उत्पादों तथा सेवाओं का चिह्रांकन
तथा गुणवत्ता प्रमाणन आज के तेजी से बदलते व्यवसाय परिदृश्य
में अत्यंत महत्वपूर्ण बन गया है। इससे उत्कृष्ट
वस्तुओं तथा सेवाओं का उत्पादन सुकर होता है तथा साथ ही
वे कुल मिलाकर उपभोक्ता संतुष्टि के अनुरूप उपलब्ध हो
जाती है। इसके कारण, उपभोक्ताओं को उत्पाद/सेवाकी गुणता में सुसंगतता के आश्वासन तथा बेहतर
चुनाव के साथ इसका सामाजिक परिदाय प्राप्त होता है। इसके
अतिरिक्त, उन्हें फर्म की आपूर्तियों की
निगरानी तथा
इसकी क्षमताओं का स्पष्ट संकेत भी प्राप्त होते है। अत:
आपूर्तिकर्ताओं का मूल्यांकन करने में उनके धन और समय की
बचत होती है। प्रमाणन और चिन्हांकन की यह प्रणाली
उत्पादकों के लिए भी लाभप्रद है। इससे उन्हें घरेलू तथा
वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी स्थान प्राप्त करने में
सहायता मिलती है। विभिन्न ग्राहकों द्वारा बहुत
मूल्यांकन के कारण उनके नेमाचार में व्यवधान भी कम हो
जाता है। वे अंतरराष्ट्रीय मानकों के समनुरूप उत्कृष्ट
वस्तुओं का उत्पादन करने के लिए दायी हो जाते है।
भारतीय मानक
ब्यूरो मुख्य प्राधिकरण है जो राष्ट्रीय मानकों, उत्पाद प्रमाणन
योजना के प्रचालन, प्रबंधन प्रणाली प्रमाणन योजनाओं तथा प्रशिक्षण के निक्षेपण
द्वारा देश में औद्योगिक विकास का संवर्धन कर रहा है।
भारतीय
मानक ब्यूरो की उत्पाद प्रमाणन योजना का उद्देश्य
अन्य उपभोक्ताओं को उत्पादों की उत्कृष्टता सुरक्षा
तथा विश्वसनीयता की तृतीय पक्ष गारंटी प्रदान करता है।
योजना के अंतर्गत भा मा ब्यूरो यह सुनिश्चित करने के पश्चात
विनिर्माताओं को लाइसेंस प्रदान करता है कि उनकी उत्पाद
गुणवत्ता निर्धारित राष्ट्रीय मानकों/विनिर्देशनों के
समनुरूप है। प्रमाणन लाइसेंसधारकों को अपने उत्पाद पर
मानक चिह्र नामक आईएसआई प्रमाणन चिह्रन का प्रयोग करने
की अनुमति देता है। यह समनुरूपता बाजार तथा कारखाने, दोनों
से नमूनों के परीक्षण तथा अकस्मात निरीक्षणों द्वारा
लाइसेंसधारक की नियमित निगरानी द्वारा सुनिश्चित की जाती
है।
आईएसआई चिह्र की उपभोक्ताओं की नजर में एक अच्छा
ब्रांड होने की छवि है क्योंकि यह उत्पाद की गुणवत्ता के बारे में आश्वासन देती है। अत: उपभोक्ता और साथ ही
संगठित क्रेता गैर आईएसआई उत्पादों की तुलना में आईएसआई
चिह्रांकित उत्पादों को वरीयता देते हैं।
उत्पाद प्रमाणन योजना आधारत: स्वैच्छिक प्रकार की है
तथा अधिकांशत: आईएसओ मार्गदर्शिका 28 पर आधारित है जिसमें
मानकों के साथ उत्पाद गुणवत्ता की समनुरूपता का निर्धारण
करने के लिए तृतीय पक्ष प्रमाणन प्रणाली के लिए सामान्य
नियम दिए गए हैं। इसमें विविध औद्योगिक विधाएं शामिल है
जैसे कृषि, कपड़ा, इलेक्ट्रानिक्स, धात्विक उत्पाद,
रबड़ और प्लास्टिक, ऑटोमोटिक चमड़ा, काष्ठ, कागज तथा
लुगदी उत्पाद इत्यादि।
तथापि, उपभोक्ता के स्वास्थ्य तथा सुरक्षा को प्रभावित करने वाली अनेक
मदों तथा बायोमास खपत की मदों के लिए यह योजना विभिन्न सांविधिक उपायों के
जरिए सरकार द्वारा अनिवार्य बना दी गई है। जैसे खाद्य अपमिश्रण निवारण
