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"कैडबरी समिति" का गठन मई 1991 में उन
घोटालों तथा विफलताओं की भारी समस्याओं को दूर करने के
लिए किया गया था जो 1980 के दशक के उत्तर वर्षों में तथा
1990 के दशक के आरभ्भिक वर्षों में घटित हुए थे। इसका गठन
नैगम शासन के वित्तीय पहलुओं का निवारण करने के मुख्य
उद्देश्य से वित्तीय रिपोर्टिंग परिषद, लंदन स्टॉक ऑफ
एक्सचेंज तथा लेखाकरण व्यवसाय द्वारा किया गया था। इसके
अन्य उद्देश्यों में ये शामिल हैं :- (i)
वित्तीय रिपोर्टिंग में तथा लेखापरीक्षकों की सक्षमता में
विश्वास के निम्न स्तर को ऊपर उठाना ताकि उन
सुरक्षोपायों की व्यवस्था की जा सके जिनकी मांग तथा
प्रत्याशा कम्पनी रिपोर्टों के प्रयोक्ता करते है; (ii)
निदेशकमंडल, शेयरधारकों तथा लेखापरीक्षकों को अधिक
प्रभावपूर्ण तथा जवाबदेह बनाकर उनकी संरचना, अधिकारों तथा
भूमिका की समीक्षा करना; (iii)
लेखाकरण व्यवसाय के विभिन्न पहलुओं पर ध्यान देना तथा
यथावश्यक समुचित अनुशंसाएं करना, (iv)
नैगम शासन का स्तरोन्नयन करना, इत्यादि। इस ध्यान में
रखते हुए, समिति ने पहली दिसम्बर, 1992 को अपनी अंतिम
रिपोर्ट प्रकाशित की। यह रिपोर्ट मुख्यत: तीन भागों में
विभाजित थीं।
- निदेशक मंडल की संरचना तथा उत्तरदायित्वों की
समीक्षा करना तथा सर्वोत्तम प्रक्रियाविधि संहिता की अनुशंसा करनासभी सूचीबद्ध कम्पनियों के बोर्ड सर्वोत्तम प्रक्रियाविधि
संहिता का अनुपालन करेंगे। सभी सूचीबद्ध कम्पनियां अपनी रिपोर्ट तथा लेखों
में संहिता के अनुपालन के संबंध में एक कथन करेंगे तथा साथ ही अनुपालन के
किन्ही क्षेत्रों के लिए कारण बताएंगी। सर्वोत्तम प्रक्रियाविधि संहिता को
चार संभागों में पृथक्कीकृत किया गया है तथा उनकी संबंधित अनुशंसाएं
निम्नलिखित है:-
- निदेशक मंडल -बोर्ड की नियमित बैठकें की जाएंगी, उनका कम्पनी पर
पूर्ण तथा प्रभावपूर्ण नियंत्रण होगा तथा वे कार्यपालक प्रबंधन का
अनुवीक्षण करेंगे। कम्पनी के अध्यक्ष (प्रमुख) के पास
उत्तरदायित्वों का स्पष्ट रूप से स्वीकृत विभाजन होना चाहिए जिस
में अधिकार तथा शक्ति का ऐसा संतुलन सुनिश्चित हो कि किसी भी व्यष्टि
के पास निर्णय की एक स्वाधिकार शक्तियां न हों। जहां अध्यक्ष मुख्य
कार्यपालन भी है, यह अनिवार्य है कि बोर्ड में एक स्वीकृत वरिष्ठ
सदस्य सहित सशक्त तथा स्वतंत्र तत्व विद्यमान हों। इसके अधिरिक्त
सभी निदेशकों की कम्पनी सचिव की सलाह तथा सेवाओं तक पहुंच होनी चाहिए
जो यह सुनिश्चित करने के लिए बोर्ड के प्रति उत्तरदायी है कि बोर्ड की
प्रक्रियाविधियों का अनुसरण किया जाता है तथा प्रयोज्य नियमों तथा
विनियमों का अनुपालन किया जाता है।
- गैर कार्यपालक निदेशक
-गैर कार्यपालक निदेशक कार्यनीति, निष्पादन,
संसाधनों जिनमें मुख्य नियुक्तियां शामिल हैं तथा आचरण मानकों के
मुद्दों को प्रभावित करने के लिए स्वतंत्र निर्णय देंगे। अधिकांश
गैर कार्यपालक निदेशक प्रबंधन से स्वतंत्र होने चाहिए तथा किसी ऐसे
व्यावसाय या संबंध से मुक्त होने चाहिए जो उनके शुल्क तथा
शेयरधारिता के अलावा, उनके स्वतंत्र अधिनिर्णय के प्रयोग में
महत्वपूर्ण हस्तक्षेप कर सकता है।
- कार्यपालक निदेशक -कम्पनी की वार्षिक रिपोर्ट में निदेशकों की तथा
अध्यक्ष एवं उच्चतम वेतन प्राप्त करने वाले निदेशकों की कुल
परिलब्धियों का पूर्ण तथा स्पष्ट प्रकटन होना चाहिए जिनमें वेतन तथा
निष्पादन संबंद्ध वेतन के लिए पृथक आंकड़ों सहित पेंशन अंशदान तथा
स्टॉक विकल्प शामिल हो।
- वित्तीय रिपोर्टिंग तथा नियंत्रण
