उपभोक्ता कार्य खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय
के अंतर्गत
उपभोक्ता कार्ये विभाग, देश में उपभोक्ता जागरूकता का
सृजन करने के लिए अनेक योजनाओं तथा अभियानों को
क्रियान्वित कर रहा है। इनमें से कुछ को नीचे सूचीबद्ध
किया जा सकता है।
- 10 वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान, उपभोक्ता जागरूकता संबंधी केंद्रीय योजना की शुरूआत 15 करोड़ रुपए के कुल परिव्यय के साथ की गई थी। 10
वीं योजना के विगत 2 वर्षों में, इस परिव्यय का प्रत्येक वर्ष बढ़ाकर
69.4 करोड़ रुपए किया गया।
- 11 वीं योजना के दौरान, 409 करोड़ रुपए के
उपभोक्ता परिव्यय के साथ मामले संबंधी योजना को अनुमोदित किया गया है।
वर्ष 2007-08 के दौरान उक्त योजना पर 45 करोड़ रुपए की राशि व्यय की गई।
वित्त वर्ष 2008-09 में, 75 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ उपभोक्ता
जागरूकता योजना के भाग के रूप में निम्न क्रियाकलाप किए गए है:-
- डीएवीपी के माध्यम से अंग्रेजी, हिंदी तथा अन्य क्षेत्रीय
भाषाओं के राष्ट्रीय तथा प्रादेशिक समाचार पत्रों के जरिए मुद्रित
विज्ञापन जारी करना।
- दूरदर्शन राष्ट्रीय, दूरदर्शन समाचार, दूरदर्शन भारत, दूरदर्शन भारती, लोक सभा टीवी तथा दूरदर्शन के क्षेत्रीय केंद्रों के विशाल नेटवर्क और सोनी, स्टार प्लस, जी टीवी नेटवर्क इत्यादि के माध्यम से एमआरपी, आईएसआई मार्क सोना की हॉलमार्किंग, समाप्ति तिथि, शिकायत निवारण प्रणाली, उपभोक्ता मंच, भार तथा मापतौल इत्यादि जैसे विभिन्न उपभोक्ता संबंधित मुद्दों पर वीडियो स्पॉट।
- आकाशवाणी तथा निजी एफएम चैनलों के माध्यम में डीएवीपी के जरिए
ऑडियो स्पॉट।
- जागरूकता सृजन के संबंध में पोस्टरों के प्रदर्शन के लिए डाक
विभाग के साथ सहबद्धता। पूर्वोत्तर राज्यों सहित सुदूरवर्ती क्षेत्रों
में भेजने के लिए मेघदूत पोस्टकार्डो का प्रसार।
- डीएवीपी के माध्यम से प्रचार सामग्री का मुद्रण तथा वितरण।
- उपभोक्ता जागरूकता का संदेश फैलाने के लिए सूचना और प्रसारण
मंत्रालय के अंतर्गत प्रकाश प्रभाग की पत्रिकाओं के माध्यम से
विज्ञापन जारी करना।
- सूचना और प्रसारण विभाग के गीत एवं नाटक प्रभार के माध्यम से
आउटडोर प्रचार जिसने आधारित पर जागरूकता का सृजन करने के लिए सभी
राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में 1000 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए
है।
- उपभोक्ता जागरूकता योजना के भार के रूप में, विभाग ऐसे
मंत्रालयों/विभागों के साथ मिल कर संयुक्त प्रचार अभियान भी चला रहा है जो
सीधे उपभोक्ताओं से जुड़े मुद्दे पर कार्रवाई करते है जैसे रसायन और उर्वरक
विभाग, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय इत्यादि। ऊर्जा कार्य
कुशलता
ब्यूरो के साथ एक संयुक्त प्रचार अभियान भी संचालित किया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त, उपभोक्ता कार्य विभाग
उपभोक्ता कल्याण कोष तथा संरक्षण करने तथा साथ ही देश में,
विशेषतया ग्रामीण क्षेत्रों में स्वैच्छिक उपभोक्ता आंदोलन को सुदृढ़
करने के लिए, वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के समग्र प्रयोजन से
उपभोक्ता कल्याण निधि का प्रचालन भी कर रहा है। अभी तक इस निधि में
लगभग 136;60 करोड़ रुपए की राशि उपार्जित हो चुकी है तथा 44.76 करोड़
