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भारतीय प्रतिभूति और विनियम बोर्ड (सेबी) की
स्थापना 12 अप्रैल 1992 को भारतीय प्रतिभूति और विनियम बोर्ड अधिनियम 1992
के प्रावधानों के अनुरूप की गई थी। यह
सूचीयन करार के खंड 49 के माध्यम से भारत में सूचीबद्ध
कम्पनियों के कॉर्पोरेट अभिशासन की निगरानी तथा विनियमन
करता है। इस खंड को स्टॉक एक्सचेंजों से सूचीयन करार में
निगमित किया गया है तथा उनके लिए इसके प्रावधानों का
अनुपालन करना अनिवार्य है। इस की शुरूआत सर्वप्रथम वित्तीय
वर्ष 2000-01 में कुमार मंगलम बिरला समिति की
अनुशंसाओं के आधार पर की गई थी। सूचीयन करार के
खंड 49 के उपबंध
निदेशक मंडल
किसी कम्पनी के निदेशक मंडल में कार्यपालक तथा गैर कार्यपालक निदेशकों का
एक इष्टतम संयोजन होगा जिससे निदेशक मंडल के कम से कम पचास प्रतिशत गैर
कार्यपालक निदेशक होंगे। स्वतंत्र निदेशकों की संख्या इस बात पर निर्भर
करेगी कि अध्यक्ष कार्य पालक है या गैर कार्यपालक। गैर कार्यपालक अध्यक्ष होने की स्थिति
में, बोर्ड के कम से कम एक तिहाई सदस्य स्वतंत्र निदेशक होंगे तथा
कार्यपालक अध्यक्ष होने की स्थिति में बोर्ड कम से कम आधे निदेशक स्वतंत्र
निदेशक होंगे। कम्पनी में गैर पालक निदेशकों के सभी आर्थिक संबंध या
लेनदेनों को वार्षिक रिपोर्ट में प्रकट किया जाएगा।
लेखापरीक्षा समिति
- एक अर्हक तथा स्वतंत्र लेखापरीक्षा समिति का गठन किया जाएगा तथा यह
कि :
- लेखापरीक्षा समिति से कम से कम तीन सदस्य होंगे, सभी सदस्य
गैर कार्यपालक निदेशक होंगे जिनमें से अधिकाश स्वतंत्र होंगे तथा कम
से कम एक निदेशक को वित्तीय तथा लेखाकरण का ज्ञान होगा।
- समिति का अध्यक्ष स्वतंत्र निदेशक होगा ;
- अध्यक्ष शेयर धारक प्रश्नों के उत्तर देने के लिए वार्षिक आम
बैठक में उपस्थित रहेगा;
- लेखापरीक्षा समिति ऐसे कार्यपालकों को समिति की बैठकों में उपस्थित
होने के लिए आमंत्रित करेगी जिन्हें वह समुचित समझे (तथा विशेष रूप से
वित्त कार्य के प्रमुख को) किन्तु कभी कभी वह कम्पनी के किसी
कार्यपालक की उपस्थिति के बिना भी बैठक कर सकती है। वित्त निदेशक,
आंतरिक लेखापरीक्षा का प्रमुख तथा जब आवश्यक हो, बाह्य लेखापरीक्षक का
एक प्रतिनिधि लेखापरीक्षा समिति की बैठकों के लिए आमंत्रितियों के रूप
में उपस्थित होंगे।
- कम्पनी सचिव समिति के सचिव के रूप में कार्य करेगा।
- वार्षिक लेखा समिति की बैठक वर्ष में कम से कम तीन बार होगी। एक
बैठक वार्षिक लेखों को अंतिम रूप देने के पूर्व की जाएगी तथा प्रत्येक छ: माह में एक बैठक की जाएगी, बैठक का कोरम लेखा परीक्षा समिति के दो सदस्य या
