अनुचित प्रतिस्पर्धा के प्रति संरक्षण को बौद्धिक सम्पदा प्रणाली के मुख्य उद्देश्यों में से एक माना गया है। यह पेटेंट, व्यापार चिन्हों इत्यादि जैसे मामलों की भांति संबंधित विषयों के संबंध में मालिकों को अनन्य अधिकार प्रदान नहीं करता। वस्तुत: यह प्रतिस्पर्धा के ऐसे किसी भी कृत्य को प्रतिबिद्ध करता है जो औद्योगिक या वाणिज्यिक मामलों में उचित व्यवहारों के प्रतिकूल है जिसे ''अनुचित प्रतिस्पर्धा'' कहा जाता है।
अनुचित प्रतिस्पर्धा के कृत्य न केवल प्रतिस्पर्धा को प्रतिकूल रूप में प्रभावित करते हैं जो ग्राहकों तथा बाजार अंश को खोने की ओर प्रवृत्त होते हैं बल्कि इससे उपभोक्ता भी प्रभावित होते हैं क्योंकि उन्हें गलत तथा भ्रामक सूचना प्राप्त होने की संभावना रहती है तथा उन्हें आर्थिक तथा वैयक्तिक पूर्वाग्रह से हानि उठानी पड़ती है,
अनुचित प्रतिस्पर्धा के निम्न कृत्य बौद्धिक सम्पदा से सन्निकट संबंधित है तथा उपभोक्ता संरक्षण के सीधे प्रासंगिक है :-
- इस प्रकार के स्वरूप के सभी कृत्य जो किसी भी प्रकार के माध्यम से किसी प्रतिस्पर्धी की स्थापना, वस्तुओं, अथवा औद्योगिक या वाणिज्यिक क्रियाकलापों की अस्त व्यस्त करते हैं
- व्यापार के क्रम में ऐसे स्वरूप के मिथ्या आरोप जो किसी प्रतिस्पर्धी की स्थापना, वस्तुओं या औद्योगिक अथवा वाणिज्यिक क्रियाकलापों को हानि पहुंचाए
- संकेत या आरेख जिनके व्यापार में प्रयोग से जनता को वस्तुओं के स्वरूप विनिर्माणकारी प्रक्रिया, विशिष्टताओं, प्रयोजन या प्रमाण के लिए उनकी उपयुक्तता के संबंध में भ्रामक सूचना मिले।
अनुचित प्रतिस्पर्धा कोई भी रूप क्यों न ग्रहण करे, यह ईमानदार तथा वैध उद्यमी, उपभोक्ता तथा कुल मिलाकर जनता के हित में है कि उन्हें उसमें यथा शीघ्र तथा यथा संभव प्रभावपूर्ण ढंग से बचाया जाए। उद्यमों में मुक्त तथा उचित प्रतिस्पर्धा को अर्थव्यवस्था में आपूर्ति तथा मांग को पूरा करने तथा साथ ही उपभोक्ताओं तथा समग्र रूप से अर्थव्यवस्था के हितों को पूरा करने के सर्वोत्तम माध्यम के रूप में माना गया है। इसके नवाचार तथा उत्पादकता को बढ़ावा मिलता है तथा अर्थव्यवस्था में संसाधनों का इष्टतम आबंटन होता है, लागतों में कमी आती है तथा गुणवत्ता में सुधार होता है, तथा साथ ही आर्थिक वृद्धि ओर विकास त्वरित होता है। अत: भारत में सरकार ने एक
प्रतिस्पर्धा नीति का निरूपण किया है जो उचित प्रतिस्पर्धा के संवर्धन तथा अनुरक्षण द्वारा उपभोक्ताओं और उत्पादकों के हितों का संरक्षण करती है।
इसके अतिरिक्त, बाजार स्थल में उचित प्रतिभागिता का सुनिश्चय केवल औद्योगिक सम्पत्ति अधिकारों के संरक्षण द्वारा नहीं किया जा सकता। अनेकों अनुचित कृत्यों जैसे भ्रामक विज्ञापनों, व्यापार की गोपनीय बातों का उल्लंघन इत्यादि के संबध में कार्रवाई बौद्धिक सम्पत्ति संबंधी विशिष्ट कानूनों द्वारा नहीं की जाती। अत: बौद्धिक सम्पत्ति कानूनों का अनुपूरण करने के तथा उपभोक्ताओं को उचित संरक्षण प्रदान करने के लिए अनुचित प्रतिस्पर्धा कानून का प्रवर्तन करना आवश्यक है।