किसी भी अर्थव्यवस्था में
उपभोक्ताओं के अधिकारों और हितों का संरक्षण और संवर्धन
सरकार का महत्वपूर्ण कार्य है। यह सामान्य तौर पर एक
सामाजिक और राजनीतिक आवश्यकता है और देश के चहुँमुखी
विकास के लिए अनिवार्य है। तेजी से बदलते हुए व्यवसाय
वातावरण और उभरते हुए वैश्विक बाजारों में अच्छी सेवाओं,
गुणवत्तापूर्ण सामान, विकल्पों की उपलब्धता के संबंध में
लोगों की आकांक्षाएं और धन की कीमत निरंतर बढ़ रही हैं।
तदनुसार, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र दोनों ही देश में
उपभोक्ताओं के कल्याण को बढ़ावा देने के लिए कई नीतिगत
पहलें, योजनाएं और प्रोत्साहन आरंभ कर रह हैं। वे यह
सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रयास कर रह हैं कि
उपभोक्ताओं को सभी संगत जानकारी दी जाए ताकि उन्हें शोषण
से बचाया जा सके और उन्हें बाजार से उत्पादों और सेवाओं
के चयन में तार्किक विकल्प प्रदान किए जाएं।
उपभोक्ताओं को उनके विद्यमान अधिकारों के बारे में जागरुक
करने और शिक्षित करने की आवश्यकता है उनके अधिकार हैं : (i)
जीवन और संपत्ति के लिए हानिकारक सामान और सेवाओं के विपणन
के विरूद्ध सुरक्षा का अधिकार; (ii) सामान अथवा सेवाओं की
गुणवत्ता, मात्रा, क्षमता शुद्धता, स्तर और मूल्य, जैसा
भी मामला हो, के बारे में जानकारी का अधिकार ताकि
उपभोक्ता को अनुचित व्यापार पद्वतियों से बचाया जा सकें; (iii)
जहां संभव हो उचित मूल्यों पर विभिन्न प्रकार के सामान
तथा सेवाओं तक पहुंच का आश्वासन ; (iv) उपभोक्ताओं के
कल्याण पर विचार करने के लिए बनाए गए विभिन्न मंचों पर
प्रतिनिधित्व का अधिकार; (v) अनुचित व्यापार पद्वतियों
अथवा उपभोक्ताओं के अनैतिक शोषण के विरुद्ध निपटान का
अधिकार और (vi) समस्त जीवन काल में सूचना संपन्न
उपभोक्ता बनने के लिए ज्ञान और कौशल प्राप्त करने का
अधिकार अत:, विभिन्न आधारभूत पहलुओं जैसे अधिकतम खुदरा
मूल्य (एमआरपी) सोने के आभूषणों की हॉलमार्किंग,
उत्पादों पर भारतीय मानक संस्थान (आईएसआई) का चिहन और
समाप्ति की तिथि के बारे में व्यापक पैमाने पर
उपभोक्ताओं में जागरुकता फैलाने की आवश्यकता है।
केंद्रीय स्तर पर उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा के
लिए, समान और सेवाओं के मानक संवर्धन के लिए तथा उपभोक्ता
की शिकायतों के लिए निपटान के लिए
उपभोक्ता कार्य, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय
के अंतर्गत
उपभोक्ता कार्य विभाग का गठन किया गया है। यह
उपभोक्ता संरक्षण तथा उनमें जागरुकता पैदा करने के लिए '
नेशनल
एक्शन प्लान फॉर कंज्यूमर अवेयरनेस एण्ड रिड्रेसल
एण्ड एन्फोर्समेंट आफ कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 1986'
पर कार्रवाई कर रहा है। यह उपभोक्ता कल्याण निधि का
प्रचालन कर रहा है जिसका उद्देश्य देश में उपभोक्ताओं के
कल्याण को बढ़ावा देना तथा उसकी सुरक्षा करना तथा
स्वैच्छिक उपभोक्ता आंदोलन को सुदृढ़ बनाना है।
उपभोक्ता संरक्षण और शिक्षा के क्षेत्र में गहन कार्य शोध
में सहायतार्थ
भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (आईआईपीए) में
उपभोक्ता अध्ययन केंद्र (सीसीएस) स्थापित
किया गया है। निधि की पहल के रूप में सीसीएस, आईआईपीए
द्वारा उपभोक्ता संरक्षण और उपभोक्ता कल्याण में शोध
संस्थाओं/
विश्वविद्यालयों
और महाविद्यालयों की सहलग्नता को बढ़ावा देने संबंधी
योजना का वित्तीयन और प्रशासन कर रहा है। जबकि, राज्य
स्तर पर, उपभोक्ताओं में जागरुकता पैदा करने और शिक्षा
को बढ़ावा देकर उपभोक्ता कल्याण के संबंध में की गई
पहलों पर उपभोक्ता कार्य विभाग - खाद्य, नागरिक आपूर्ति
और उपभोक्ता कल्याण विभागों इत्यादि द्वारा कार्रवाई की
जाती है जो कि देश के विभिन्न राज्यों और संघ राज्य
क्षेत्रों में स्थित है।