एक तिहाई सदस्यों का होगा, जो भी उच्चतर हो तथा कम से कम दो स्वतंत्र
निदेशक उपस्थित होने चाहिए।
- लेखा परीक्षा समिति की शक्तियों में निम्न शक्तियां शामिल होंगी
:-
- अपने विचारार्थ विषयों के भीतर किसी भी कार्यपालन की जांच
करना।
- किसी भी कर्मचारी से सूचना प्राप्त करना।
- बाह्य कानूनी या अन्य व्यावसायिक सहायता प्राप्त करना।
- संगत विशेषज्ञता वाले बाहरी व्यक्तियों की उपस्थिति
सुनिश्चित करना यदि वह इसे आवश्यक समझे।
- लेखा परीक्षा समिति की भूमिका में निम्न शामिल है :-
- कम्पनी की वित्तीय रिपोर्टिग प्रक्रिया तथा इसकी वित्तीय सूचना का
अवलोकन यह सुनिश्चित करने के लिए करना कि वित्तीय विवरण सही, पर्याप्त
तथा विश्वसनीय हैं।
- बाह्य लेखा परीक्षक की नियुक्ति तथा उसे हटाए जाने की अनुशंसा
करना, लेखा परीक्षा शुल्क का निर्धारण करना तथा साथ ही किन्ही अन्य
सेवाओं के लिए भुगतान को अनुमोदित करना।
- निम्न पर विशेष रूप से ध्यान सकेन्द्रित करते हुए बोर्ड के
समक्ष प्रस्तुतीकरण से पूर्व वार्षिक वित्तीय विवरणों की प्रबंधकों के
साथ समीक्षा करना :-
- लेखाकरण नीतियों तथा प्रक्रियाओं में कोई परिवर्तन।
- प्रबंधन द्वारा अधिनिर्णय के प्रयोग पर आधारित प्रमुख लेखाकरण
प्रविष्टियां।
- मसौदा लेखापरीक्षा रिपोर्ट में अर्हकताएं।
- लेखापरीक्षा से प्रत्युतपन्न महत्वपूर्ण समायोजन।
- गोईंग कंसर्न (चालू कम्पनी) मान्यता।
- लेखाकरण मानकों का अनुपालन
- वित्तीय विवरण के संबंध में स्टॉक एक्सचेंज तथा कानूनी
अपेक्षाओं का अनुपालन।
- कोई संबंधित पक्षकार लेनदेन अर्थात प्रवर्तकों या
प्रबंधन, उनकी सहायक कम्पनियों या संबंधियों इत्यादि के साथ
महत्वपूर्ण स्वरूप में कोई कम्पनी लेनदेन जो कुल मिलाकर कम्पनी
के हितों में संभावित रूप से टकरा सकते है।
- प्रबंधन, बाह्य तथा आंतरिक लेखा परीक्षकों के साथ समीक्षा करना
तथा आंतरिक नियंत्रण प्रणालियों की पर्याप्तता।
- आंतरिक लेखा परीक्षा की पर्याप्तता की समीक्षा करने जिसमें
आंतरिक लेखापरीक्षा विभाग की संरचना, स्टाफ व्यवस्था तथा विभाग के
प्रमुख पदाधिकारी की वरिष्ठता, रिपोर्टिग संरचना विस्तार तथा आंतरिक
लेखापरीक्षा की पर्याप्तता शामिल है।
- किन्ही महत्वपूर्ण निष्कर्षों के संबंध में आंतरिक
लेखापरीक्षकों के साथ चर्चा तथा अनुवर्ती कार्रवाई।
- आंतरिक लेखा परीक्षकों द्वारा ऐसे मामलों किन्हीं आंतरिक
जांचों के निष्कर्षों की समीक्षा करना जहां महत्वपूर्ण स्वरूप की
संदिग्ध धोखाधडी या आंतरिक लेखा परीक्षा की अनियमितता अथवा विफलता है
तथा मामले की सूचना बोर्ड को देना।
- लेखा परीक्षा आरम्भ होने से पूर्व बाह्य लेखा परीक्षकों के