अधिनियम, खान अधिनियम, गैस सिलेंडर नियमावली तथा
भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, 1986 अनिवार्य प्रमाणन के अंतर्गत लाई गई
ऐसी कुछ मदें है एलपीजी सिलेंडर, प्रेशर स्टोव, सामान्य प्रकाश सेवाओं के
लिए सेल्फ बलास्टिड लैम्प (जिन्हें आम तौर पर सीएफएल कहा जाता है), शिशुओं
के लिए प्रसंस्कृत अनाज आधारित अनुपूरक खाद्य पदार्थ, मीठा अति उच्च
तापमान पर उपचारित संघनित दुग्ध, स्किम्ड दुग्ध पाउडर, सामान्य प्रयोजनों के
लिए सतत गति कम्प्रेशन दहन (डीजल) इंजन (20 किलो वॉट तक) रिफिलेबल
सीमलेस स्टील गैस सिलेंडर, नैदानिक थर्मोमीटर, पैकेज्ड पेयजल, विभिन्न प्रकार
के सीमेंट इत्यादि
उत्पाद प्रमाणन के क्रियाकलाप को अनुपूरित तथा समर्थित
करने के लिए भा मा ब्यूरो ने पांच क्षेत्रों में प्रयोगशालाओं की
एक श्रृंखला स्थापित की है अर्थात साहिबाबाद, कोलकाता,
मोहाली, मुम्बई तथा चेन्नै तथा साथ हीराज्य राजधानियों में
अथवा प्रमुख औद्योगिक शहरों में 33 शाखा कार्यालयों का
नेटवर्क भी स्थापित किया है। इनमें से छ: प्रयोगशाला को
राष्ट्रीय परीक्षण एवं अंशाकन प्रयोगशाला प्रत्यापन
बोर्ड ने उनकी परीक्षण सुविधाओं के लिए प्रत्यायित कर
दिया है। साहिबाबाद में वैद्युत अंशाकन प्रयोगशाला को इसकी
अंशाकन सुविधा के लिए प्रत्यायित किया गया है।
भा मा ब्यूरो ने
विदेशी विनिर्माताओं तथा
भारतीय आयातकों. के लिए भी प्रमाणन योजनाएं शुरू की हैं। इन योजनाओं के
अंतर्गत, विदेशी विनिर्माता अपने उत्पादों पर भा मा ब्यूरो मानक चिह्र अंकित करने
के लिए भा मा ब्यूरो से प्रमाणन प्राप्त कर सकते है तथा भारतीय आयातक भी देश में
आयातित उत्पादों पर
भा मा ब्यूरो मानक चिह्र लगाने के लिए भा मा ब्यूरो प्रमाणन योजना
के अंतर्गत 65 लाइसेंस प्रदान किए गए है तथा आयातकों को तीन
लाइसेंस प्रदान किए गए हैं। इसके अतिरिक्त,
स्वर्ण आभूषण की हॉल मार्किंग के लिए भा मा ब्यूरो प्रमाणन योजना है
जिसकी शुरूआत अनियमित स्वर्ण गुणवत्ता के कारण कपट पूर्ण व्यवहारों से
उपभोक्ताओं का संरक्षण करने के लिए की गई है। इस प्रकार इससे उपभोक्ता में
स्वर्ण आभूषण की विशुद्धता के बारे में विश्वास जागृत होता है तथा इस का
प्रयास भारत का विश्व में एक अग्रणी स्वर्ण बाजार केंद्र के रूप में विकास
करने का है। यह योजना स्वैच्छिक स्वरूप की है तथा देश भर में अवस्थित
क्षेत्रीय तथा शाखा कार्यालयों के भा मा ब्यूरो नेटवर्क के जरिए प्रचालन करती है।
इसके तहत, जौहरी को किसी भा मा ब्यूरो मान्यता प्राप्त परख तथा हॉलमार्किंग
केंद्र से अपने आभूषणों के हॉलमार्क कराने के लिए प्रमाणन चिह्र लाइसेंस
प्राप्त करना होता है। इन केंद्रों को भा मा ब्यूरो द्वारा यह सुनिश्चित करने के
पश्चात मान्य किया जाता है कि वह केंद्र नमूने लेने, परख तथा हॉलमार्किंग
के लिए निर्धारित मानदंडों के आधार का अनुसरण कर रहा है तथा साथ ही उसके पास
पर्यात परीक्षण सुविधाएं, प्रशिक्षित तथा सक्षम जनशक्ति है।
