वैश्वीकरण से विश्व भर के बाजार को समेकित करते हुए विश्व छोटा हो गया है। इससे उपभोक्ताओं को बाजार में उपलब्ध विभिन्न प्रकार के उत्पाद और सेवाएं पाने की जानकारी मिलती है। एक ओर इससे कम कीमतों पर उत्पादों तथा ब्रांड के अधिक विकल्प मिलते है। जबकि दूसरी ओर इससे उपभोक्ता अपने अधिकारों और उत्पादों की गुणवत्ता के प्रति अधिक सचेत हो गए है। इसके परिणाम स्वरूप वे अपने साथ आने वाली समस्याओं और मुद्दों के बारे में अपनी आवाज उठा सकते है।
आमतौर पर उठाए जाने वाली समस्याएं इस प्रकार है :
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स्वास्थ्य के हानिकारक पदार्थ मिलाकर व्यापारियों द्वारा खाद्य पदार्थों का अपमिश्रण करना अथवा कुछ ऐसे पदार्थ निकाल लेना जिनके कम होने से पदार्थ की गुणवत्ता गिर जाती है।
- भ्रामक विज्ञापनों द्वारा टेलिविज़न, समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में वस्तुओं तथा सेवाओं का ग्राहकों की मांग को प्रभावित करना।
- वस्तुओं के पैक पर दी गई जानकारी से भिन्न सामग्री का अंदर रखा जाना
- बिक्री पश्चात सेवाओं को अनुचित रूप से देना
- दोष युक्त वस्तुओं की आपूर्ति
- कीमत में छुपे हुए तथ्य शामिल होना
- उत्पाद पर गलत या छुपी हुई दरें लिखना
- वस्तुओं की आपूर्ति के भार और मापन में झूठे या निम्न स्तर के साधन उपयोग करना
- थोक मात्रा में आपूर्ति करने पर वस्तुओं की गुणवत्ता में गिरावट
- अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) का गलत रूप से निर्धारण
- एम आर पी से अधिक कीमत पर बेचना
- दवाओं आदि जैसे अनिवार्य उत्पादों की अनधिकृत बिक्री उनकी समापन तिथि की बाद लापरवाह उपभोक्ताओं का करना
- कमज़ोर उपभोक्ताओं सेवाएं
- बिक्री तथा सेवाओं की शर्तों और निबंधनों का पालन नहीं करना
- उत्पाद के बारे में झूठी या अधूरी जानकारी देना
- गारंटी या वारंटी को आदि को पूरा न करना
सभी मुद्दों या समस्याओं को उपभोक्ताओं के हित की सुरक्षा तथा उनके कल्याण को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य केंद्र तथा राज्य स्तर पर अधिक सक्षमता पूर्वक निपटाए जाने चाहिए।
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