वर्ष1999 के
आरभ्भ में, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने सेबी
बोर्ड के सदस्य श्री कुमार मंगलम बिरला के अधीन एक समिति
का गठन अच्छे नैगम शासन के मानकों का संवर्धन तथा उन्नयन
करने के लिए किया। समिति द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट भारतीय
कम्पनियों में शासन की प्रवृत स्थितियों के साथ साथ
पूंजी बाजारों की स्थिति के संदर्भ में "नैगम शासन
संहिता" का विकास करने के लिए किया गया प्रथम औपचारिक तथा
व्यापक प्रयास है।
समिति के विचारार्थ विषय निम्न थे
:-
- सूचीबद्ध कम्पनियों में वित्तीय तथा गैर वित्तीय, दोनों प्रकार की
प्रकटन, ऐसे प्रकटनों का तरीका तथा प्रायिकता, स्वतंत्र तथा बाहरी
निदेशकों का उत्तरदायित्व, जैसे क्षेत्र में नैगम शासन के मानकों को
सुधारने के लिए कम्पनियों के साथ स्टॉक एक्सचेंजों द्वारा निष्पादित
सूचीयन करार में उपयुक्त संशोधनों तथा किन्हीं अन्य उपायों का सुझाव
देना;
- नैगम सर्वोत्तम प्रक्रियाओं की संहिता का मसौदा तैयार करना; तथा
- आंतरिक सूचना तथा आंतरिक कारोबार संबंधी संव्यवहार करने के लिए
कम्पनियों के अंदर संस्थापित किए जाने वाले सुरक्षोपायों का सुझाव देना।
समिति का प्राथमिक उद्देश्य निवेशकों तथा शेयरधारकों
के परिप्रेक्षय से नैगम शासन का अवलोकन करना तथा भारतीय
नैगम माहौल के उपयुक्त एक 'संहिता' को तैयार करना है।
समिति ने शेयरधारकों निदेशक मंडल तथा प्रबंधको को नैगम
शासन के तीन प्रमुख संघटकों के रूप में अभिज्ञात किया है
तथा इनमें से प्रत्येक संघटक के संबंध में उनकी भूमिकाओं
तथा उत्तरदायित्वों के साथ साथ अच्छे नैगम शासन के संदर्भमें उनके अधिकार्य को भी अभिचिहनंकित करने का
प्रयास किया है।
नैगम शासन में अनेक दावेदार है:शेयरधारकतथा अन्य पणधारक
जिनमें आपूर्तिकर्ता, ग्राहक, साहूकार तथा बैंककार कम्पनी
के कर्मचारी, सरकार तथा कुल मिलाकर समाज शामिल है। यह
रिपोर्ट समिति द्वारा पणधारकों की एक विशिष्ट श्रेणी
नामत: शेयरधारकों के हितों को प्रमुखत: ध्यान में रख कर
तैयार की गई है जो निवेशकों के साथ मिलकर सेबी के प्रमुख
निर्वाचन क्षेत्र का संघटन करते हैं जबकि अन्य पणधारकों
की आवश्यकताओं की भी इसमें अवेहलना नहीं की गई हैं।
अधिदेशात्मक तथा गैर अधिदेशात्मक अनुशंसाएं
समिति ने अनुशंसाओं को दो श्रेणियों में विभाजित किया
है नामत: अधिदेशासत्मक तथा गैर अधिदेशासत्मक जो
अनुशंसाएं नैगम शासन के लिए नितांत आवश्यक हैं, जिन्हें
स्पष्टतया परिभाषित किया जा सकता है तथा जिन्हें सूचीयन
करार के संशोधन के जरिए प्रवर्तित किया जा सकता है,
उन्हें अधिदेशात्मक के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है
तथा अन्य अनुशंसाएं जो या तो वांछनीय है अथवा जिनके लिए
कानूनों को परिवर्तित किया जाना आवश्यक है, उन्हें कुछ
समय के लिए गैर अधिदेशात्मक के रूप में वर्गीकृत किया जा
सकता है।
