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नैगम शासन के ओईसीडी सिद्धांतों का विकास
ओईसीडी तथा गैर ओईसीडी सरकार को अपने देशों में नैगम शासन के लिए कानूनी, सांस्थानिक तथा विनियामक ढांचे का
मूल्यांकन तथा सुधार करने के उनके प्रयासों में सहायता
करने तथा स्टॉक एक्सचेंजों, निवेशकों, कॉर्पोरेशनों तथा
अन्य पक्षों, जिनकी अच्छे नैगम शासन के विकास की
प्रक्रिया में भूमिका है, को मार्गदर्शन तथा सुझाव उपलब्ध
कराने के उद्देश्य से किया गया था। यद्यपि, ये सिद्धांत
मुख्यत: सार्वजनिक रूप से व्यापारित कंपनियां (वित्तीय
तथा गैर वित्तीय दोनों) पर मुख्यत: संकेन्द्रित है ये गैर
व्यापारित कंपनियों, उदाहरणतया निजी रूप से धारित तथा
राज्य स्वामित्वाधीन उद्यमों में नैगम शासन को
सुधारने में भी एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में कार्य करते
हैं। इन सिद्धांतों में प्रमुख: रूप से निम्न शामिल है :-
- एक प्रभावी नैगम शासन ढांचे का विकास समग्र आर्थिक निष्पादन,
बाज़ार अखंडता तथा प्रोत्साहनों पर इसके प्रभाव के दृष्टिगत किया जाना
चाहिए जिसका सृजन वह बाज़ार भागीदारों के लिए तथा साथ ही पारदर्शी तथा दक्ष
बाज़ारों के संवर्धन के लिए करता है। किसी क्षेत्राधिकार, में नैगम शासन प्रक्रियाओं को प्रभावित करने वाली कानूनी तथा विनियामक अपेक्षाएं
कानून के नियम के सुसंगत, पारदर्शी तथा प्रवर्तनीय होतनी चाहिए। उनमें
विभिन्न पर्यवेक्षी, विनियामक तथा प्रवर्तन प्राधिकरणों में
उत्तरदायित्वों का स्पष्ट विभाजन दर्शाया जाना चाहिए।
- नैगम शासन बुनियादी शेयरधारक अधिकारों का संरक्षण करेगा तथा उन
के प्रयोग को सुसाध्य बनाएंगा, इन अधिकारों में ये अधिकार शामिल हैं : (i)
स्वामित्व पंजीकरण विधियों का अधिकार;
(ii) शेयर संसूचन या अंतरण का अधिकार; (iii) सामयिक तथा नियमित आधार पर
कॉर्पोरेशन संबंधी संगत तथा महत्वपूर्ण सूचना प्राप्त करने का अधिकार; (iv)
आम शेयरधारकों की बैठकों में भाग लेना और मतदान करना; (v) बोर्ड के
सदस्यों को निर्वाचित करने तथा हटाने का अधिकार, तथा (vi)
कॉर्पोरेशन के लाभों में हिस्से का अधिकारा। शेयरधारकों को मूलभूत नैगम परिवर्तनों जैसे निगमन अनुच्छेदों का संविधियों में संशोधन,
अतिरिक्त शेयरों को प्राधिकृत करना इत्यादि के संबंध में निर्णयों में
भाग लेने तथा उनके बारे में पर्याप्त सूचना दिए जाने का अधिकार है; आदि।
- कुछ शेयरधारकों को अपनी इक्विटी स्वामित्व के अननुपातिक नियंत्रण
अंश प्राप्त करने में समर्थ बनाने वाले पूंजीगत संरचनाओं तथा व्यवस्थाओं
को प्रकट किया जाना चाहिए। पूंजी बाज़ारों में कॉर्पोरेशन नियंत्रण के
अधिग्रहण को शामिल करने वाले नियमों तथा प्रक्रियाविधियों, तथा असाधारण
लेनदेनों जैसे कॉर्पोरेट परिसंपत्तियों के पर्याप्त भागों का विलयन तथा बिक्री
को स्पष्ट रूप से दर्शाया तथा प्रकट किया जाना चाहिए ताकि निवेशक अपने
अधिकारों तथा मार्ग को समझ सकें। लेन देन पारदर्शी कीमतों पर तथा उचित
परिस्थितियां में किए जाने चाहिए जो सभी शेयरधारकों के अधिकारों का उनकी
