आज
अच्छी नैगम शासन प्रक्रियाओं को अपनाया जाना व्यवसाय
करने के एक अखंड तत्व के रूप में उभरा है। यह न केवल
उदीयमान वैश्विक बाजार परिदृश्य में स्थायी संवृद्धि के
लिए और प्रतिस्पर्धा का सामना करने के लिए एक
पूर्वापेक्षा है बल्कि पणधारकों के लिए मूल्य को अधिकतम
करने के लिए आचित्स जवाबदेही, प्रकटन तथा पारदर्शिता के
प्राचलों का साकार रूप भी हैं।
नैगम शासन कानून के घेरे
से परे है। इसे केवल विधान द्वारा विनियमित नहीं किया जा
सकता है। विधान केवल एक आम ढांचे का निर्धारण कर सकता है
मानक सुनिश्चित करने के लिए "स्वरूप"। "वास्तविकता"
अंतत: प्रक्रिया की विश्वसनीयता तथा अखंडता का निर्धारण
करेगी। वास्तविकता अटल रूप से प्रबंधकों के नैतिक मानकों
तथा विचारधारा से जुड़ी हुई हैं।
एशियाई विकास बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष आर्थिक
सहयोग तथा विकास संगठन तथा विश्व बैक द्वारा अनेक देशों
में संचालित नैगम शासन प्रक्रियाओं के अध्ययनों से पता
चलता है कि अच्छे नैगम शासन को कोई एकल मॉडल नहीं हैं।
ओ ई सी डी संहिता यह भी मान्य करती है कि विभिन्न
देशों में विभिन्न कानून प्रणालियों, सांस्थानिक ढांचे
तथा परम्पराएं नैगम शासन के प्रति अनेक विभिन्न
दृष्टिकोणों के विकास में परिणामी हुई है। तथापि, उच्चांश
पूर्विकता शेयरधारकों के हित को दी गई र्है जो अपनी निवेश
निधियों को बुद्धिमतापूर्वक तथा प्रभावपूर्ण ढंग से प्रयोग
में लाने के लिए नैगम पर विश्वास हैं। यह सभी
अच्छी नैगम व्यवस्थाओं के लिए मान्य है।
साथ ही, मॉडल कोई भी होने के बावजूद नैगम
उत्तरदायित्वों के तीन विभिन्न स्वरूप है जिन्हें सभी
मॉडल स्वीकारते हैं :-
- राजनैतिक उत्तरदायित्व: बुनियादी राजनैतिक बाहयताएं
वैध कानून का अनुपालन करना, अधिकारों की प्रणाली को मान्य .करना तथा
सांविधानिक राज्य के सिद्धांतों को स्वीकारना है।
- सामाजिक उत्तरदायित्व: नैगम नैतिक उत्तरदायित्व
जिन्हें कम्पनी समझती है तथा साझे मूल्यों वाले समुदाय के रूप में अथवा
साझे मूल्यो वाले अपेक्षाकृत बड़े समुदाय के भाग के रूप में उनका संवर्धन
करती है।
- आर्थिक उत्तरदायित्व: नवाचार तथा शेयरधारकों के
अधिकारों/लोकतंत्र के लिए सम्मान के आधार पर लाभार्जन के लिए
प्रतिस्पर्धी बाजारों के तर्काधार के अनुसार कार्य करना जिसे "शेयरधारक
मूल्य को इष्ट तक करना" की प्रबंधकों की बाह्यता के रूप में व्यक्त
किया जा सकता है।
इसके अतिरिक्त समुदायों जिनमें वे प्रचालन करते हैं, के पर्यावरणीय तथा सामाजिक हित की व्यावसायिक नैतिकता तथा
नैगम जागरुकता नैगम की प्रतिष्ठा तथा दीर्घावधि
निष्पादन को प्रभावित कर सकती है।
नैगम शासन के तीन प्रमुख संघटक है - निदेशक मंडल
शेयरधारक तथा प्रबंधक
- नैगम शासन की किसी प्रणाली में केंद्रीय भूमिका निदेशक मंडल निभाता है।
यह पणधारकों के प्रति जवाबदेह है तथा प्रबंधन को निदेशित तथा नियंत्रित
करता है। यह कम्पनी को संचालित करता है, इसके कार्यनीतिगत लक्ष्य तथा
वित्तीय लक्ष्य निर्धारित करता है तथा उनके क्रियान्वयन की देखरेख करता है,
पर्याप्त आंतरिक प्रणालियां सुव्यवस्थित करता है तथा आवधिक रूप से
कम्पनी की प्रगति तथा क्रियाकलापों की रिपोर्ट पारदर्शी तरीके में
पणधारकों को देता है।
- नैगम शासन में पणधारकों की भूमिका निदेशकों तथा लेखापरीक्षकों की
नियुक्ति करना तथा बोर्ड से कम्पनी के क्रियाकलापों तथा प्रगति संबंधी
अपेक्षित सूचना पारदर्शी तरीके से उन्हें आवधिक रूप से उपलब्ध कराने की
अपेक्षा करके कम्पनी के उचित अभिशासन के लिए बोर्ड को जवाबदेह बनाना है।
- प्रबंधन का उत्तरदायित्व बोर्ड द्वारा प्रदत्त निदेश के अनुसार