रुपए का व्यय उपगत किया जा चुका है।
उपभोक्ता कल्याण निधि के अंतर्गत उपभोक्ता क्लब योजना की शुरूआत
वर्ष 2002 में की गई थी जिसके अनुसार सरकारी मान्यताप्राप्त
बोर्ड/विश्वविद्यालय के साथ संबद्ध प्रत्येक मध्यम/उच्च
माध्यमिक/उच्चतर माध्यमिक विद्यालय/ महाविद्यालय में एक उपभोक्ता
क्लब स्थापित किया जाना है। इस योजना के तहत प्रति उपभोक्ता क्लब
10,000 रुपए का अनुदान अनुज्ञेय है। इस योजना को 01.04.2004 से
विकेंद्रीकृत कर दिया गया है तथा राज्य/संघ राज्य की सरकारों को अंतरित
कर दिया गया है।
उपभोक्ता कल्याण कोष के तहत एक महत्वपूर्ण योजना '
'उपभोक्ता
संरक्षण तथा उपभोक्ता कल्याण में अनुसंधान संस्थाओं/विश्वविद्यालयों
तथा महाविद्यालयों की शामिल होने की प्रक्रिया का संवर्धन करने संबंधी योजना''
है जिसका प्रशासन
उपभोक्ता
अध्ययन केंद्र (सीसीएस),
भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (आईआईपीए) द्वारा किया जा रहा है। इस
योजना के उद्देश्य निम्नलिखित हैं :
- उपभोक्ता कल्याण के क्षेत्र में अनुसंधान तथा मूल्यांकन अध्ययन
प्रायोजित करना
- उपभोक्ताओं द्वारा सामना की जाने वाली व्यावहारिक समस्याओं का पता
लगाना तथा उनका समाधान उपलब्ध कराना।
- उपभोक्ताओं के संरक्षण तथा कल्याण के लिए नीति/ कार्यक्रम/ योजना के
निरूपण के लिए आवश्यक निविष्टियां प्राप्त करना।
- अनुसंधान तथा मूल्यांकन अध्ययनों तथा अन्य संबंधित साहित्य के
परिणामों के प्रकाशन के लिए अनुदान उपलब्ध कराना।
- उपभोक्ता संबंधित मुद्दों पर संगोष्टियों/ कार्यशालाओं, सम्मेलनों
इत्यादि को प्रायोजित करना तथा ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन के लिए अनुदान
स्वीकृत करना।.
उपभोक्ता अध्ययन केंद्र की स्थापना एक अभ्यर्पित केंद्र के रूप
में आई आई पी ए के तहत की गई है जिसका उद्देश्य उपभोक्ता संरक्षण और
उपभोक्ता कल्याण के क्षेत्र में सरकार के प्रयासों को बढ़ावा देता है।
केंद्र का लक्ष्य ग्रामीण भारत के विशेष संदर्भ में उपभोक्ता अधिकारों
तथा हितों संरक्षण का निष्पादन करना, उसे सुकर बनाना तथा संवर्धित करता
है। केंद्र के अन्य उद्देश्य हैं :-
- उपभोक्ता संरक्षण तथा उपभोक्ता कल्याण के क्षेत्र में गहन कार्य
अनुसंधान का संचालन करना/ उसे सुकर बनाना
- देश में उपभोक्ता न्याय के प्रशासन तथा अधिनिर्णयन में रत कार्मिकों
के प्रशिक्षण में अन्य संगठनों का संघटन करना तथा उनकी सहायता करना
- उपभोक्ता अधिकार संरक्षण के लिए कार्य कर रहे अन्य राष्ट्रीय तथा
अंतरराष्ट्रीय संगठनों/संस्थाओं के साथ नेटवर्क बनाना
- उपभोक्ता संरक्षण से जुड़े समकालीन मुद्दों पर
संगोष्ठियों/ कार्यशालाओं/ सम्मेलनों/ गोल मेज सम्मेलनों का आयोजन करना
- उपभोक्ताओं की आवश्यकताओं, विशेषतया उनकी शिकायतों का समाधान करने
तथा उनकी शिकायतों का निवारण करने वाले वैकल्पिक तथा औपचारिक प्रक्रमों के
प्रति व्यापार तथा उद्योग और सेवा प्रदायकों को सुग्राही बनाना
- विद्यमान ज्ञान अंतराल को पाटने के लिए भावी अनुसंधान तथा पुस्तक/
मोनोग्राफ/आवसरिक दस्तावेजों के प्रकाशन के लिए संसाधन केंद्र सृजन करना;
तथा
- समय-समय पर उपभोक्ता कार्य विभाग को नीतिगत निविष्टियां उपलब्ध
कराना।
एक अतिरिक्त उपभोक्ता समन्वयन परिषद् (सी सी सी) के सहयोग में एक
उपभोक्ता ऑन लाइन