- भा मा ब्यूरो द्वारा प्रचालित की जा रही एक अन्य प्रमुख
योजना गुणवत्ता
प्रबंधन प्रणाली प्रमाणन योजना, है जिसका प्रचालन
आईएस/आईएसओ 9001:2000 मानक के अनुसार किया जा रहा है। इस
योजना की शुरूआत किया जा रहा है। इस योजना की शुरूआत
1991 में की गई थी जिसमें उद्योग की व्यापक श्रेणी तथा
साथ ही इंजीनियरी, रसायन, भेषज, सीमेंट, सिरेमिक,
खाद्य पदार्थ, कपड़ा, आटोमोटिव, अभियांत्रिक, धात्विक,
इलेक्ट्रानिक, एयरोनॉटिक्स, अस्पताल, वित्तीय, बैंकिंग
सेवाएं, निर्माण, अस्पताल, थोक तथा खुदरा व्यापाक,
शिक्षा तथा प्रशिक्षण, होटल, विद्युत, मुद्रण, दूरसंचार,
परीक्षण प्रयोगशालाएं तथा सूचना प्रौद्योगिकी सहित सेवा
क्षेत्रक शामिल है। इस योजना को एक प्रतिष्ठित
अंतरराष्ट्रीय प्रत्यापन संस्था अर्थात
रॉड वूर एक्रेडिएट (आरवीए) से 23 प्रौद्योगिकी
क्षेत्रों में तथा
भारत गुणता परिषद् से 9 प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में
प्रत्यापन प्राप्त हो गया है। सरल शब्दों में,
प्रत्यापन प्राप्त संदर्भ प्रमाणन संस्था द्वारा
प्रमाणन से है।
अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संगठन (आईएसओ) राष्ट्रीय
मानक निकायों का एक विश्वव्यापी परिसंघ है जिसका लक्ष्य
वस्तुओं तथा सेवाओं के अंतरराष्ट्रीय विनिमय को सुकर
बनाने तथा बौद्धिक, वैज्ञानिक, प्रौद्योगिकीय तथा आर्थिक
कार्य कलापों के क्षेत्रों में सहयोग का विकास करने के
उद्देश्य से विश्व में मानकीकरण तथा संवधित क्रियाकलापों
के विकास का संवर्धन करता है। आईएसओ तकनीकी कार्य के
परिणाम अंतरराष्ट्रीय मानकों के रूप में प्रकाशित किए
जाते है। मानकों का आईएसओ 9000 परिवार यह सुनिश्चित करने
के उद्देश्य से अच्छी प्रबंधन प्रक्रियाओं संबंधी
अंतरराष्ट्रीय सहमति का द्योतक है कि संगठन ऐसे उत्पाद या
सेवाओं का परिदाय कर सकता है जो उपभोक्ता की गुणवत्ता अपेक्षाओं पर खरे उतरें।
भा मा ब्यूरो आईएसओ का संस्थापक सदस्य
है तथा आईएसओ में भारत का प्रतिनिधत्व करता है।
आईएसओ
9000:2000 मानकों के परिवार का एक महत्वपूर्ण मानक आईएसओ
9001:2000 है जो गुणवत्ता प्रबंधन प्रणालियों की
अपेक्षाओं से संबंधित है। इन अपेक्षाओं को क्रियान्वित
करने तथा गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली प्रमाणन योजना के तहत
प्रमाणन लाइसेंस प्राप्त करने के मुख्य लाभ है -- (i)
संगठन के क्रियाकलापों के मूल्य वर्धन का अवसर प्रदान
करना; (ii) फर्म की क्षमताओं
तथा साथ ही गुणवत्ता के प्रति इसकी प्रतिबद्धता का सशक्त
प्रमाण उपलब्ध कराना; (iii) प्रक्रियाओं/क्रियाकलापों के
निष्पादन सामग्री उत्पाद, समाप्ति समय, पुन: कार्य के
कममें सतत् सुधार लाना; (iv) उत्कृष्ट जानकारी तथा
कुशलता में वृद्धि के जरिए अपव्यय में परिगामी होना; (v)
उपभोक्ताओं को उत्पादों की गुणवत्ता के बारे में आश्वस्त
करके उन्हें संतुष्ट करना; (vi) उत्पादों/सेवाओं में
जुड़ी सांविधिक तथा विनियामक अपेक्षाओं के उचित
क्रियान्वयन को सुकर बनाना;
(vii) बेहतर संसाधन प्रबंधन को सुकर बनाना,
इत्यादि