कम्पनी का प्रबंधन संचालन करना, पर्याप्त नियंत्रण प्रणालियां
सुव्यवस्थित करना तथा उनके प्रचालन का सुनिश्चय करना तथा बोर्ड को
सामयिक आधार पर तथा पारदर्शी तरीके से सूचना उपलब्ध कराना ताकि बोर्ड को
उसके प्रति प्रबंधन की जवाबदेही की निगरानी करने में समर्थ बनाया जा
सके।
नैगम शासन के अंतर्हित सिद्धांत तीन बुनियादी परस्पर
संबंधित खंडों के आस पास घूमते हैं। ये है :-
- अखंडता तथा औचित्य
- पारदर्शिता तथा प्रकटन
- जवाबदेही तथा उत्तरदायित्व
अच्छे नैगम शासन के मुख्य संघटक निम्नलिखित हैं :-
- बोर्ड की भूमिका तथा शक्तियां: अच्छे नैगम शासन
की सर्वप्रथम आवश्यकता है बोर्ड, बोर्ड सी ई ओ तथा अध्यक्ष की शक्तियां,
भूमिका, उत्तरदायित्व तथा जवाबदेही का स्पष्ट अभिचिहांकन।
- विधान : एक स्पष्ट तथा सुस्पष्ट विधायी तथा विनियामक ढांचा प्रभावी नैगम शासन की मूलभूत आवश्यकता है।
- आचार संहिता : यह अनिवार्य है कि संगठन की सुस्पष्ट
निर्धारित आचार संहिता सभी पणधारकों को संसूचित की जाए तथा वे उसे अच्छी
प्रकार समझ लें। संगठन के प्रत्येक सदस्य द्वारा ऐसी आचार संहिता मापन
करने के लिए कोई प्रणाली सुव्यवस्थित होनी चाहिए।
- बोर्ड की स्वतंत्रता : ठोस नैगम शासन के लिए
स्वतंत्र बोर्ड अनिवार्य है। इसका अर्थ है कि बोर्ड वस्तुचिन्ह
परिप्रेक्षय में प्रबंध की के निष्पादन का मूल्यांकन करने में सक्षम हो।
अत: अधिकांश बोर्ड सदस्य प्रबंधन दल तथा कम्पनी के साथ किन्हीं वाणिज्यिक
संव्यवहारों, दोनों से स्वतंत्र होने चाहिए। ऐसी स्वतंत्रता प्रबंधन की
गतिविधियों का पर्यवेक्षण करने तथा साथ ही यह सुनिश्चित करने में बोर्ड की
प्रभावात्मकता सुनिश्चित करती है कि कोई वास्तविक या परिकल्पित हित टकराव
न हो।
- बोर्ड कौशल : अपने कार्यों का प्रभावूपर्ण ढंग से निर्वहन करने
में समर्थ होने के लिए, बोर्ड में गुणों, कौशलों, ज्ञान तथा अनुभव का
आवश्यक मिश्रण होना चाहिए ताकि उत्कृष्ट योगदान संभव हो। इसमें
प्रचालनात्मक या तकनीकी विशेषज्ञता, वित्तीय कौशल, कानूनी कौशल तथा साथ ही
सरकारी तथा विनियामक अपेक्षाओं का ज्ञान शामिल है।
- प्रबंधन परिवेश : इसमें स्पष्ट उद्देश्यों तथा
समुचित नैतिक ढांचे का गठन, यथेष्ट प्रक्रियाओं की स्थापना,
उत्तरदायित्व तथा जवाबदेही के स्पष्ट वर्णन तथा पारदर्शिता की
व्यवस्था, ठोस व्यवसाय आयोजन का क्रियान्वयन, व्यवासय जोखिम आकलन को
प्रोत्साहन, नौकरियों के लिए सही लोग तथा सही कौशल होना, स्वीकार्य
व्यवहार के लिए स्पष्ट सीमाएं स्थापित करना, निष्पादन मूल्यांकन
मापदंड स्थापित करना तथा निष्पादन का मूल्यांकन करना तथा व्यष्टि और
समूह योगदान को पर्याप्त मान्यता देना शामिल है।
- बोर्ड की नियुक्तियां : यह सुनिश्चित माना कि बोर्ड
में सर्वाधिक सक्षम व्यक्ति ही नियुक्त किए जाएं, बोर्ड के व्यापक खोज
की प्रक्रिया के जरिए भरे जाने चाहिए। पुनर्नियुक्तियों के साथ साथ नए
निदेशकों की नियुक्ति के लिए एक सुपरिभाषित तथा खुली प्रक्रियाविधि
व्यवस्थित की जानी चाहिए।
- बोर्ड में सन्निवेशन तथा प्रशिक्षण : यह सुनिश्चित
करने के लिए आवश्यक है कि निदेशक उन सभी घटनाक्रमों से अवगत रहे जो नैगम
शासन तथा अन्य संबंधित मामलों को प्रभावित करते है या कर सकते हैं।
- बोर्ड की बैठकें : ये बोर्ड के निर्णय हेतु मंच है।
ये बैठकें निदेशकों को अपने उत्तरदायित्वों के निर्वहन में समर्थ बनाती
है। बोर्ड बैठकों की प्रभावात्मकता सावधानीपूर्वक योजनाबद्ध कार्यसूचियों
पर तथा बोर्ड की बैठकों से पर्याप्त पहले निदेशकों को संगत कागजात तथा
सामग्री उपलब्ध कराने पर निर्भर है।.
