एक सशक्त बौद्धिक संपदा अधिकार (आई पी आर) कार्यनीति देश में आर्थिक वृद्धि को आगे बढ़ाने और उद्दीपित करने के लिए एक महत्वपूर्ण पूर्व शर्त है। यह अनुसंधान और विकास में अधिक निवेश की सुविधा प्रदान करने के साथ देश के नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाती है। बौद्धिक संपदा अधिकार से न केवल प्रतियोगियों और बौद्धिक संपदा अधिकार के स्वामियों की रचनात्मक क्षमता और नवाचार की सुरक्षा होती है जो वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति करते हैं बल्कि ये उन वस्तुओं और सेवाओं के प्रयोक्ताओं को भी सुरक्षा प्रदान करते हैं। यह कार्य प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तरीकों से किया जाता है। उक्त अधिकारों का अस्तित्व समाज के समग्र विकास के लिए अनिवार्य है।
बौद्धिक संपदा अधिकार के क्षेत्र, जो उपभोक्ता सुरक्षा के लिए सबसे अधिक संगत है, वे है व्यापार चिन्ह, भौगोलिक संकेतक तथा अनुचित प्रतिस्पर्धा के विरूद्ध सुरक्षा। व्यापार चिन्ह ऐसा संकेत है जिसे व्यापार के दौरान उपयोग किया जाता है और यह एक उद्यम से अन्य उद्यम की सेवाओं या वस्तुओं में भिन्नता दर्शाता है। जबकि भौगोलिक संकेत एक ऐसा संकेत है जिससे एक निश्चित भौगोलिक इलाके से उत्पन्न होने वाली विशेष चारित्रिक विशेषताओं के साथ वस्तुओं को पहचाना जाता है। ये बौद्धिक संपदा अधिकार उपभोक्ताओं को गुणवत्ता पूर्ण उत्पाद खरीदने तथा उन्हें खराब स्तर के उत्पादों के उपयोग से सुरक्षा प्रदान करते है। ये उत्पाद उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए जोखिमपूर्ण हो सकते हैं। इस प्रकार बौद्धिक संपदा अधिकार का उचित प्रचालन और उनका प्रवर्तन उपभोक्ताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह बौद्धिक संपदा अधिकार प्रणाली का आधार है कि देश के लोगों को अनुचित प्रतिस्पर्धा से सुरक्षा दी जाए, जो व्यापार और कारोबार में बेईमानी की किसी प्रथा द्वारा की जाती है।