किसी अर्थव्यवस्था के प्रभावी रूप से कार्य करने में उचित और शुद्ध मानकों, भार तथा मापन का उपयोग उपभोक्ताओं के कल्याण के प्रोत्साहन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जिसके माध्यम से उपभोक्ताओं को कम भार या कम मापन की कुप्रथा से बचाया जाता है। उन्हें अपने द्वारा व्यय किए गए धन के लिए उत्पाद की सही और शुद्ध मात्रा मिलती है। उत्पादों की गुणवत्ता के मुहरांकन और प्रमाणन से उपभोक्ताओं में विश्वास और संतुष्टि आती है। उनकी खरीद के निर्णय आसान हो जाते हैं और उन्हें विश्वास हो जाता है कि उनकी गुणवत्ता आवश्यकताओं को पूरा किया जाएगा। अत: उपभोक्ताओं की सुरक्षा न्यूनतम गुणवत्ता विशिष्टियां तथा सुरक्षा मानक तय करते हुए वस्तुओं तथा सेवाओं के लिए निर्धारित किए जाते हैं और उनकी शिकायतों के निपटान के लिए प्रक्रिया बनाई जाती है।
उपभोक्ता कार्य विभाग,उपभोक्ता कार्य,खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय,के तहत भार एवं मापन, इकाई का गठन सही भार एवं मापन उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा देने हेतु किया गया है। इसके लिए विभिन्न विधान लागू किए गए हैं, जैसेSमानक भार और मापन अधिनियम, 1976, मानक भार और मापन (प्रवर्तन) अधिनियम 1985, मानक भार और मापन (सामान्य) नियम 1987 और मानक भार और मापन (पैकेज बंद वस्तुएं) नियम, 1977. ये सभी विनियम इसे सुनिश्चित करने पर लक्षित हैं कि उपभोक्ताओं को वस्तुओं की ठीक ठीक मात्रा मिले, इसमें वस्तुओं के पैकेज पर संगत सूचना की अनिवार्य घोषणा हो तथा व्यापार और वाणिज्यिक गतिविधियों में मानक भार और मापन उपकरणों के उपयोग की सुविधा हो। पुन: भार और मापन के इन सभी प्रावधानों को विनियमित करने के लिए विभिन्न राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों में भारत और मापन विभाग/स्कंध या कानूनी मेट्रोलॉजी विभाग हैं।
भारतीय मानक ब्यूरो (भा मा ब्यूरो) की स्थापना
भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, 1986 (भा मा ब्यूरो अधिनियम, 1986) के तहत भारत के राष्ट्रीय मानक निकाय के रूप में की गई है। यह मुख्यत: दो प्रकार की गतिविधियां करता हैं, नामत: वस्तुओं या सेवाओं के गुणवत्ता मानकों पर निर्धारण और उत्पाद प्रमाणन योजना/गुणवत्ता प्रमाणन योजना के माध्यम से इनके प्रमाणन करना। भा मा ब्यूरो अधिनियम, 1986 में उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा तथा वस्तुओं के मानकीकरण, मुहरांकन और वस्तुओं के गुणवत्ता प्रमाणन के प्रबलन तथा निर्धारण द्वारा उनके कल्याण को प्रोत्साहन देने का प्रावधान है। गुणवत्ता प्रबंधन प्रणालियां उपभोक्ताओं की गुणवत्ता आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कंपनी की क्षमता का एक सूचकांक है।