कम्पनी के
कार्यकलापों में तथा साथ ही शेयरधारकों के अधिकारों तथा
निदेशक मंडल की भूमिका के बारे में अभिशासन, जवाबदेहिता
तथा पारदर्शिता के मुद्दे कभी भी इतने प्रमुख नहीं रहे हैं
जितने वे आज है। नैगम शासन ने बोर्ड कक्ष चर्चाओं में
केंद्रीय स्थान ग्रहण कर लिया है।
नैगम शासन में
अंतरराष्ट्रीय रुझानों के साथ स्वयं को संरेखित करने
वाला भारत एक तीव्रतम उदीयमान राष्ट्र बन गया है।
परिणामस्वरूप, भारतीय कम्पनियां वर्धनात्मक रूप से
विश्व भर के नवीनतर तथा अपेक्षाकृत बड़े बाजारों में पहुंच
बनाने तथा साथ ही अधिक व्यवसाय अर्जित करने में समर्थ रही
है। सरकार तथा विनियामकों की अनुक्रिया भी नैगम त्रुटियों
की चुनौतियां का सामना करने में प्रशंसनीय रूप से तीव्र
रही है। किन्तु चूंकि वैश्विक माहौल में निरंतर परिवर्तन
हो रहा है, भावी नैगमों के निर्माण तथा मूल्य सृजन के लिए
अच्छी नैगम शासन प्रक्रियाओं को अपनाने तथा बनाए रखने की
अपेक्षाकृत अधिक आवश्यकता है।
यह सत्य है कि "नैगम शासन" की कोई अद्वितीय संरचना
या अभिकल्प नहीं होता तथा उसे अधिकांशत: अस्पष्ट माना
जाता है। इसके विभिन्न मुद्दों जैसे वित्तीय तथा
प्रबंधकीय प्रकटन की गुणता तथा प्रायिकता, सर्वोत्तम
प्रक्रिया संहिता का अनुपालन, निदेशक मंडल की भूमिका तथा
उत्तरदायित्व शेयरधारक अधिकार इत्यादि के बारे में अभी
भी जागरुकता का अभाव है। नैगम क्षेत्र में विफलताओं तथा
घोटालों की अनेक घटनाएं हुई हैं जैसे कम्पनियों तथा उनकी
लेखाकरण फर्मों में सांठ गांठ, कमजोर अथवा अप्रभावपूर्ण
आंतरिक लेखापरीक्षा की विद्यमानता, प्रबंधकों में अपेक्षित
कौशलों का अमाव, उचित प्रकटनों का अभाव, मानकों का
अननुपालन इत्यादि। परिणामत: प्रबंधन तथा लेखापरीक्षक
दोनों ही अपेक्षाकृत अधिक संदेह तथा संवीक्षा के दायरे में
आ गए हैं।
किंतु वैश्विक बाजारों के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था के
एकीकरण से देश में उद्योगपति तथा नैगमों को वर्धित रूप से
बेहतर तथा पारदर्शी नैगम प्रक्रियाएं अपनाने के लिए कहा जा
रहा है। जिस अंश (सीमा) तक ये नैगमें अच्छे नैगम
शासन के बुनियादी सिद्धांतों का अनुपालन करते है, वह
प्रमुख निवेश निर्णय लेने में वर्धनात्मक रूप से
महत्वपूर्ण कारक है। यदि कम्पनियों को वैश्विक पूंजी
बाजार के पूर्ण लाभ हासिल करने है, दक्षता लाभों को प्राप्त करता है, मितव्ययिता के पैमाने से लाभान्वित
होता है तथा दीर्घावधिक पूंजी को आकृष्ट करना है तो नैगम
शासन को अपनाना विश्वसनीय, सुसंगत, ससंजक तथा प्रेरणापूर्ण
होना चाहिए।
नैगम शासन की उत्कृष्ता निम्न कारकों पर निर्भर है
नामत: प्रबंधन की अखंडता बोर्ड की सक्षमता,
प्रक्रियाओं की पर्याप्तता, व्यष्टि बोर्ड सदस्यों का
प्रतिबद्धता स्तर; नैगम रिपोर्टिंग की उत्कृष्टता
प्रबंधन में पणधारकों की प्रतिभागिता इत्यादि। चूंकि,
कम्पनियों की दीर्घावधिक वित्तीय सुस्वस्थता
को प्रभावित करने
वाला यह एक महत्वूर्ण तत्व है,
अच्छे शासन ढांचे के लिए प्रभावी कानूनी तथा
सांस्थानिक माहौल, व्यवसाय नैतिकता तथा पर्यावरणीय एक
सामाजिक हितों की जागरुकता भी आवश्यक है।
अंतत:, आने वाले वर्षों में, नैगम शासन विश्व भर अधिक
संगत तथा अधिक स्वीकार्य प्रक्रिया बन जाएगी। यह आचार
संहिता तथा ईमानदार व्यवसाय प्रक्रियाओं का निर्माण करने
तथा उन्हें प्रवर्तित करने कानून द्वारा यथा अधिदेशित
वित्तीय तथा गैर वित्तीय प्रकरणों के लिए अधिक कठोर
मानदंडों का अनुसरण करने, अपेक्षाकृत उच्च तथा समुचित
लेखाकरण मानक स्वीकार करने, अपविनियमन तथा प्रतिस्पर्धा
के साथ कर सुधारों को प्रवृत्त करने इत्यादि में कई
कम्पनियों द्वारा किए गए विभिन्न क्रियाकलापों से सहज
स्पष्ट है।
तथापि, नैगम शासन अपेक्षाओं का अनुपयुक्त अनुप्रयोग
शासन प्रणाली के भागीदारों में संबंध पर प्रतिकूल प्रभाव
डाल सकता है। इक्विटी के मालिकों के रूप में, सांस्थानिक
निवेशक वर्धनात्म्क रूप से नैगम शासन में एक निर्णायक
भूमिका की मांग कर रहे है। अलग अलग शेयरधारक, जो
सामान्यत: अभिशासन अधिकारों का प्रयोग नहीं करते,
नियंत्रण शेयरधारकों तथा प्रबंधन से उचित व्यवहार
प्राप्त होने के बारे में अत्यधिक चिंतित हैं। साहूकार,
विशेषतया बैंक शासन प्रणालियों में एक महत्वपूर्ण
भूमिका निभाते है तथा नैगम शासन पर बाह्य अनुवीक्षकों के
रूप में कार्य करते हैं। कर्मचारी तथा अन्य पणधारक भी
नैगम की दीर्घावधिक सफलता तथा निष्पादन में योगदान देने
में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस प्रकार,
कम्पनी की बेहतर संवृद्धि के लिए शासन प्रक्रियाओं को
सही तरीके से अनुप्रयुक्त करना आवश्यक है।
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