नीति निर्धारण में उपभोक्ता
संरक्षण हमेशा से मुख्य ध्यान क्षेत्र रहा है। इसे
प्राप्त करने का एक तरीका उपभोक्ताओं द्वारा खरीदे जाने
वाले सामान के तौल और माप और सेवाओं में परिशुद्धता और
विश्वसनीयता सुनिश्चित करना है। "तौल और माप" से
तात्पर्य मुख्यत: ऐसी वस्तु/उपकरण/यंत्र अथवा साधान से
है जिसका उपयोग उपभोक्ता को सामान बेचते हुए अथवा सेवाएं
देते हुए,
भार तौलने अथवा मापने के लिए किया जाता है। तद्नुसार
उपभोक्ता कार्य विभाग में तौल और माप इकाई स्थापित
की गई है जो तौल और माप के मानकीकरण से संबंधित मामलों पर
कार्रवाई करने के लिए मुख्य प्राधिकरण है।
राज्यों/संघ
राज्य क्षेत्रों के तौल और माप प्रवर्तन अधिकारियों को
प्रशिक्षण देने के लिए रांची में इंडियन इंस्टीट्यूट आफ
मेट्रोलॉजी की स्थापना की गई है और तदनुसार यह चार माह का
आधारभूत प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रहा है। संस्थान
प्रवर्तन अधिकारियों के ज्ञान को अद्यतन बनाने के लिए
विशेष विषयों पर लघु अवधि की कार्यशालाएं और गोष्ठियों
का भी आयोजन कर रहा है औसतन यह वर्ष में लगभग 200
कार्मिकों को प्रशिक्षण देता है।
तौल और माप इकाई, उपभोक्ता कार्य विभाग के अंतर्गत
अहमदाबाद, बंगलौर, भुवनेश्वर, फरीदाबाद और गुवाहाटी में
पांच क्षेत्रीय संदर्भ मानक प्रयोगशालाएं (आरआरएसएल)
स्थापित की गई है। इन आरआरएसएल का सांविधिक दायित्व
राज्यों के विधिक मानकों की जांच करना और तौल और माप के
आदर्श अनुमोदन परीक्षण करना। वे उद्योगों की तौल और माप
उपकरणों के व्यास मापन द्वारा उद्योगों को माप विज्ञान
संबंधी सेवाएं प्रदान करती हैं। प्रत्येक प्रयोगशाला
क्षेत्र में औसतन 100 से अधिक उद्योगों को व्यास मापन
संबंधी सेवाएं प्रदान करती है। आरआरएसएल, फरीदाबाद को
नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फार टेस्टिंग एंड केलीबेशन
लेबोरेटरिज (एनएबीएल) के अंतर्गत अप्रैल 2007 में मास
मेट्रोलॉजी और तराजू व्यास मापन में मान्यता दी गई है।
वर्ष 2006-07 में विभाग ने मानक कार्यशील तराजुओं की खरीद
हेतु राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को 8.1 करोड़ रुपए की
अनुदान सहायता प्रदान की है। यही नहीं 2007 की दूसरी
छमाही में राज्यों/ संघ राज्य क्षेत्रों को 3.0
करोड़ की लागत के गौण मानक तराजुओं के 59 सेटों की
आपूर्ति की गई है। इसके अतिरिक्त जून 2007 में
राज्यों/ संघ राज्यों क्षेत्रों के विधिक माप विज्ञान
नियंत्रकों के दो क्षेत्रीय सम्मलेनों का योजनाओं और तौल
और माप कानूनों की प्रगति और कार्यान्वयन की प्रगति और
कार्यान्वयन की समीक्षा करने के लिए हैदराबाद और लखनऊ में
आयोजन किया गया।
भारतीय
मानक ब्यूरो (भा मा ब्यूरो) राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के
अनुसार आवश्यकता आधारित भारतीय मानकों को तैयार करने और
इन राष्ट्रीय मानकों का क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय
मानकों के साथ तालमेल बिठाने के कार्य में लगा हुआ है।
भारतीय मानकों के निर्माण से संबंधति कार्यकलापों की
प्रगति का ब्यौरा निम्न प्रकार से है :-
| क्र.सं. |
कार्यकलाप |
जनवरी-दिसंबर 2007
के दौरान प्रगति |
|
|
| 1. |
तैयार किए गए नए और संशोधित मानक |
331 |
|
|
| 2. |
अनुभागीय समिति बैठकें |
218 |
|
|
| 3. |
प्रवृत्त मानक* |
18428 |
|
|
| 4. |
समीक्षित मानक |
3624 |
|
* 31 दिसंबर 2007 की स्थिति के अनुसार
[स्रोत : उपभोक्ता कार्य विभाग]
भा मा ब्यूरो 5 दशकों से अधिक समय से
उत्पाद प्रमाणन योजना का प्रचालन कर रहा है। उत्पाद प्रमाणन अंक
कार्यकलापों की प्रगति का संक्षिप्त ब्यौरा निम्न प्रकार से है :-
| क्र.सं. |
कार्यकलाप |
जनवरी-दिसंबर 2007* के दौरान प्रगति |
|
|
| 1. |
दिए गए लाइसेंस |
1594 |
|
|
| 2. |
कुल चालू लाइसेंस |
19784 |
|
* (हालमार्किंग शामिल नहीं है)
[स्रोत : उपभोक्ता कार्य विभाग]
भारत में सोने के आभूषण की हॉलमार्किंग के लिए भा मा ब्यूरो को एकमात्र एजेंसी
के रूप में नामित किया गया है।
सोने के आभूषणों की हॉलमार्किंग योजना, के अंतर्गत, सुनारों को अपने
आभूषणों को भा मा ब्यूरो से मान्यता प्राप्त परख और हॉलमार्किंग
केंद्र से हॉलमार्क कराने के लिए भा मा ब्यूरो के प्रमाणन चिह्न लाइसेंस प्राप्त करना होता है।
इस योजना में जनवरी-दिसंबर 2007 में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है। सोने के
आभूषणों की हॉलमार्किंग हेतु लाइसेंसों की संख्या एक जनवरी 2007 को 2794 से
बढ़कर 31 दिसंबर 2007 को 4914 हो गई है। इसी प्रकार इसी अवधि में चांदी के
आभूषणों/ कलाकृतियों की हॉलमार्किंग के लिए लाइससेंसों की संख्या 172 से
बढ़कर 368 हो गई है।
भा मा ब्यूरो गुणवत्ता
प्रबंधन प्रणाली प्रमाणन योजना में निरंतर विकास हुआ है और 1 जनवरी 2007
से 31 दिसंबर 2007 की अवधि में 81 गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली प्रमाणन लाइसेंस
प्रदान किए गए हैं जिससे 31 दिसंबर 2007 को कुल चालू लाइसेंसों की संख्या
1162 हो गई है जिसमें रसायन, वस्त्र, प्लास्टिक, सीमेंट, विद्युत उत्पादन,
फार्मास्युटिकल्स, बैंकिंग सेक्टर, दूरसंचार, स्वास्थ्य, निर्माण,
शिक्षा, लकड़ी, बीमा, डेयरी संयंत्र, इंजीनिरिंग सेवाएं इत्यादि जैसे
औद्योगिकी क्षेत्र शामिल हैं।