- कार्य नीतिगत व्यवस्था: कम्पनी के उद्देश्य को
स्पष्ट रूप से एक दीर्घावधिक नैगम कार्यनीति में प्रलेखित किया जाना
चाहिए जिसमें प्राप्य तथा मापन योग्य निष्पादन लक्ष्यों तथा उपलब्धियों
सहित एक वार्षिक व्यवसाय योजना शामिल हो।
- व्यवसाय तथा समुदाय बाध्यताएं: यद्यपि किसी व्यवसाय
निकाय की मूल गतिविधि अंतर्हित रूप से वाणिज्यिक होती है फिर भी इससे
समुदाय की बाह्यताओं को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। पणधारकों को समुदाय
बाह्यताओं को पूरा करने के लिए प्रस्तावित तथा किए गए चल रहे उपायों के
द्वारा अनुमोदन के बारे में सूचित किया जाना चाहिए।
- वित्तीय तथा प्रचालनात्मक रिपोर्टिंग: बोर्ड को
व्यापक, नियमित, विश्वसनीय, सामयिक, सही तथा सूचना ऐसे स्वरूप तथा
उत्कृष्ट रूप में अपेक्षित है जो इसके नैगम निष्पादन का अनुवीक्षण करने
के कार्य के निवर्हन के लिए समुचित हो।
- बोर्ड निष्पादन की निगरानी करना: बोर्ड को
अभिज्ञात समीक्षा के अलावा प्रमुख निष्पादन संकेतकों का प्रयोग करके आवधिक
अंतरालों पर अपने संयुक्त निष्पादन का अनुवीक्षण तथा मूल्यांकन करना
चाहिए तथा साथ ही व्यष्टि निदेशकों के कार्य का भी मूल्यांकन करना चाहिए।
- लेखापरीक्षा समिति: अन्य बातों के अलावा प्रबंधन,
आंतरिक तथा सांविधिक लेखापरीक्षकों के साथ संबंधन, आंतरिक नियंत्रण की
पर्याप्तता की समीक्षा करने तथा महत्वपूर्ण नीतियों और प्रक्रियाओं के
अनुपालन, प्रमुख मुद्दों पर बोर्ड को रिपोर्ट देने के लिए उत्तरदायी है।
- जोखिम प्रबंधन: जोखिम नैगम कार्यकरण तथा शासन का
एक प्रमुख तत्व है। ऐसे जोखिमों को अभिज्ञात करने उनका विश्लेषण तथा
उपचार करने की एक सुस्पष्ट रूप से स्थापित प्रक्रिया होनी चाहिए जो
कम्पनी को अपने उद्देश्यों को प्रभावपूर्ण ढंग से हासिल करने में बाधा
डाल सकते हैं। बोर्ड का यह अन्त्य उत्तरदायित्व है कि वह संगठन को होने
वाले प्रमुख जोखिमों को अभिज्ञात करें, जोखिमों के स्वीकार्य स्तर निर्धारित करे तथा यह सुनिश्चित करे कि
वरिष्ट प्रबंधक इन जोखिमों का पता लगाने, इनकी निगरानी करने तथा इन्हें
नियंत्रित करने के लिए उपाय करें।
एक अच्छे नैगम शासन में शेयरधारकों, उधारदाताओं
कर्मचारियों, सरकार इत्यादि के विविध हितों को मान्य
किया जाता है। शासन की नवीन संकल्पना जो जो उत्कृष्ट
नैगम शासन लाने से संबंधित है, विविध नैगम हितों को पूरा
करने के लिए न केवल एक आवश्यकता है बल्कि स्वयं नैगमों
के तथा अर्थव्यवस्था के सर्वोत्तम हितों के लिए एक
प्रमुख अपेक्षा भी है।
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