परिवर्तन वैश्विक परिदृश्य में नैगम क्षेत्र में प्रभावी
अभिशासन प्रक्रियाएं शुरू करना आवश्यक हो गया है। विश्व
के विभिन्न भागों में घटित हुए नैगम ध्वंसन की श्रृंखला से
विभिन्न महत्वपूर्ण तथा मूल्यवान सीखें प्राप्त हुई है
तदनुसार नैगम शासन के विभिन्न पहलुओं को शामिल करते हुए
अनेक संहिताएं मार्गनिर्देश तथा सिद्धांत बनाए गए है तथा
क्रियान्वित किए गए है। इन की शुरूआत निवेशक विश्वास को
बहाल करने तथा साथ ही नैगम पारदर्शिता और जवाबदेहिता को
बढ़ाने के लिए किया गया था। इनमें निदेशकों तथा मुख्य
कार्यपालक अधिकारियों के जवाबदेहिता मानक स्थापित करने
तथा साथ ही कम्पनी के निदेशकमंडल तथा पणधारकों की
भूमिकाओं और उत्तरदायित्वों को परिभाषित करने का प्रयास
किया गया है।
विगत वर्षों में, नैगम शासन के
मुद्दे पर उच्च स्तरीय ध्यान दिया गया है। वैश्विक रूप
से अनुसरित किए जाने वाले व्यवहारों, संहिताओं तथा अच्छे
नैगम शासन मानकों के संवर्धन के लिए समुचित ढांचे के विकास के संबंध में अंतरराष्ट्रीय समितियोंसंघों इत्यादि की अनेक रिपोर्टें तथा अनुशंसाएं हैं। ये
निम्नलिखित हैं :-
ये अनुशंसाएं तथा सिद्धांत मुख्य रूप से कम्पनी की
संरचना, वित्तीय तथा गैर वित्तीय प्रकटनों, नैगम शासन की
संहिताओं के अनुपालन, प्रतिस्पर्धी पारिश्रमिक नीति,
शेयरधारक अधिकार तथा उत्तरदायित्व, वित्तीय रिपोर्टिंग
तथा आंतरिक नियंत्रणों इत्यादि पर सकेंद्रित है। बदले में
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ये सभी प्राय निदेशक मंडल,
कम्पनी प्रबंधन तथा प्रशासन की प्रचालनात्मक प्रणालियों
में अनुकूल परिवर्तन लाने तथा साथ ही पर्यवेक्षी तथा
कार्यपालक निकायों के बीच संबंधों को सुधारने में सहायता
करते हैं। नैगम शासन की कुछ मुख्य संहिताएं तथा सिद्धांत
निम्न प्रकार हैं।
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