साथ चर्चा, लेखा परीक्षा का स्वरूप तथा कार्य क्षेत्र तथा चिंता के
किसी क्षेत्र का सुनिश्चय करने के लिए पश्च लेखा परीक्षा चर्चा।
- कम्पनी की वित्तीय तथा जोखिम प्रबंधन नीतियों की समीक्षा
करना।
- जमाकर्ताओं, ऋण पत्र धारकों, शेयरधारकों (घोषित लाभांशों का भुगतान न किए जाने के मामले में) तथा ऋणदाताओं को भुगतान में पर्याप्त
चूककर्ता के कारणों की जांच करना।
- यदि कम्पनी ने कम्पनी अधिनियम के प्रावधान के अनुसरण में
लेखापरीक्षा समिति का गठन किया है तो उक्त लेखापरीक्षा समिति के ऐसे
अतिरिक्त कार्य/ विशिष्टताएं होगी जैसा कि सूचीयन करार में निहित है।
निदेशकों का पारिश्रमिक
- गैर कार्यपालक निदेशकों के पारिश्रमिक का निर्णय निदेशक मंडल द्वारा
किया जाएगा।
- वार्षिक रिपोर्ट के नैगम शासन सबंधी संभाग में निदेशकों
के पारिश्रमिक संबंधी निम्न प्रकटन किए जाएंगे :-
- सभी निदेशकों के पारिश्रमिक पैकेज के सभी तत्व अर्थात वेतन, लाभ,
बोनस, स्टॉक विकल्प, पेंशन इत्यादि।
- निष्पादन मानदंडों सहित नियत संघटक तथा निष्पादन संबंद्ध
प्रात्साहनों के ब्यौरे।
- सेवा संविदाएं, सूचना अवधियां, पृथक्करण शुल्क
- स्टॉक विकल्प ब्यौरे यदि कोई हों - तथा क्या उन्हें बट्टे पर
जारी किया गया है तथा अवधि जिसमें वे उपार्जित होंगे तथा प्रयोग किए जाने
योग्य हैं।
बोर्ड प्रक्रिया विधि
- बोर्ड की बैठक वर्ष में कम से कम चार बार आयोजित की जाएगी तथा
किन्हीं दो बैठकों के बीच अधिकतम चार माह की अवधि का अंतराल होगा।
- निदेशक उन सभी कम्पनियों में अधिकतम 10 समितियों का सदस्य होगा अथवा
अधिकतम पांच समितियों का अध्यक्ष होगा जिनका वह निदेशक है। इसके
अतिरिक्त प्रत्येक निदेशक के लिए यह अधिदेशात्मक अनिवार्य अपेक्षा है कि
वह कम्पनी को उन समिति पदों की सूचना दे जो उसने अन्य कम्पनियों में
धारण किए हुए हैं तथा परिवर्तनों, जब और जैसे वह हो, की सूचना दे।
प्रबंधन
- निदेशक रिपोर्ट के भाग के रूप में या उसके अतिरिक्त, प्रबंधन
चर्चा तथा विश्लेषण रिपोर्ट शेयरधारकों की वार्षिक रिपोर्ट का भाग होगी।
प्रबंधन चर्चा तथा विश्लेषण में कम्पनी की प्रतिस्पर्धी स्थिति द्वारा
निर्धारित सीमाओं के बीच निम्न मामलों पर चर्चा शामिल होगी :-
- उद्योग संरचना तथा घटनाक्रम
- अवसर तथा खतरे
- खंड वार या उत्पाद-वार निष्पादन
- आउटलुक
- जोखिम तथा चिंताएं
- आंतरिक नियंत्रण प्रणालियां तथा उनकी पर्याप्तता
- प्रचलनात्मक निष्पादन के संबंध में वित्तीय निष्पादन संबंधी
चर्चा
- नियोजित व्यक्तियों की संख्या सहित मानव संसाधन/ औद्योगिक
संबंध मोर्चे में महत्वपूर्ण घटनाक्रम
