नैगम शासन
संबंधी संयुक्त संहिता (संहिता) का प्रकाशन वित्तीय
रिपोर्टिंग परिषद् (एफआरसी) द्वारा नैगम शासन तथा अभिशासन
में विश्वास का संवर्धन करने तथा साथ ही इसके निम्न
परिणामों में सहायता करने के लिए किया गया है नामत: (i)
शेयरधारकों के सर्वोत्तम हित में बोर्ड को अपने कर्त्तव्य
का निर्वहन करने में सहायता करके कम्पनी के बेहतर
निष्पादन में अच्छे नैगम शासन का योगदान; (ii)
अपेक्षाकृत दीर्घावधि में शेयरधारक मूल्य का परिदाय करने
में सक्षम दक्ष, प्रभावपूर्ण तथा उद्यमकारिता प्रबंधन के
लिए अच्छे अभिशासन द्वारा सुविधा प्रदान करना। यह संहिता नियमों का
कठोर सेट नहीं है बल्कि कई वर्षों के परामर्श तथा व्यापर
अनुभव से निकाली गई अच्छी बोर्ड प्रक्रियाविधि के
संघटकों की मार्ग दर्शिका है।
वर्ष "2008" में
प्रकाशित "नैगम शासन संहित" ने विभिन्न संभागों जैसे
निदेशक मंडल, कम्पनी के अध्यक्ष तथा मुख्य कार्यपालन,
पारिश्रमिक नीति, जवाबदेही तथा लेखापरीक्षा (वित्तीय
रिपोर्टिंग तथा आंतरिक नियंत्रण) के साथ साथ शेयरधारकों के
साथ संबंध, इत्यादि के बारे में अनेक सिद्धांत उपलब्ध
कराए है। इन सिद्धांतों में प्रमुख रूप से निम्न शामिल हैं
:-
- प्रत्येक कम्पनी की अध्यक्षता एक प्रभावपूर्ण बोर्ड करेगा जो
सामूहिक रूप से कम्पनी की सफलता के लिए उत्तरदायी है। बोर्ड की भूमिका
विवेकपूर्ण तथा प्रभावपूर्ण नियंत्रणों के ढांचे के भीतर कम्पनी उद्यम
कारिता नेतृत्व की व्यवस्था करने की है जो जोखिम के आकलन तथा प्रबंधन
को सक्षम बनाए। यह कम्पनी के कार्यनीतिगत लक्ष्य निर्धारित करेगा तथा यह
सुनिश्चय करेगा कि आवश्यक वित्तीय तथा मानव संसाधन सुव्यवस्थित है जिससे
कम्पनी अपने उद्देश्यों को पूरा कर सके तथा साथ ही प्रबंधन निष्पादन की
समीक्षा कर सके। यह कम्पनी के मूल्यों तथा मानकों (स्तर) का निर्धारण
करेगा तथा सुनिश्चित करेगा कि इसके शेयरधारकों तथा अन्यों के प्रति इसके
दायित्व समझे जाएं तथा पूर्ण किए जाएं।
- सभी निदेशक कम्पनी के हित में वस्तुनिष्ठ निर्णय लेंगे। बोर्ड अपने कर्त्तव्यों का निवर्हन करने के लिए पर्याप्त नियमित बैठकें करेगा। इसके निर्णय के लिए विशिष्ट रूप से आरक्षित मामलों की एक औपचारिक अनुसूची होनी चाहिए।
- वार्षिक रिपोर्ट में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष (जहां कोई हो) मुख्य कार्यपालन वरिष्ठ स्वतंत्र निदेशक तथा नामांकन लेखापरीक्षा तथा पारिश्रमिक
समितियों के अध्यक्षों और सदस्यों को अभिचिहांकित किया जाएगा इसमें बोर्ड
की तथा इन समितियों की बैठकों की संख्या तथा निदेशकों की उनमें व्यक्तियों
की उपस्थिति का निर्धारण करेगा। इसमें यह विवरण शामिल होना चाहिए कि बोर्ड
कैसे प्रचालन करता है तथा साथ ही एक उच्च स्तरीय विवरण शामिल होगा कि किस
प्रकार के निर्णय बोर्ड द्वारा लिए जाने है तथा कौन से निर्णय प्रबंधन को
प्रत्यायोजित किए जाने है।
- कम्पनी के शीर्षस्थ स्तर पर बोर्ड के संचालन के उत्तरदायित्व तथा
कम्पनी के व्यवसाय के संचालन के लिए कार्यपालक उत्तरदायित्व का स्पष्ट
विभाजन होना चाहिए। किसी भी एक व्यष्टि के पास निर्णेय लेने की एकस्वधिकार
शक्तियां नहीं होनी चाहिए।
- बोर्ड में कार्यपालक तथा गैर कार्यपालन निदेशकों का संतुलन होगा (तथा
विशेष रूप से स्वतंत्र गैर कार्यपालक निदेशक) ताकि कोई भी व्यक्ति या
व्यक्तियों का लद्यु समूह बोर्ड के निर्णय को प्रभावित न कर सकें।
- बोर्ड में नए निदेशकों की नियुक्ति के लिए एक औपचारिक, कठोर पारदर्शी
प्रक्रिया होनी चाहिए। बोर्ड में नियुक्तियां योग्यता तथा वस्तुनिष्ठ
मानदंड के आधार पर की जाएंगी यह सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए कि नियुक्त व्यक्तियों के पास काम के लिए
पर्याप्त समय उपलब्ध हो।
