उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम में उपभोक्ता जागरूकता फैलाने के लिए केन्द्रीय और राज्य स्तरों पर उपभोक्त संरक्षण परिषदों की स्थापना करने का प्रावधान है। अधिनियम के अनुसार परिषदों का उद्देश्य उपभोक्ताओं के अधिकारों को प्रोत्साहित करना और उनकी रक्षा करना है जैसे :-
- जीवन और सम्पत्ति के लिए हानिकारक सामान और सेवाओं के विपणन के विरुद्ध सुरक्षा का अधिकार;
- सामान अथवा सेवाओं की गुणवत्ता, मात्रा, क्षमता, शुद्धता, स्तर और मूल्य जैसा भी मामला हो के बारे में जानकारी का अधिकार ताकि उपभोक्ता को अनुचित व्यापार पद्धतियों से बचाया जा सके;
- जहां संभव हो सके, उचित मूल्यों पर विभिन्न प्रकार के सामान तथा सेवाओं तक पहुंच का आश्वासन;
- सुनवाई का तथा इस आश्वासन का अधिकार कि उपभोक्ता के हितों पर उपयुक्त मंचों पर समुचित विचार किया जाएगा;
- अनुचित व्यापार पद्धतियों अथवा प्रतिबंधित व्यापार पद्धतियों तथा उपभोक्ताओं के अनैतिक शोषण के विरुद्ध निपटान का अधिकार और
- उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार।.
केन्द्रीय उपभोक्ता संरक्षण परिषद्
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम केन्द्र सरकार को केन्द्रीय उपभोक्ता संरक्षण परिषद् की स्थापना करने की शक्ति प्रदान करता है जिसमें केन्द्र सरकार में उपभोक्ता मामले के प्रभारी मंत्री अध्यक्ष होंगे और ऐसे निर्धारित किए गए हितों का प्रतिनिधित्व करने वाले अन्य सरकारी और गैर सरकारी सदस्य होगें। उपभोक्ता संरक्षण परिषद् नियम 1987 के अंतर्गत परिषद् की सदस्यता 150 सदस्यों तक सीमित है जिसमें उपभोक्ता कार्य के प्रभारी केन्द्रीय मंत्री अध्यक्ष के रूप में शामिल है। परिषद् की अवधि तीन वर्ष की होगी। परिषद् की सिफारिशों के कार्यान्वयन को मानीटर करने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा परिषद् के सदस्य सचिव की अध्यक्षता में परिषद् के सदस्यों में से स्थायी कार्य दल का गठन किया जाए। परिषद् की बैठक जब भी आवश्यक हो बुलाई जाए लेकिन परिषद् की कम से कम एक बैठक उस समय और स्थान पर अवश्य होनी चाहिए जैसा सभापति उचित समझे।
राज्य उपभोक्ता संरक्षण परिषद्
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम में राज्य सरकारों द्वारा राज्य उपभोक्ता संरक्षण परिषदों की स्थापना का प्रावधान है। राज्य परिषद् में राज्य सरकार में उपभोक्ता कार्य के प्रभारी मंत्री अध्यक्ष के रूप मे तथा राज्य सरकार द्वारा निर्धारित हितों का प्रतिनिधित्व करने के लिए अन्य सरकारी और गैर सरकारी सदस्य तथा केन्द्र सरकार के 10 नामिति होंगे। राज्य परिषद् की बैठक जब भी आवश्यक हो, की जाए लेकिन प्रत्येक वर्ष कम से कम दो बैठकें ऐसे समय और स्थान पर की जाएं जिन्हें अध्यक्ष द्वारा उपयुक्त समझा जाए।
जिला उपभोक्ता संरक्षण परिषद्
जिले के भीतर उपभोक्ताओ के अधिकारों के संवर्धन और उनकी सुरक्षा के लिए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम में प्रत्येक जिले में जिला उपभोक्ता संरक्षण परिषद् की स्थापना का प्रावधान है। इसमें जिला कलेक्टर अध्यक्ष होंगे तथा राज्य सरकार द्वारा निर्धारित ऐसे हितों का प्रतिनिधित्व करने के लिए अन्य सरकारी और गैर सरकारी सदस्य होंगे। इनकी बैठक जब कभी भी आवश्यक हो, बुलाई जाए लेकिन वर्ष में कम से कम दो बैठकें अवश्य होनी चाहिए। अध्यक्ष द्वारा बैठक के समय और स्थान का निर्णय किया जाएगा।