अनुसंधान एवं अधिकारिता (सी ओ आर ई) केंद्र की स्थापना की गई है।
इसका आशय समाज वे सभी वर्गों में उपभोक्ता जागरूकता के सृजन तथा उनके
सशक्तीकरण के लिए उपभोक्ता संबंधित सूचना के संग्रहण तथा प्रसार के लिए
सर्वाधिक वैज्ञानिक तथा प्रभावी प्रणाली की व्यवस्था करना है। निवारण
हेतु उपभोक्ता शिकायतों का मध्यस्थता के जरिए ऑनलाइन प्रहस्तन
करने के लिए यह उपभोक्ता कार्य विभाग का एक मात्र प्राधिकृत अभिकरण है।
सी ओ आर ई में ऑनलाइन
शिकायत निवारण प्रणाली में अभिगम के द्वारा उपभोक्ता अपना पंजीकरण
करवा सकते है तथा अपनी शिकायतें ऑनलाइन दर्ज करवा सकते हैं।
राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन परियोजना की शुरूआत भी 3.12 करोड़
रुपए की अनुमानित लागत पर दिल्ली विश्वविद्यालय, वाणिज्य विभाग के
समन्वयन से की गई है। देश भर से उपभोक्ता नि:शुल्क नम्बर
1800-11-4000 को डायल करके उपभोक्ता के रूप में उनके द्वारा सामना की
जाने वाली समस्याओं के लिए दूरभाष पर परामर्श प्राप्त कर सकते है। यह
हेल्पलाइन दूर संचार, कूरियर, बैंकिंग, बीमा, वित्तीय सेवाओं इत्यादि
से जुड़ी समस्याओं पर कार्रवाई करने के लिए आशयित है। इसका प्रयास
उपभोक्ता विवादों का न्यायालय बाह्रय समाधान करना तथा साथ ही
उपभोक्ताओं में उनके अधिकारों तथा उत्तरदायित्वों के संबंध में
जागरूकता का सृजन करना है। प्राप्त मासिक रिपोर्टों से यह देखा गया है।
कि देश भर में 31 राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों से जनवरी 2007 से 31
दिसम्बर 2007 के दौरान हेल्पलाइन में 36826 कॉलें प्राप्त हुई हैं।
अभी तक इस परियोजना के लिए 205.5 लाख रुपए की राशि निर्मुक्त की गई है।
उपभोक्ताओं के लिए नि:शुल्क नम्बर सुविधा की उपलब्धता का समय सभी
कार्य दिवसों को (सोमवार-शनिवार) प्रात: 9:30 बजे से सायं 5:30 बजे तक
है।
इसके अतिरिक्त
भारतीय
मानक ब्यूरो का दिल्ली में इसके मुख्यालय में कार्यरत एक पूर्ण
विकसित शिकायत कक्ष भी है तथा इसके सभी क्षेत्रीय तथा शाखा कार्यालयों
में लोक शिकायत अधिकारी तैनात हैं जो उपभोक्ताओं पर तुरंत ध्यान देते
है उनकी शिकायतों के निवारण का त्वरित समाधान उपलब्ध कराते है।
उपभोक्ता निम्न के संबंध में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
- भा मा ब्यूरो प्रमाणित उत्पाद की गुणता
- भा मा ब्यूरो सेवाएं जैसे बिक्री, पुस्तकालय, तकनीकी सूचना सेवाएं, सामान्य
सेवाएं इत्यादि।
- भा मा ब्यूरो के कार्य कलाप जैसे मानक निरूपण, उत्पाद तथा प्रबंधन प्रणाली
प्रमाणन, प्रयोगशाला परीक्षण इत्यादि।
- लाइसेंसधारकों/ आवेदकों/ अन्य द्वारा भा मा ब्यूरो मानक चिह्र का अनधिकृत
प्रयोग
- भा मा ब्यूरो लाइसेंसधारकों द्वारा लाइसेंस के प्रचालन में अनियमिताएं तथा
उसका दुरुपयोग
- लाइसेंसधारकों/ आवेदकों/ गैर लाइसेंसधारकों द्वारा मिथ्या / भ्रामक
विज्ञापन तथा दावे
- लाइसेंस इत्यादि प्रदान करने उनके नवीकरण इत्यादि में विलम्ब
केंद्र सरकार द्वारा आरंभ किए गए ऐसे सभी उपाय तथा उठाए गए सभी कदम
उपभोक्ताओं में शिक्षा तथा जागरूकता संवर्धन में काफी लाभप्रद सिद्ध हुए
है। उपभोक्ता अपने अधिकारों तथा उत्तरदायित्वों के प्रति अधिकाधि
जागरूक होते जा रहें हैं, आधारिक उपभोक्ता संबंधी सूचना तक उनकी अधिक
पहुंच हो रही है तथा वे सरकार की शिकायत निवारण प्रणाली का उचित प्रयोग
कर रहे है।