अधिदेशात्मक अनुशंसाएं
- 3 करोड़ रुपए तथा उसमें अधिक की प्रदत्त पूंजी वाली सूचीबद्ध
कम्पनियों पर प्रयोज्य हैं।
- निदेशक मंडल का संघटन - कार्यपालक तथा गैर कार्यपालक निदेशकों का
इष्टतम संयोजन
- लेखापरीक्षा समिति - 3 स्वतंत्र निदेशकों के साथ जिनमें एक को वित्तीय
तथा लेखाकरण ज्ञान हो।
- पारिश्रमिक समिति
- बोर्ड प्रक्रिया विधि - 2 बैठकों के बीच अधिकतम 4 माह के अंतराल के साथ
वर्ष में बोर्ड की कम से कम चार बैठकें। प्रचालनात्मक योजनाओं, पूंजीगत
बजट, त्रैमासिक परिणामों, समिति की बैठक को कार्यवृत्त की समीक्षा करना,
निदेशक 10 से अधिक समितियों का सदस्य नहीं होगा तथा सभी कम्पनियों में 5
से अधिक समितियों के अध्यक्ष के रूप में कार्य नहीं करेगा।
- प्रबंधन चर्चा तथा विश्लेषण रिपोर्ट जिसमें उद्योग संरचना, अवसर,
खतरे, जोखिम, आउटलुक, आंतरिक नियंत्रण प्रणाली को शामिल किया जाएगा।
- शेयरधारकों के साथ सूचना साझेदारी
गैर अधिदेशात्मक अनुशंसाएं :
- अध्यक्ष की भूमिका
- बोर्ड की पारिश्रमिक समिति
- ज्ञापन में परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण मामलों को शामिल करने वाले
अर्धवार्षिक वित्तीय निष्पादन डाक मतदान को प्राप्त करने का शेयरधारकों का
अधिकार
- उपक्रम के सम्पूर्ण या महत्वपूर्ण हिस्से की बिक्री
- नैगम पुनर्सरचना
- पूंजी का आगे और निर्गम
- नए व्यवसायों में प्रवेश करना
समिति के अनुसार, ये अनुशंसाएं सूचीबद्ध कम्पनियों,
उनके निदेशकों, प्रबंधकों, कर्मचारियों तथा ऐसी कम्पनियों
के साथ संबद्ध व्यवसायियों पर, इस संभाग में बाद में दी गई
अनुसूची में प्रस्तावित समय सारणी के अनुसार प्रयोज्य की
जाएंगी। संहिता का अक्षरश: अनुपालन किया जा जाएगा तथा इसका
अनुपालन सदैव इस तरीके से किया जाएगा कि स्वरूप के बजाए
विषय वस्तु को प्राथमिकता दी जाए। अनुशंसाओं को व्यवहार
में लाने का अन्त्य उत्तरदायित्व सीधे निदेशक मंडल तथा
कम्पनी के प्रबंधन पर है।
ये अनुशंसाएं क्रियान्वयन अनुसूची के अनुसरण में सभी
सूचीबद्ध निजी तथा सरकार क्षेत्र की कम्पनियों पर
प्रयोज्य होंगी। जहां तक सूचीबद्ध
निकायों का संबंध है, जो कम्पनियों नहीं है बल्कि अन्य
संविधियों के अंतर्गत
निगमित निकाय हैं (उदाहरणार्थ निजी तथा सरकार क्षेत्र के
बैंक, वित्तीय संस्थान, बीमा कम्पनियां इत्यादि), ये
अनुशंसाएं उस सीमा तक प्रयोज्य होगी कि वे संगत विनियामक
प्राधिकरणों द्वारा जारी उनकी संबंधित संविधियों तथा
मार्गनिर्देर्शों या निदेशों का उल्लंघन न करें।
समिति यह मानती है कि अनुशंसाओं के अनुपालन में
कम्पनियों के विद्यमान निदेशक मंडलों का पुनर्गठन निहितत होगा। यह इस बात को भी मानती है कि कुछ
कम्पनियों विशेषतया छोटी कम्पनियों के इन शर्तों के
तत्काल अनुपालन में कठिनाई होगी।
इन अनुशंसाओं को सेबी द्वारा चरणबद्ध तरीके में सूचीयन
करार के खंड 49 के जरिए क्रियान्वित किया गया।
^ऊपर