- बोर्ड को अपने कर्त्तव्यों के निर्वहन में सक्षम बनाने के लिए समुचित
स्वरूप में तथा उत्कृष्ट जानकारी सामयिक तरीके से उपलब्ध कराई जानी
चाहिए। सभी निदेशकों को बोर्ड में प्रवेश में समय प्रेरण प्राप्त होना चाहिए तथा वे नियमित रूप से अपने कौशलों तथा ज्ञान को अद्यतन
तथा नवीनीकृत करेंगे। उनकी कम्पनी सचित की सलाह तथा सेवाओं तक पहुंच होना
चाहिए जो यह सुनिश्चित करने के लिए बोर्ड के प्रति उत्तरादायी है कि बोर्ड
की प्रक्रियाविधियों का अनुपालन किया जा रहा है।
- बोर्ड स्वयं अपने निष्पादन का तथा अपनी समितियों और अलग अलग सभी निदेशकों का औचारिक तथा कठोर वार्षिक मूल्यांकन करेगा। बोर्ड वार्षिक
रिपोर्ट में यह बताएगा कि निष्पादन मूल्यांकन किस प्रकार संचालित किया
गया है।
- सभी निदेशक अपनी नियुक्ति के पश्चात प्रथम वार्षिक आम बैठक में
शेयरधारकों द्वारा निर्वाचन तथा तत्पश्चात अधिकतम तीन वर्षों के अंतराल
पर पुन: निर्वाचन के अध्यधीन होंगे। निर्वाचन या पुन:निर्वाचन के लिए
प्रस्तुत निदेशकों के नामों के साथ उनके पर्याप्त इतिवृत्त ब्यौरे तथा
कोई अन्य संगत सूचना होनी चाहिए ताकि शेयरधारक उनके निर्वाचन के संबंध में
जानकारी पूर्वक निर्णय ले सकें।
- पारिश्रमिक के स्तर पर्याप्त होने चाहिए जो कम्पनी के संचालन हेतु
आवश्यक उत्कृष्ट योग्यता वाले निदेशकों को आकृष्ट, प्रतिधारिता
तथा प्रेरित कर सके किंतु कम्पनी को इस प्रयोजनार्थ आवश्यकर्ता से अधिक
राशि का भुगतान करने से बचना चाहिए पारश्रमिक के निष्पादन संबंधित तत्व
कार्यपालक निदेशकों के कुल पारिश्रमिक पैकेज के एक महत्वपूर्ण अनुपात का
निर्माण करेंगे तथा उनकी अभिकल्पना उनके हितों को शेयरधारकों के हितों के
साथ संरेखित करने तथा उच्चतम स्तरों पर निष्पादन करने के लिए इन
निदेशकों को पर्याप्त प्रोत्साहन देने के लिए की जानी चाहिए। गैर
कार्यपालक निदेशकों के पारिश्रमिक स्तर भूमिका की समय प्रतिबद्धता तथा
उत्तरदायित्वों को प्रतिबिम्बित करेंगे।
- बोर्ड को वर्ष में कम से कम एक बार समूह की आंतरिक नियंत्रणों की
प्रणाली की प्रभावात्मकता की समीक्षा करनी चाहिए तथा शेयरधारकों को यह
सूचित करना चाहिए कि उन्होंने ऐसा कर लिया है। समीक्षा में सभी
महत्वपूर्ण निरंतर शामिल किए जाएंगे जिनमें वित्तीय प्रचालनात्मक तथा
अनुपालन नियंत्रण तथा जोखिम प्रबंधन प्रणालियां शामिल हैं।
- बोर्ड यह विचार करने के लिए औपचारिक तथा पारदर्शी व्यवस्थाएं करेगा
कि वे वित्तीय रिपोर्टिंग तथा आंतरिक नियंत्रण सिद्धांतों का अनुप्रयोग किस
प्रकार करें तथा कम्पनी के लेखापरीक्षकों के साथ समुचित संबंध किस प्रकार
बनाए रखा जाएं।
- अध्यक्ष यह सुनिश्चित करेगा कि शेयरधारकों के विचार समग्र रूप में
बोर्ड को संसूचित किए जाए तथा साथ ही प्रमुख शेयरधारकों के साथ वह अभिशासन
तथा कार्यनीति पर चर्चा करेगा। वरिष्ठ स्वतंत्र निदेशक अनेक प्रमुख
शेयरधारकों के साथ पर्याप्त बैठकों में भाग लेगा ताकि वह प्रमुख
शेयरधारकों की समस्याओं तथा चिंताओं के संतुलित अवबोधन में सहायता कर
सके। बोर्ड शेयरधारक की राय लेता रहेता जिस भी तरीके से ऐसा करना सर्वाधिक
व्यवहार्य तथा कुशल हो।
- बोर्ड वार्षिक आम बैठक के माध्यम से निवेशकों के साथ संचार करेगा तथा उनकी
प्रतिभागिता को प्रोत्साहन देगा।
- सांस्थानिक शेयरधारक उद्देश्यों की पारस्परिक बोधगम्यता के आधार पर
कम्पनियों के साथ वार्ताए करेंगे। कम्पनियों की अभिशासन व्यवस्थाओं का
मूल्यांकन करते समय, विशेषतया जो बोर्ड की संरचना तथा संघटन से संबंधित
हैं, सांस्थानिक शेयरधारक उनके ध्यान में लाए गए सभी संगत कारकों को
यथेष्ट महत्व देंगे। सबसे अधिक महत्वपूर्ण यह है कि उन पर अपने मतों का
सुविचारित प्रयोग करने का उत्तरदायित्व है।
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