- प्रबंधन द्वारा बोर्ड को सभी महत्वपूर्ण वित्तीय तथा वाणिज्यिक
लेनदेनों के सबंध में प्रकटन किए जाने चाहिए जहां उनकी व्यक्तिगत रुचि है
जिसका कुल मिलाकर कम्पनी के हित के साथ संभावी टकराव हो सकता है
(उदाहरणार्थ कम्पनी शेयरो में संव्यवहार, निकायों के साथ वाणिज्यिक
लेन देन जिनमे प्रबंधकंो तथा उनके संबंधियों इत्यादि की शेयरधारिता है)
शेयरधारक
- किसी नए निदेशक की नियुक्ति अथवा किसी निदेशक की पुन: नियुक्ति
के मामले में शेयरधारकों को निम्न सूचना दी जानी चाहिए :-
- निदेशक का संक्षिप्त ब्यौरा
- विशिष्ट कार्यात्मक क्षेत्रों में उसकी विशेषज्ञता का स्वरूप;
तथा
- उन कम्पनियों के नाम जिनसे उप सव्यक्ति का निदेशकत्व तथा बोर्ड
की समितियों की सदस्यता भी है।
- सूचना जैसे त्रैमासिक परिणाम, कम्पनियों द्वारा विश्लेषकों को किया
गया प्रस्तुतीकरण कम्पनी की वेबसाइट पर डाल दी जानी चाहिए अथवा ऐसे
स्वरूप में भेजी जाएगी कि स्टॉक एक्सचेंज जिस पर कम्पनी सूचीबद्ध है,
उसे अपनी स्वयं की वेबसाइट पर डालने में समर्थ हो।
- किसी गैर कार्यपालक निदेशक की अध्यक्षता के अंतर्गत बोर्ड समिति का
निर्माण विशिष्ट रूप से शेयरधारक तथा निवेशक शिकायतों के निवारण की जांच
करने के लिए की जाएगी जैसे शेयरों का अंतरण, तुलनपत्र प्राप्त न होना,
घोषित लाभांश प्राप्त न होना इत्यादि। इस समिति को 'शेयरधारक / निवेशक
शिकायत समिति' के रूप में पदनामित किया जाएगा।
- शेयर अंतरण की प्रक्रिया को त्वरित करने के लिए, कम्पनी का बोर्ड
शेयर अंतरण की शक्ति किसी अधिकारी को या समिति को अथवा रजिस्ट्रार में तथा
शेयर अंतरण एजेंटों को प्रत्यायोजित करेगा। प्रत्यायोजित प्राधिकारी
पन्द्रह दिन में कम से कम एक बार शेयर अंतरण औपचारिकताओं को पूरा करेगा।
नैगम शासन संबंधी रिपोर्टकम्पनी की वार्षिक
रिपोर्टो में नैगम शासन संबंधी विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट सहित नैगम अभिशासन पर एक पृथक संभाग होगा। किसी भी अधिदेशात्मक अपेक्षा
का अननुपालन अर्थात जो सूचीयन करार का भाग है, उसके कारणों सहित तथा गैर
अधिदेशात्मक अपेक्षाओं को अपनाने की सीमा के साथ विशिष्ट रूप से
दर्शाया जाएगा।
अनुपालन
कम्पनी इस खंड में यथा निर्धारित नैगम शासन की शर्तो के
अनुपालन के संबंध में कम्पनी के लेखापरीक्षकों से एक प्रमाणपत्र प्राप्त
करेगी तथा उस प्रमाणपत्र को निदेशक रिपोर्ट के साथ संलग्न करेगी जिसे
प्रतिवर्ष कम्पनी के शेयरधारकों को भेजा जाता है। यही प्रमाणपत्र कम्पनी
द्वारा दायर की गई वार्षिक विवरणियों के साथ स्टॉक एक्सचेजों को भी भेजा
जाएगा।
^ऊपर
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