक कंपनी में रूपांतरित की जाती है तो उसके व्‍यवसाय आरंभ प्रमाणपत्र प्राप्‍त करने की आवश्‍यकता नहीं हैं।
  • एक सांविधिक बैठक आयोजित की जानी चाहिए, यदि ऐसा रूपांतरण कंपनी के निगमन छ: माह पूरे होने से पूर्व किया गया है।

^ ऊपर

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