भारत में तौल और माप के संबंध में भूमिका और उत्तरदायित्व केंद्र और राज्यों के बीच बंटी हुई है। केंद्रीय स्तर पर राष्ट्रीय महत्व के सभी मामले जैसे तौल और माप संबंधी समान कानून, तकनीकी विनियमन, तौल और माप संबंधी प्रवर्तन अधिकारियों को प्रशिक्षण, सूक्ष्मता प्रयोगशाला सुविधाएं, तौल और माप संबंधी अंतरराष्ट्रीय सिफारिशों का कार्यान्वयन इत्यादि देखे जाते हैं। जबकि, राज्य सरकारें और संघ राज्य प्रशासन विभिन्न राज्यों/संघ क्षेत्रों में तौल और माप संबंधी कानूनों और नियमों के दैनंदिन प्रवर्तन के लिए उत्तरदायी है।
उपभोक्ता कार्य विभाग 'तौल और माप इकाई है', जो तौल और माप मानकों से संबंधित मामलों पर कार्रवाई के लिए केंद्रीय प्राधिकरण है। उपभोक्ता कार्य विभाग, उपभोक्ता कार्य, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अंतर्गत आता है और मुख्य रूप से उपभोक्ता सहकारिताओं के लिए नीतियां बनाने, मूल्यों, अनिवार्य वस्तुओं की उपलब्धता, देश में उपभोक्ता आंदोलन की निगरानी करने तथा भारतीय मानक ब्यूरो और तौल और माप जैसे सांविधिक निकायों का नियंत्रण करने के लिए उत्तरदायी है। विभाग में तौल और माप इकाई मानक भार और मापन अधिनियम, 1976; मानक भार और मापन अधिनियम (प्रवर्तन) अधिनियम, 1985; मानक भार और मापन अधिनियम (सामान्य) नियम 1987; और मानक भार और मापन (पैकेज्ड वस्तु) नियम, 1977 को शासित करता है। यह धोखाधड़ी को रोकने के लिए तौल और माप उपकरणों की उपयोग के दौरान जांच करता है।
भारतीय मानक ब्यूरो (भा माब्यूरो) भारत का राष्ट्रीय मानक निकाय है जिसका गठन भारतीय मानक संस्था के स्थान पर भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, 1986 के अंतर्गत किया गया है। यह मानकों को बनाने और उनके कार्यान्वयन उत्पादों और प्रणालियों दोनों के लिए गुणवत्ता प्रमाणन योजनाओं के प्रचालन जांच प्रयोगशालाओं का संगठन और प्रबंधन, उपभोक्ताओं में जागरुकता फैलाने तथा राष्ट्रीय मानकों का क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों के साथ तालमेल बिठाने में कार्यरत है ताकि व्यवसाय और उद्योग के सभी क्षेत्रों द्वारा अंतरराष्ट्रीय मानकों को स्वीकार किया जा सके। यह लगभग 8800 तकनीकी विशेषज्ञों की सहायता से राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुसार आवश्यकता आधारित भारतीय मानक तैयार कर रहा है। इसने शिकायत प्रकोष्ठ की भी स्थापना की है जहां पर उपभोक्ता आईएसआई चिह्न वाले उत्पादों की मात्रा के बारे में शिकायत कर सकते हैं।
विभिन्न राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों में तौल और माप विभाग/विंग/प्रभाग अथवा विधिक माप विज्ञान है जिसकी स्थापना उत्पादन, व्यापार और वाणिज्य में सही तौल और माप उपकरणों के विनियमन के लिए की गई है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके किसी उपभोक्ता को करार के अथवा उसके द्वारा किए गए भुगतान के अनुसार उचित तौल, माप और वांछित संख्या में वस्तु उपलब्ध कराई जाए। अत: यह राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के लोगों की, चाहे माप या तौल में, मदों की सही संख्या प्राप्त करने में सहायता करता है तथा पैक वस्तुओं पर अनिवार्य घोषणाएं सुनिश्चित कर उनके हितों की रक्षा करता है।
राज्य और संघ राज्य क्षेत्रों में निम्नवत ऐसे कुछ विभाग अथवा स्कंध हैं :-
- तौल और
माप विभाग, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली
- तौल और माप
विभाग, मेघालय सरकार
- तौल
और माप विभाग, अंडमान और निकोबार प्रशासन
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तौल और माप स्कंध, हिमाचल प्रदेश सरकार
- विधिक माप
विज्ञान विभाग, आंध्र प्रदेश सरकार
- विधिक माप
विज्ञान विभाग, मिजोरम सरकार
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तौल और माप विभाग, चंडीगढ़ प्रशासन
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विधिक माप विज्ञान निदेशालय, पश्चिम बंगाल सरकार, आदि।
तथापि, केंद्र सरकार द्वारा तौल और माप कानूनों का उचित प्रवर्तन सुनिश्चित करने की दृष्टि से राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के विधिक माप विज्ञान प्रवर्तन तंत्र के आधुनिकीकरण, उन्नयन और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार कई पहल और प्रयास कर रही है।