-यह बोर्ड का कर्त्तव्य है कि वह वित्तीय रिपोर्टिंग का
सही तथा उचित चिज प्रस्तुत करने के लिए वित्तीय विवरणों की रिपोर्टिंग में
अपने कम्पनी की स्थिति का संतुलित तथा बोधगम्य आकलन प्रस्तुत करें।
निदेशकों को यह सूचना देनी चाहिए कि व्यवसाय यथावश्यक समर्थक मान्यताओं
का अर्हकताओं वाली एक प्रचालनरत कम्पनी है। बोर्ड यह सुनिश्चित करेगा कि लेखापरीक्षकों के साथ एक वस्तुनिष्ठ
तथा व्यावसायिक संबंध का अनुरक्षण किया जाए।
- लेखापरीक्षकों
की भूमिका पर विचार करना तथा लेखा व्यवसाय के लिए अनेक अनुशंसाए करना
- वार्षिक लेखापरीक्षा नैगम शासन की एक आधार शिला
है। यह उस स्वरूप के लिए एक बाह् तथा वस्तुनिष्ठ जांच बिंदु
प्रस्तुत करती है जिसमें वित्तीय विवरण तैयार किए गए है तथा कम्पनी
के निदेशकों द्वारा प्रस्तुत किए गए हैं। कैडबरी समिति ने अनुशंसा की
कि निदेशकमंडल तथा लेखापरीक्षकों के बीच एक पेशेवर तथा व्यावसायिक
संबंध रखा जाए ताकि सभी के लिए कम्पनी के वित्तीय विवरणों का एक उचित
तथा सही चित्र प्रस्तुत हो। लेखापरीक्षकों की भूमिका ऐसे तरीके से
लेखापरीक्षा का अभिकल्पन करना है कि वह एक युक्तिसंगत आश्वासन दे सके
कि वित्तीय विवरण महत्वपूर्ण
गलत कथनों से मुक्त हैं। इसके अतिरिक्त, अधिक प्रभावपूर्ण लेखाकरण
मानक विकसित करने की आवश्यकता है जो ऐसे महत्वपूर्ण संदर्भ बिंदु
उपलब्ध कराए जिनके प्रति लेखापरीक्षक अपना पेशेवर अधिनिर्णय देंगे।
दूसरे प्रत्येक सूचीबद्ध कम्पनी एक लेखापरीक्षा समिति बनाएगा जिससे
लेखापरीक्षकों को बोर्ड के गैर कार्यपालन निदेशकों तक प्रत्यक्ष अभिगम
उपलब्ध हो। समिति ने आगे लेखापरीक्षा भागीदारों के नियमित क्रमावर्तन
की अनुशंसा की ताकि लेखापरीक्षकों तथा प्रबंधकों के बीच अस्वस्थ
संबंध से बचा जा सके। इसने कम्पनी को गैर लेखापरीक्षा सेवाओं के लिए
लेखापरीक्षकों को किए गए भुगतानों के प्रकटन की भी अनुशंसा की। लेख
निर्माताओं के प्रतिनिधयों के संयोजन में लेखाकरण व्यवसाय को निम्न
में अग्र भूमिका निभानी चाहिए :- (i)
प्रभावात्मकता का आकलन करने के लिए मानदंडों का सेट तैयार करना; (ii)
निदेशकों द्वारा रिपोर्ट किए जाने के स्वरूप पर कम्पनियों के लिए
मार्गनिर्देश तैयार करना तथा (iii)
लेखापरीक्षकों के लिए संगत लेखापरीक्षा प्रक्रियाविधियों पर तथा उनके
द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत करने के स्वरूप के लिए मार्गदिर्नेश तैयार
करना। तथापि, इसे अपने मानकों तथा प्रक्रियाविधियों का सुधार जारी रखना
चाहिए।
- शेयरधारकों के अधिकारों तथा उत्तरदायित्वों संबंधी संव्यवहार
कम्पनी के मालिकों के रूप में शेयरधारक अपनी ओर से
व्यवसाय संचालन के लिए निदेशकों का निर्वाचन करते है तथा उन्हें इसकी
प्रगति के लिए जवानरेह मानते है। वे निदेशकों के वित्तीय विवरणों पर बाह्
जांच के लिए लेखापरीक्षकों की नियुक्ति करते है। समिति की रिपोर्ट में
कम्पनी के शेयरधारकों को कम्पनी की प्रगति के सही तथा उचित रिपोर्टिंग
की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया है जिसका उत्तरदायित्व बोर्ड पर है।
यह प्रोत्साहन दिया गया है कि सास्थानिक निवेशक/शेयरधाक अपने मतदान
अधिकारों को अपेक्षाकृत अधिक प्रयोग करें तथा बोर्ड के कार्यकरण में
सकारात्मक रुचि लें। शेयरधारकों तथा निदेशकमंडल दोनों को यह विचार करना
चाहिए कि आम बैठकों की प्रभावात्मकता को किस प्रकार बढ़ाया जा सकता है
तथा साथ ही शेयरधारकों के प्रति निदेशकमंडल की जवाबदेहिता को किस प्रकार
सशक्त किया जा सकता है।
^ऊपर
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