श्रेणी के अनुसार संरक्षण करें।
- किसी श्रेणी की समान श्रृंखला के सभी शेयरधारकों, जिनमें अल्पसंख्यक
तथा विदेशी शेयरधारक शामिल है, के साथ समान व्यवहार किया जाएगा। एक श्रेणी
की किसी भी श्रृंखला में, सभी शेयरों को समान अधिकार प्राप्त होंगे। सभी
निवेशक शेयरों को खरीदने से पहले शेयरों की सभी श्रृंखलाओं तथा श्रेणियों
के साथ संबद्ध अधिकारों के बारे में सूचना प्राप्त करने में सक्षम होगे।
इसके अतिरिक्त, सभी शेयरधारकों को अपने अधिकारों के उल्लंघन के लिए
प्रभावी शिकायत निवारण प्राप्त करने का अवसर प्राप्त होगा।
- अंदरूनी कारोबार तथा कदाचारी स्व-संव्यवहार प्रतिबिद्ध होगा।
- नैगम शासन ढांचे में कानून द्वारा स्थापित या पारस्परिक
समझौते के जरिए स्थापित पणधारकों के अधिकारों को मान्य किया जाएगा तथा
सम्पत्ति, नौकरियां तथा वित्तीय रूप से सुदृढ़ उद्यमों के स्थायित्व
सृजन में कॉर्पोरेशनों तथा पणधारकों के बीच सक्रिय सहयोग को प्रोत्साहन
दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, इसे एक प्रभावी, दक्ष दिवालिया ढांचे द्वारा
तथा ऋणदाता अधिकारों के प्रभावी प्रवर्तन द्वारा अनुपूरित किया जाएगा।
- कर्मचारी प्रतिभागिता के लिए निष्पादित वर्धन प्रक्रमों के विकास की
अनुमति होगी।
- नैगम शासन ढांचा नैगम के संबंध में समस्त महत्वपूर्ण
मामलों के संबंध में सामयिक तथा सही प्रकटन किया जाना सुनिश्चित करेगा
जिनमें कंपनी की वित्तीय स्थिति, प्रचालनात्मक परिणामों, उद्देश्यों,
निष्पादन, स्वामित्व, पारिश्रमिक नीति तथा अभिशासन संबंधी मामले शामिल
हैं। सूचना लेखाकरण तथा वित्तीय एवं गैर वित्तीय प्रकटन के उच्च उत्कृष्ट मानकों के अनुसार तैयार तथा प्रकट की जाएगी।
- वार्षिक लेखा परीक्षा किसी स्वतंत्र, सक्षम तथा अर्हकता प्राप्त
लेखापरीक्षक द्वारा संचालित की जाएगी ताकि बोर्ड तथा शेयर धारकों को ऐसा
बाह्य तथा वस्तुनिष्ठ आश्वासन प्राप्त हो कि वित्तीय विवरण सभी
महत्वपूर्ण मामलो में कम्पनी की वित्तीय स्थिति तथा निष्पादन के उचित
द्योतक हैं। बाह्य लेखा परीक्षक शेयर धारकों को जवाबदेह होंगे तथा कम्पनी
के प्रति उनका यह कर्त्तव्य होगा कि लेखापरीक्षा के संचालन में वे यथेष्ट
व्यावसायिक सावधानी का प्रयोग करें।
- नैगम शासन ढांचा कम्पनी के कार्यनीतिगत मार्गदर्शन, बोर्ड
द्वारा प्रबंधन के प्रभावी निगरानी तथा कम्पनी और इसके शेयर धारकों के
प्रति बोर्ड की जवाबदेही को सुनिश्चित करेगा। इसका अर्थ है कि बोर्ड से
सदस्य पूर्णतया सुविज्ञ आधार पर, सदभाव में, यथेष्ट तत्परता तथा
सावधानीपूर्वक तथा कम्पनी और शेयरधारकों के सर्वोत्तम हित में कार्य
करेंगे। इसमें नैगम कार्यनीति प्रमुख कार्य योजनाओं, जोखिम नीति,
वार्षिक बजट, व्यवसाय योजनाओं, निष्पादन उद्देश्यों इत्यादि की समीक्षा
तथा मार्गदर्शक किया जाएगा तथा साथ ही कम्पनी की शासन प्रक्रियाओं की
प्रभावात्मकता की निगरानी की जाएगी तथा यथावश्यक परिवर्तन किए
जाएंगे।
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