आज के बदलते हुए बाजार परिदृश्य में, शिक्षा और अभिप्रेरणा के माध्यम से उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों और उत्तरदायित्वों के संबंध में, सशक्त करना अत्याधिक आवश्यक हो गया है। उपभोक्ता को पूर्णतया सतर्क बनाना होगा ताकि वह विक्रेता/ व्यापारी की ओर से किए गए किसी भी गलत कार्य से स्वयं को बचा सके। केन्द्र तथा राज्य सरकार, दोनों ने ही उपभोक्ताओं में जागरूकता बढ़ाने के लिए अनेक कदम उठाए हैं। इन सभी पहलों को देखते हुए, यह उपभोक्ता की भी जिम्मेदारी है कि वह निम्नलिखित सुझावों को ध्यान में रखें :-
- उत्पादों को केवल उनकी पूरी छानबीन के बाद ही खरीदें, न कि आकर्षक विज्ञापनों को देखकर
- व्यापारियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे भारण और मापक यंत्रो की जाच करें।
- अस्वच्छ स्थानों से फल और सब्जियां न खरीदें।
- पैकेट पर अधिकतम खुदरा मूल्य की जांच करे।
- पैकेट पर आंकडे के अनुसार मात्रा की जांच करे
- उत्पाद की समाप्ति तिथि की जांच करे, विशेषकर खाद्य पदार्थों और दवाइयों की।
- खरीदने के समय हमेशा बिल लें।
इसके अतिरिक्त, उत्पाद की पैकेजिंग और उसकी बाह्याकृति, उपभोक्ताओं की खरीद के लिए मार्गदर्शी कारक नहीं होना चाहिए। मूल्य पर विचार करने के साथ-साथ उपभोक्ता को उत्पाद की गुणवत्ता के प्रति भी सावधान होना चाहिए। सबसे महत्त्पूर्ण है कि यह उपभोक्ता की पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए कि वह, अपने अधिकारों में हुए किसी भी उल्लंघन की सूचना संबंधित प्राधिकरणों को दें।
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